गुरुद्वारा छठी पातशाही में प्रकाश उत्सव समागम के शुभारंभ अवसर पर पहुंचे HSGMC प्रधान जगदीश सिंह झिंडा।
हरियाणा सिख गुरुद्वारा मैनेजमेंट कमेटी (HSGMC) के प्रधान जगदीश सिंह झिंडा ने कहा कि शाहाबाद स्थित मीरी-पीरी इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंस एंड रिसर्च सेंटर में कुछ अड़चनें आने के कारण डॉक्टरों, कर्मचारियों और अन्य स्टाफ को वेतन नहीं मिल पा रहा है।
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उन्होंने शिरोमणि गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी (SGPC) अमृतसर से अपील की कि जब तक यह अड़चन दूर नहीं हो जाती, तब तक वह संस्थान के डॉक्टरों और कर्मचारियों का वेतन जारी रखे। उन्होंने कहा कि जैसे ही समस्या का समाधान होगा, HSGMC संस्थान के डॉक्टरों और कर्मचारियों का वेतन देना शुरू कर देगी।
गुरुद्वारे में 30 जून तक चलेगा अखंड पाठ
झिंडा कुरुक्षेत्र के ऐतिहासिक गुरुद्वारा छठी पातशाही में धन-धन साहिब श्री गुरु हरगोबिंद साहिब जी महाराज के प्रकाश उत्सव समागम के शुभारंभ अवसर पर पहुंचे थे। इस दौरान श्री गुरु ग्रंथ साहिब जी महाराज के श्री अखंड पाठ साहिब की पहली लड़ी आरंभ की गई।
यह अखंड पाठ 30 जून तक चलेगा। उन्होंने कहा कि प्रकाश उत्सव के अवसर पर बड़ी संख्या में श्रद्धालु गुरुद्वारा साहिब पहुंचकर श्री गुरु ग्रंथ साहिब जी को नतमस्तक हो रहे हैं और गुरु साहिब का आशीर्वाद प्राप्त कर रहे हैं।
कुरुक्षेत्र के ऐतिहासिक गुरुद्वारा छठी पातशाही में आयोजित कार्यक्रम के दौरान पत्रकारों से बातचीत करते HSGMC के प्रधान जगदीश सिंह झिंडा।
हाईकोर्ट के फैसले के बाद HSGMC के पास है जिम्मेदारी
उल्लेखनीय है कि शाहाबाद स्थित मीरी-पीरी इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंस एंड रिसर्च सेंटर को लेकर लंबे समय से कानूनी विवाद चल रहा था। करीब एक माह पहले पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट ने मीरी पीरी चैरिटेबल ट्रस्ट की याचिका खारिज करते हुए फैसला हरियाणा सिख गुरुद्वारा मैनेजमेंट कमेटी (HSGMC) के पक्ष में सुनाया था। इसके बाद संस्थान के प्रबंधन का रास्ता साफ हो गया और अब इसके संचालन की जिम्मेदारी HSGMC के पास है।
झिंडा ने बताया कि प्रकाश उत्सव को लेकर तैयारियां जोर-शोर से चल रही हैं। 29 जून को कुरुक्षेत्र में भव्य नगर कीर्तन निकाला जाएगा, जबकि 30 जून को धार्मिक एवं सामाजिक कार्यक्रमों का आयोजन होगा।
संगत के लिए मीठे पानी की छबीलें लगाई जाएंगी और दस्तार सजाने की सेवा भी की जाएगी। इसके अलावा अखंड पाठ साहिब में शामिल होने वाले करीब 500 श्रद्धालुओं के लिए लंगर और ठहरने की व्यवस्था की गई है।
