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NDPS केस में DSP चीमा को बड़ी राहत:हाईकोर्ट ने आरोप रद्द किए, कहा- रिकॉर्ड में नहीं मिला कोई ठोस सबूत




पंजाब एंड हरियाणा हाईकोर्ट ने एनडीपीएस (नशा तस्करी) मामले में फंसे डीएसपी गुरमुख सिंह चीमा को बड़ी राहत देते हुए उनके खिलाफ लगाए गए आरोप रद्द कर दिए हैं। अदालत ने कहा कि रिकॉर्ड में उनके खिलाफ कोई ठोस सबूत नहीं है, इसलिए मुकदमा चलाना उचित नहीं होगा। जस्टिस एनएस शेखावत की अदालत ने लुधियाना की विशेष अदालत के उन आदेशों को रद्द कर दिया, जिनमें डीएसपी के खिलाफ एनडीपीएस एक्ट की धारा 58 के तहत आरोप तय करने के निर्देश दिए गए थे। 720 ग्राम अफीम की बरामदगी मामला मामला 720 ग्राम अफीम की बरामदगी से जुड़ा था। डीएसपी गुरमुख सिंह चीमा ने अदालत को बताया कि वह केवल वरिष्ठ अधिकारियों के निर्देश पर मौके पर पहुंचे थे। वहां पहुंचने पर उन्हें मामला संदिग्ध लगा, इसलिए उन्होंने जांच अधिकारी को आरोपी को तुरंत गिरफ्तार नहीं करने की सलाह दी थी। डीएसपी का कहना था कि उन्होंने न तो किसी की तलाशी ली, न अफीम बरामद की, न जांच की और न ही किसी आरोपी को गिरफ्तार किया। उनका घटनास्थल से केवल इतना ही संबंध था कि वे वहां कुछ समय के लिए पहुंचे थे। डीएसपी को निर्दोष पाया गया सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट ने पाया कि अफीम बरामद करने की पूरी कार्रवाई जांच अधिकारी ने की थी। अदालत ने यह भी माना कि मामले की कई बार जांच हुई और हर बार डीएसपी को निर्दोष पाया गया। बाद में पुलिस ने उनके पक्ष में कैंसिलेशन रिपोर्ट भी दाखिल कर दी थी। अदालत ने यह भी ध्यान में रखा कि इस मामले में जांच अधिकारी और अन्य सह-आरोपी पहले ही बरी हो चुके हैं। ऐसे में डीएसपी के खिलाफ मुकदमा जारी रखने का कोई आधार नहीं बनता। हाईकोर्ट ने कहा कि जब डीएसपी के खिलाफ कोई सबूत नहीं है और पुलिस भी उन्हें निर्दोष मान चुकी है, तो उनकी डिस्चार्ज अर्जी स्वीकार कर ली जानी चाहिए थी। इसी आधार पर अदालत ने विशेष अदालत के आदेश रद्द करते हुए डीएसपी गुरमुख सिंह चीमा को आरोपमुक्त कर दिया।



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