चंडीगढ़/ पंचकूला10 घंटे पहलेलेखक: अभिषेक वाजपेयी, विक्रम बनेटा
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बैंक घोटाले में अरेस्ट किए गए पॉल्यूशन स्टेट कंट्रोल बोर्ड के कर्मचारी सौरभ शर्मा को ले जाती सीबीआई की टीम।
हरियाणा के सरकारी विभागों से जुड़े 661 करोड़ रुपए के IDFC-AU स्मॉल फाइनेंस बैंक घोटाले में CBI का शिकंजा लगातार कसता जा रहा है। दो सीनियर आईएएस की गिरफ्तारी के बाद सीबीआई ने बुधवार को हरियाणा पॉल्यूशन स्टेट कंट्रोल बोर्ड के कर्मचारी सौरभ शर्मा को अरेस्ट किया है।
सीबीआई के अनुसार, सौरभ हरियाणा पॉल्यूशन स्टेट कंट्रोल बोर्ड के अकाउंट ब्रांच में डाटा एंट्री ऑपरेटर है। गिरफ्तार के बाद उसे पंचकूला की जिला अदालत में पेश गया, जहां से उसका चार दिन का रिमांड मिला है। एजेंसी का दावा है कि सौरव शर्मा ने निजी बैंकों को अनुचित लाभ पहुंचाने, सरकारी धन के निवेश नियमों की अनदेखी करने और महत्वपूर्ण डिजिटल साक्ष्य मिटाने में भूमिका निभाई।
उधर, अभी तक इस मामले में दो आईएएस आरके सिंह और पंकज अग्रवाल की गिरफ्तारी हो चुकी है। फिलहाल, सीबीआई पंकज अग्रवाल से रिमांड पर लेकर पूछताछ कर रही है। सूत्रों के मुताबिक जांच के दौरान CBI को IDFC फर्स्ट बैंक के मैनेजर और घोटाले के मास्टरमाइंड रिभव ऋषि तथा पंकज अग्रवाल के बीच हुई फोन बातचीत की एक ऑडियो रिकॉर्डिंग मिली थी। इस बातचीत में रिभव ऋषि ने पंकज अग्रवाल से 10 करोड़ रुपए एक बिल्डर के खाते में ट्रांसफर करने की बात कही थी।
सूत्रों का दावा है कि अग्रवाल की सहमति मिलने के बाद जनवरी में उक्त राशि बिल्डर के खाते में ट्रांसफर की गई थी। इस रिकॉर्डिंग के बाद ही CBI ने पंकज पर शिकंजा कसना शुरू कर दिया था। यह भी आरोप है कि पंकज अग्रवाल ने बिना कोटेशन और प्रोसेस के कोटक बैंक से 100 करोड़ रुपए IDFC बैंक में खुलवाए गए खाते में ट्रांसफर करवाए थे। फिलहाल पंकज अग्रवाल दो दिन के रिमांड पर हैं।
सीबीआई ने आईएएस पंकज अग्रवाल को मंगलवार को अरेस्ट किया था।
CBI ने सौरभ शर्मा के बारे में ये बातें बताईं…
निवेश सीमा जानते हुए भी निजी बैंक को पहुंचाया फायदा
CBI ने अदालत को बताया कि सौरव शर्मा HSPCB में डेटा एंट्री ऑपरेटर के पद पर कार्यरत था और उसे सरकारी धन निवेश से जुड़े वित्त विभाग के नियमों और सीमाओं की पूरी जानकारी थी। इसके बावजूद उसने कथित रूप से निजी बैंक के पक्ष में निवेश प्रस्तावों को प्रोसेस करने में सहायता की। IDFC फर्स्ट बैंक में सरकारी धन जमा करने की सीमा 50 करोड़ रुपये थी, लेकिन मार्च 2025 में यह राशि बढ़कर 67.9 करोड़ रुपये पहुंच गई। बाद में जून 2025 में यह निवेश 105.68 करोड़ रुपये और अक्टूबर 2025 में 113.68 करोड़ रुपये तक पहुंच गया।
169 करोड़ से अधिक के नुकसान का दावा
CBI के दस्तावेजों के मुताबिक, 13 मार्च 2025 से 13 फरवरी 2026 के बीच खाते से कई संदिग्ध डेबिट ट्रांजेक्शन हुए, जिनके जरिए करीब 187.26 करोड़ रुपये विभिन्न शेल कंपनियों में ट्रांसफर किए गए। कुछ क्रेडिट एंट्री के बाद भी सरकारी खाते को 169.35 करोड़ रुपये से अधिक का नुकसान हुआ। एजेंसी का आरोप है कि निवेश के बाद धन को शेल कंपनियों के माध्यम से बाहर निकाल लिया गया, जिससे बड़े पैमाने पर सरकारी धन की हेराफेरी हुई।
निजी बैंकों को गोपनीय जानकारी साझा करने का आरोप
CBI ने दावा किया कि सौरव शर्मा निजी बैंकों के प्रतिनिधियों के संपर्क में था और उन्हें निवेश प्रस्तावों, ब्याज दरों, फंड मैच्योरिटी तथा सरकारी फाइलों की गतिविधियों से जुड़ी गोपनीय जानकारियां उपलब्ध कराता था। इससे संबंधित बैंक अपने प्रस्ताव उसी अनुरूप तैयार कर पाते थे। जांच में यह भी सामने आया कि आरोपी ने कथित तौर पर निजी व्यक्तियों से लाभ प्राप्त किया और सरकारी प्रक्रिया को प्रभावित करने में भूमिका निभाई।
मोबाइल से चैट डिलीट, डिजिटल सबूत नष्ट करने की आशंका
्CBI के अनुसार, जब आरोपी का मोबाइल फोन जब्त किया गया तो उसमें मौजूद कई मूल चैट और संचार रिकॉर्ड गायब मिले। एजेंसी का कहना है कि आरोपी ने न तो डिलीट डेटा वापस लाने में सहयोग किया और न ही संतोषजनक स्पष्टीकरण दिया। इससे साक्ष्य मिटाने और जांच को प्रभावित करने की आशंका पैदा हुई है।
अब जानिए पंकज पर घोटाले में क्या आरोप….
खाता खोलने में नियमों की अनदेखी का आरोप CBI का दावा है कि स्कूल शिक्षा विभाग के प्रधान सचिव रहते हुए पंकज अग्रवाल ने IDFC फर्स्ट बैंक में खाता खोलने की मंजूरी देते समय निर्धारित नियमों का पालन नहीं किया। जब विभाग के एक जूनियर अधिकारी ने फिक्स्ड डिपॉजिट (FDR) संबंधी नियमों का हवाला देते हुए आपत्ति जताई, तब भी अग्रवाल ने दबाव बनाकर खाता खुलवाया।
50 करोड़ की सीमा थी, 100 करोड़ ट्रांसफर कराए CBI के मुताबिक, नियमों के अनुसार संबंधित खाते में अधिकतम 50 करोड़ रुपए ही जमा किए जा सकते थे। इसके बावजूद पंकज अग्रवाल की कथित मंजूरी से कोटक महिंद्रा बैंक से सीधे 100 करोड़ रुपए नए खाते में ट्रांसफर करा दिए गए। जांच एजेंसी का आरोप है कि इस दौरान वित्तीय नियमों और प्रक्रियाओं की अनदेखी की गई।
CBI की रडार पर 6 और IAS अधिकारी
वहीं, CBI की रडार पर अभी 6 और IAS अधिकारी हैं, जिनकी भूमिका और मिलीभगत की जांच जारी है। सूत्रों के अनुसार, इनमें से दो अधिकारियों को CBI सरकारी गवाह बना सकती है, जबकि अन्य चार अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई की तैयारी की जा रही है। चर्चा यह भी है कि हरियाणा के एक सीनियर IAS अधिकारी, जो पहले मुख्यमंत्री कार्यालय (CMO) में भी तैनात रह चुके हैं, उनसे CBI ने पूछताछ की है। इसके बाद ही IAS अधिकारी पंकज अग्रवाल की गिरफ्तारी की गई।
CBI ने 2 और IAS अधिकारियों से की पूछताछ
CBI सूत्रों के मुताबिक, मंगलवार को जांच टीम ने पंचायत विभाग में तैनात रह चुके दो IAS अधिकारियों से भी पूछताछ की। हालांकि, एजेंसी की ओर से उनके नामों का खुलासा नहीं किया गया है। सूत्रों का दावा है कि मामले में जल्द ही एक और IAS अधिकारी की गिरफ्तारी हो सकती है।
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हरियाणा के बहुचर्चित 661 करोड़ रुपए के IDFC फर्स्ट और AU स्मॉल फाइनेंस बैंक स्कैम में केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) ने सोमवार रात सीनियर IAS अफसर पंकज अग्रवाल को गिरफ्तार कर लिया। CBI ने प्रेस रिलीज जारी कर इसका खुलासा किया। हालांकि, यह नहीं बताया गया कि गिरफ्तारी कहां से की है। पढ़ें पूरी खबर…
