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पठानकोट-सुजानपुर क्रासिंग पर बनेगा ओवरब्रिज:रोजाना 80 बार बंद होता है फाटक, लोगों को मिलेगी राहत, केंद्र सरकार खर्च करेगी 52.36 करोड़




पठानकोट और सुजानपुर के बीच आवागमन करने वाले लाखों लोगों के लिए एक राहत भरी खबर है। लंबे समय से रेलवे फाटक के कारण लगने वाले भीषण जाम से जूझ रहे इस क्षेत्र के नागरिकों का इंतजार अब खत्म होने जा रहा है। केंद्र सरकार ने पठानकोट-सुजानपुर रेलवे क्रॉसिंग पर ओवरब्रिज के निर्माण के लिए 52.36 करोड़ रुपये की भारी-भरकम राशि मंजूर कर दी है। सबसे खास बात यह है कि वित्तीय बाधाओं को दूर करते हुए केंद्र सरकार इस पूरी परियोजना की लागत खुद वहन करेगी। रोजाना 80 बार बंद होता है फाटक, 700 मिनट की ‘कैद’ इस रूट पर ट्रैफिक की स्थिति कितनी विकट है, इसका अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि पठानकोट-सुजानपुर रेलवे क्रॉसिंग और भड़ोली फाटक पर 24 घंटे में यह फाटक करीब 80 बार बंद होता है, जिससे रोजाना कुल 700 मिनट (यानी साढ़े ग्यारह घंटे से अधिक समय) तक रास्ता पूरी तरह बाधित रहता है। कई बार एक ही समय में तीन से ज्यादा गाड़ियां क्रॉस होने के कारण मार्ग पर वाहनों की लंबी कतारें लग जाती हैं।सुजानपुर की करीब 50 हजार की आबादी और हजारों की संख्या में रोजाना सुजानपुर से पठानकोट पढ़ने या नौकरी के लिए आने-जाने वाले छात्र और कर्मचारी इस व्यवस्था के कारण बुरी तरह प्रभावित होते हैं। इसके अलावा, एंबुलेंस जैसी आपातकालीन सेवाएं भी इस जाम में फंसकर गंभीर स्थिति पैदा कर देती थीं। स्थानीय लोगों के लिए यह ओवरब्रिज किसी वरदान से कम नहीं साबित होगा। 8 साल का कड़ा संघर्ष और अधूरे वादों का इतिहास यह सौगात इतनी आसानी से नहीं मिली है। इसके पीछे क्षेत्र की जनता का लंबा संघर्ष जुड़ा है। इस ओवरब्रिज की मांग को लेकर करीब 8 साल पहले ‘ओवरब्रिज बनाओ संघर्ष समिति’ का गठन किया गया था, जिसके तहत लंबे समय तक भूख हड़ताल और बड़े पैमाने पर हस्ताक्षर अभियान चलाए गए थे। पूर्व सांसद सुनील जाखड़ और अभिनेता-सांसद सनी देओल के कार्यकाल के दौरान भी इस मुद्दे पर जनता को बड़े-बड़े आश्वासन मिले, लेकिन धरातल पर यह योजना वर्षों तक कागजों में ही उलझी रही। 60:40 के पेंच को तोड़कर केंद्र ने उठाया पूरा जिम्मा नियमों के अनुसार ऐसे आरओबी (रेल ओवर ब्रिज) के निर्माण में 60 प्रतिशत राशि केंद्र सरकार और 40 प्रतिशत राशि राज्य सरकार को देनी होती थी। केंद्र सरकार तो अपने हिस्से की राशि देने के लिए तैयार रहती थी, लेकिन पंजाब सरकार द्वारा अपने हिस्से का बजट समय पर जारी न किए जाने के कारण यह महत्वपूर्ण परियोजना वर्षों से लटकी हुई थी। जनता की इस गंभीर परेशानी को समझते हुए केंद्र सरकार ने वित्तीय नियमों में लचीलापन दिखाते हुए इस परियोजना की 100 प्रतिशत लागत खुद वहन करने का ऐतिहासिक फैसला किया है। नेतृत्व की मजबूत पैरवी से मिली सफलता पंजाब के पूर्व डिप्टी स्पीकर एवं सुजानपुर से विधायक दिनेश सिंह बब्बू ने इस बहुप्रतीक्षित प्रोजेक्ट को हरी झंडी मिलने का श्रेय पठानकोट के विधायक अश्वनी शर्मा और पूर्व रेल राज्य मंत्री रवनीत सिंह बिट्टू के विशेष प्रयासों को दिया है। बब्बू ने कहा कि इन दोनों नेताओं द्वारा लगातार की गई पैरवी और दिल्ली स्तर पर मजबूत फॉलोअप के कारण ही इस प्रोजेक्ट को आखिरकार मंजूरी मिल सकी है। इस ओवरब्रिज के निर्माण से न केवल यातायात सुगम होगा, बल्कि क्षेत्र के व्यापारिक और शैक्षणिक विकास को भी एक नई रफ्तार मिलेगी।



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