सिटी ब्यूटीफुल चंडीगढ़ के भविष्य की तस्वीर बदलने वाले मास्टर प्लान-2031 में प्रस्तावित संशोधनों पर अपनी राय देने का आज आखिरी दिन है। चंडीगढ़ प्रशासन की ओर से 22 मई को जारी ड्राफ्ट नोटिफिकेशन पर सुझाव और आपत्तियां दर्ज कराने के लिए निर्धारित 21 दिन की
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मास्टर प्लान में प्रस्तावित बदलावों को लेकर शहर दो धड़ों में बंटा नजर आ रहा है। एक ओर व्यापारिक और औद्योगिक संगठन इन संशोधनों को विकास और निवेश के लिए जरूरी बता रहे हैं, वहीं दूसरी ओर रेजिडेंट वेलफेयर एसोसिएशन, हेरीटेज से जुड़े लोग इन प्रस्तावों का विरोध कर रहे हैं। उनका कहना है कि इससे चंडीगढ़ की मूल पहचान और योजनाबद्ध स्वरूप को नुकसान पहुंचेगा।
प्रशासनिक अधिकारियों के अनुसार अब तक 60 से अधिक सुझाव और आपत्तियां प्राप्त हो चुकी हैं। समयसीमा समाप्त होने के बाद सभी प्रतिक्रियाओं की समीक्षा कर अंतिम प्रस्ताव केंद्रीय गृह मंत्रालय (एमएचए) को भेजा जाएगा। गृह मंत्रालय की मंजूरी मिलने के बाद ही संशोधनों को अंतिम रूप देकर अधिसूचित किया जाएगा।
60 से ज्यादा सुझाव पहुंचे, स्क्रीनिंग कमेटी करेगी समीक्षा
मास्टर प्लान संशोधन को लेकर आम नागरिकों, व्यापारिक संगठनों, उद्योगपतियों और विभिन्न सामाजिक संस्थाओं ने बड़ी संख्या में अपने सुझाव और आपत्तियां दर्ज करवाई हैं।
अब प्रशासन की स्क्रीनिंग कमेटी सभी बिंदुओं का अध्ययन करेगी। कमेटी की रिपोर्ट के आधार पर अंतिम ड्राफ्ट तैयार होगा, जिसे मंजूरी के लिए केंद्रीय गृह मंत्रालय भेजा जाएगा। अंतिम निर्णय मंत्रालय के स्तर पर लिया जाएगा।
बदलावों के पक्ष में हैं कारोबारी
व्यापारी और उद्योग संगठन इन संशोधनों को समय की जरूरत बता रहे हैं। उनका कहना है कि केंद्र सरकार की ईज ऑफ डूइंग बिजनेस नीति के अनुरूप नियमों को सरल बनाने से निवेश बढ़ेगा और रोजगार के नए अवसर पैदा होंगे।
उनके मुताबिक औद्योगिक क्षेत्रों में फ्लोर एरिया रेशियो (FAR) बढ़ाने और उपलब्ध भूमि के बेहतर उपयोग से नए उद्योगों, स्टार्टअप्स और व्यावसायिक गतिविधियों को बढ़ावा मिलेगा। इससे शहर की आर्थिक गतिविधियां तेज होंगी और निवेशकों को बेहतर माहौल मिलेगा।
जनसंख्या और यातायात का दबाव बढ़ जाएगा
रेजिडेंट्स और हेरीटेज विशेषज्ञों का मानना है कि प्रस्तावित बदलावों से शहर पर जनसंख्या और यातायात का दबाव बढ़ जाएगा।
उनका कहना है कि हाईराइज निर्माण और घनत्व बढ़ाने से ट्रैफिक जाम, पार्किंग संकट, पानी की आपूर्ति और सीवरेज व्यवस्था पर अतिरिक्त बोझ पड़ेगा। मौजूदा इंफ्रास्ट्रक्चर पहले ही कई क्षेत्रों में दबाव झेल रहा है। ऐसे में बिना पर्याप्त तैयारी के घनत्व बढ़ाना शहर के लिए नुकसानदायक साबित हो सकता है।
विरोध करने वाले यह भी तर्क दे रहे हैं कि चंडीगढ़ की पहचान उसकी खुली जगहों, नियंत्रित निर्माण और योजनाबद्ध विकास से है। यदि बड़े पैमाने पर नियमों में छूट दी गई तो शहर की मूल अवधारणा प्रभावित हो सकती है।
