फतेहाबाद पंचायत समिति की बीजेपी चेयरपर्सन पर सार्वजनिक धन के कथित दुरुपयोग को लेकर बड़ा विवाद खड़ा हो गया है। चेयरपर्सन के खिलाफ मुख्यमंत्री को शिकायत भेजी गई है। शिकायत में आरोप लगाया गया है कि पंचायत समिति/ब्लॉक डेवलपमेंट फंड और डी-प्लान फंड का इस्तेमाल गांवों में मंदिरों व गुरुद्वारों पर आयरन शेड बनाने के लिए किया गया। इसे नियमों के खिलाफ बताते हुए बीडीपीओ ने जांच के बाद डीसी को चेयरपर्सन पर कार्रवाई के लिए अनुशंसा की है। सीएम विंडो पर दी गई शिकायत में पंचायत समिति के सदस्य अमनदीप ने आरोप लगाया कि सरकारी धन का उपयोग केवल सार्वजनिक और सामुदायिक कार्यों के लिए होना चाहिए, लेकिन यहां विशेष धार्मिक स्थलों को लाभ पहुंचाया गया। शिकायत में गांव बरसीन, भोडियाखेड़ा, करनोली, दरियापुर, काताखेड़ी और भिरडाना में इस तरह के कार्य होने का जिक्र किया गया है। शिकायत में इसे संविधान के अनुच्छेद 14 और 27 का उल्लंघन बताते हुए सार्वजनिक कोष के दुरुपयोग का मामला करार दिया गया है। सुप्रीम कोर्ट के फैसलों का हवाला देते हुए कहा गया है कि करदाताओं के पैसे का उपयोग किसी विशेष धर्म के प्रचार या सुविधा के लिए नहीं किया जा सकता। खर्च की गई राशि वसूलने की मांग शिकायतकर्ता ने पूरे मामले की उच्च स्तरीय जांच, दोषी अधिकारियों व कर्मचारियों पर सख्त कार्रवाई और खर्च की गई राशि की वसूली की मांग की है। साथ ही भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकने के लिए स्पष्ट दिशा-निर्देश जारी करने की अपील भी की गई है। 6 गांवों में धार्मिक स्थलों पर निर्माण से उठे गंभीर सवाल शिकायत में स्पष्ट रूप से उल्लेख किया गया है कि बरसीन, भोडियाखेड़ा, करनोली, दरियापुर, काताखेड़ी और भिरडाना गांवों में मंदिरों और गुरुद्वारों पर आयरन शेड बनाए गए। यह कार्य सरकारी फंड से होने का आरोप है, जिससे प्रशासनिक पारदर्शिता और नियमों के पालन पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। धर्मनिरपेक्षता पर चोट, संविधान उल्लंघन का आरोप शिकायतकर्ता ने इस पूरे मामले को संविधान के धर्मनिरपेक्ष ढांचे के खिलाफ बताते हुए अनुच्छेद 14 (समानता का अधिकार) और अनुच्छेद 27 के उल्लंघन का आरोप लगाया है। उनका कहना है कि करदाताओं के पैसे का उपयोग किसी एक धर्म विशेष के लाभ के लिए करना पूरी तरह असंवैधानिक है। जांच, कार्रवाई और फंड की रिकवरी की उठी मांग मामले को गंभीर बताते हुए शिकायतकर्ता ने उच्च स्तरीय और निष्पक्ष जांच की मांग की है। साथ ही दोषी अधिकारियों, कर्मचारियों और पंचायत समिति से जुड़े जिम्मेदार लोगों पर कड़ी विभागीय कार्रवाई करने और खर्च किए गए सरकारी धन की पूरी रिकवरी सुनिश्चित करने की भी मांग उठाई गई है। जानिए… बीडीपीओ ने अपनी अनुशंसा में क्या लिखा बीडीपीओ ने अपने रिपोर्ट में बताया है कि इस मामले में पंचायत समिति चेयरपर्सन, तत्कालीन लेखाकार दिनेश व पंचायती राज के जेई को कार्यालय में उपस्थित होने के लिए लिखा था। 22 अप्रैल को सुनवाई हुई। तत्कालीन सहायक विजय कुमार ने बयान दिए कि वर्ष 2024-25 में 6 शेडों का निर्माण किया गया। नियमों के अनुसार मंदिर, मस्जिद या अन्य धार्मिक स्थानों पर कार्य नहीं करवाया जा सकता है। इसलिए चेयरपर्सन के विरुद्ध अनुशासनिक कार्रवाई की जानी उचित होगी। हम गलत नहीं-चेयरपर्सन इस संबंध में चेयरपर्सन पूजा बरसीन का कहना है कि मंदिर या अन्य धार्मिक स्थल पंचायत की जगह पर ही बने होते हैं। इसलिए हमने शेड बनवाए हैं। हम कहीं गलत नहीं है। बीडीपीओ ने डीसी को क्या रिपोर्ट दी है, इस पर हमें कुछ नहीं कहना। बीडीपीओ की कार्यशैली से कोई खुश नहीं है। कई सरपंच भी नाराज हैं। नियमानुसार नहीं करवा सकते शेड निर्माण-बीडीपीओ वहीं, इस बारे में बीडीपीओ भजनलाल से बात की गई तो उन्होंने कहा कि सीएम विंडो में शिकायत आई थी। उस आधार पर जांच करवाई गई। नियमानुसार धार्मिक स्थलों पर पंचायत समिति के फंड से शेड निर्माण नहीं करवाया जा सकता है।
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