कैथल के 11 रुद्री मंदिर में भगवान शिव का जलाभिषेक करते शिवभक्त।
कैथल में शिवरात्रि पर्व पर मंदिरों में श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ी रही। एक तरफ जहां हरिद्वार से कांवड़ लेकर लौटे शिवभक्तों ने भगवान शिव का जलाभिषेक किया, वहीं दूसरी ओर अल सुबह से ही व्रत रखने वाले श्रद्धालु पूजा पाठ करने के लिए मंदिरों में पहुंच गए।
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शहर के मुख्य श्री ग्यारह रूद्री सहित, नीलकंठ महादेव मंदिर, श्री अंबकेश्वर मंदिर, हनुमान वाटिका स्थित शिव मंदिर और अन्य जगहों पर श्रद्धालुओं की भीड़ लगी रही। मंदिरों में सुबह से ही हर हर महादेव के नारे गूंजते रहे।
फल, फूल और प्रसाद से की पूजा
श्रद्धालुओं ने सुबह से ही भगवान शिव पर फल, बेलपत्र, धतूरा, दूध, घी, गंगाजल सहित अन्य सामग्री लेकर भगवान शिव की पूजा अर्चना की। परिवार की सुख शांति समृद्धि के लिए अधिकांश महिला में भगवान शिव का उपवास रखा है।

भगवान शिव की पूजा करने के लिए मंदिर पहुंची महिलाएं
11 रुद्रों की पांडवों ने की थी पूजा
शहर के चंदाना गेट स्थित श्री ग्यारह रुद्री मंदिर में श्रद्धालुओं की भीड़ सबसे ज्यादा देखी गई। यह जिले का सबसे बड़ा शिव मंदिर है। इस का इतिहास महाभारत कालीन है। मंदिर के कारण कैथल शहर को छोटी काशी के नाम से भी जाना जाता है। बताया जाता है कि महाभारत युद्ध के बाद भगवान श्रीकृष्ण ने यहां 11 रुद्रों की स्थापना कर पांडवों की पूजा करवाई थी।

फल, फूल व दूध चढ़ाकर पूजा करते श्रद्धालु।
श्रीकृष्ण ने की थी स्थापना
मंदिर के पुजारी पंडित मुनेंद्र मिश्रा ने बताया कि मंदिर की मान्यता है कि ग्यारह रुद्री मंदिर की स्थापना भगवान श्रीकृष्ण ने उस समय की थी, जब कुरुक्षेत्र में महाभारत का युद्ध समाप्त हो गया था। युद्ध की समाप्ति के बाद भगवान श्री कृष्ण ने कौरव और पांडवों के बीच हुए युद्ध में मारे गए सैनिकों की आत्मिक शांति के लिए पूजा करवाई व ग्यारह रुद्रों की स्थापना की थी। उन्होंने बताया कि अन्य शिव मंदिरों में भी भगवान शिव की पूजा पूरी श्रद्धा से की गई।







