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Mohali Bank Loan Scam | Woman Agent Gets Bail From High Court



मोहाली स्थित पंजाब स्टेट क्राइम पुलिस स्टेशन में दर्ज करोड़ों रुपए के बैंक लोन घोटाले की आरोपी महिला एजेंट जैस्मीन को पंजाब एंड हरियाणा हाईकोर्ट से राहत मिली है। जस्टिस ने उसकी नियमित जमानत (Regular Bail) याचिका मंजूर कर ली है।

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जैस्मीन 16 मार्च से न्यायिक हिरासत में जेल में बंद थी। अदालत ने कहा कि मामले के अन्य मुख्य आरोपियों को पहले ही जमानत मिल चुकी है। ऐसे में समानता के सिद्धांत के आधार पर आरोपी को भी राहत दी जाती है।

ऐसे हुआ था 9.06 करोड़ रुपए का बैंक लोन घोटाला

बैंक कर्मचारी अनिल कुमार की शिकायत पर दर्ज FIR की जांच में सामने आया कि फर्जी दस्तावेज तैयार कर अलग-अलग लोगों के नाम पर 74 बैंक लोन स्वीकृत कराए गए। इन लोन की कुल राशि करीब 9.06 करोड़ बताई गई।

पुलिस जांच के अनुसार इस पूरे रैकेट का मुख्य आरोपी तत्कालीन ब्रांच मैनेजर हरजीत सिंह था। आरोप है कि उसने अपनी पत्नी अमरजोत कौर और सह-आरोपी नीरज कुमार कोचर के साथ मिलकर पूरे षड्यंत्र को अंजाम दिया।

एजेंटों की थी अहम भूमिका

जांच एजेंसियों के मुताबिक जैस्मीन सहित अन्य एजेंटों का काम फर्जी नो-योर-कस्टमर (KYC) दस्तावेज तैयार करवाना और बैंक के सामने फर्जी या दिखावटी उधारकर्ताओं को पेश करना था। आरोप है कि लोन स्वीकृत होने के बाद एजेंटों को कमीशन के रूप में अवैध आर्थिक लाभ दिया जाता था।

हाईकोर्ट ने किन आधारों पर दी जमानत

सुनवाई के दौरान जैस्मीन की ओर से अदालत में दलील दी कि मामले के मुख्य आरोपी हरजीत सिंह, नीरज कुमार कोचर, अमन बंसल और मनदीप अरोड़ा को पहले ही हाईकोर्ट से नियमित जमानत मिल चुकी है। बचाव पक्ष ने यह भी कहा कि मामले की जांच पूरी हो चुकी है।

ट्रायल पूरा होने में अभी लंबा समय लग सकता है। आरोपी का कोई पूर्व आपराधिक रिकॉर्ड नहीं है। उसके खिलाफ कोई अन्य आपराधिक मामला दर्ज नहीं है। राज्य सरकार की ओर से इन तथ्यों का प्रभावी विरोध नहीं किया गया, जिसके बाद अदालत ने नियमित जमानत मंजूर कर ली।

जमानत के साथ कोर्ट ने लगाईं ये शर्तें

हाईकोर्ट ने आरोपी को राहत देते हुए कई शर्तें भी लगाई हैं। जिससमें ट्रायल कोर्ट की संतुष्टि के अनुसार बेल और श्योरिटी बॉन्ड जमा करना होगा।,किसी भी गवाह को प्रभावित या धमकाने की अनुमति नहीं होगी, मुकदमे की सुनवाई के दौरान अदालत की सभी शर्तों का पालन करना होगा और यदि आरोपी किसी भी शर्त का उल्लंघन करती है, तो अभियोजन पक्ष जमानत रद्द कराने की मांग कर सकता है।



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