हरियाणा के पंचकूला नगर निगम में सामने आए 79.46 करोड़ रुपए के फंड गबन मामले में केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) ने IAS अधिकारी राम कुमार सिंह को अरेस्ट कर लिया है। सिंह के पास उस समय पंचकूला निगम कमिश्नर का चार्ज था। सीबीआई की ओर से दी गई जानकारी के मुताबिक यह मामला इसी साल फरवरी में सामने आए बैंक फ्रॉड का ही एक हिस्सा है। तब कई सरकारी विभागों के खाते IDFC फर्स्ट बैंक, एयू स्मॉल फाइनेंस और कोटक महिंद्रा जैसे निजी बैंकों में खोले गए। इसके बाद सरकार पैसा शैल कंपनियों के खातों में ट्रांसफर हुआ। पंचकूला नगर निगम का खाता IDFC फर्स्ट बैंक की सेक्टर-32 ब्रांच में था। खाते के दस्तावेजों में जानबूझकर ऐसी जानकारियां दर्ज की गईं, जिससे बाद में किए जाने वाले फर्जी लेनदेन को छिपाया जा सके। मामला सामने आने के बाद 9 अप्रैल, 2026 को सरकार ने आरके सिंह को सस्पेंड कर दिया था। सस्पेंशन से पहले वे राजस्व एवं आपदा प्रबंधन विभाग में विशेष सचिव और पंचकूला मेट्रोपॉलिटन डेवलपमेंट अथॉरिटी (PMDA) के अतिरिक्त मुख्य कार्यकारी अधिकारी के पद पर तैनात थे। इससे पूर्व जुलाई 2025 से जनवरी 2026 तक पंचकूला निगम कमिश्नर का चार्ज संभाला। आरके सिंह की अरेस्टिंग के बाद CBI की ओर से जारी प्रेस रिलीज… सीबीआई की ओर घोटाले के संबंध में किए गए दावे… 504 करोड़ के बड़े बैंकिंग घोटाले से जुड़ा मामला पंचकूला नगर निगम का यह घोटाला हरियाणा के सबसे बड़े वित्तीय घोटालों में शामिल माना जा रहा है। CBI के अनुसार यह मामला सेक्टर-32 स्थित IDFC फर्स्ट बैंक शाखा में हुए 504 करोड़ रुपए के बड़े फंड घोटाले का हिस्सा है। आरोप है कि हरियाणा सरकार के आठ विभागों की रकम फर्जी अथवा अस्तित्वहीन फिक्स्ड डिपॉजिट और डेबिट नोट्स के जरिए निकालकर शेल कंपनियों में पहुंचाई गई। CBI ने राज्य सरकार के अनुरोध पर हरियाणा के स्टेट विजिलेंस और एंटी करप्शन ब्यूरो से जांच अपने हाथ में ली थी। अब तक CBI इस मामले में 17 आरोपियों के खिलाफ चार्जशीट दाखिल कर चुकी है। इनमें IDFC फर्स्ट बैंक और AU स्मॉल फाइनेंस बैंक के छह अधिकारी, हरियाणा सरकार के तीन कर्मचारी, दो कंपनियां और छह निजी व्यक्ति शामिल हैं।
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