spot_imgspot_img

Top 5 This Week

spot_img

Related Posts

भगत पूर्ण सिंह को भारत रत्न देने की मांग:सांसद सीचेवाल ने पीएम मोदी को लिखा पत्र, मानव सेवा का दिया हवाला




राज्यसभा सदस्य और पर्यावरण प्रेमी संत बलबीर सिंह सीचेवाल ने महान समाजसेवी भगत पूर्ण सिंह को देश के सर्वोच्च नागरिक सम्मान ‘भारत रत्न’ से सम्मानित करने की मांग की है। उन्होंने इस संबंध में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को पत्र लिखा है। पत्र में भगत पूर्ण सिंह के मानवता के प्रति निःस्वार्थ सेवा और पर्यावरण संरक्षण में दिए गए योगदान को राष्ट्रीय स्तर पर सम्मानित करने की अपील की गई है। भगत पूर्ण सिंह की 34वीं पुण्यतिथि के अवसर पर लिखे गए इस पत्र में संत सीचेवाल ने कहा कि उनका पूरा जीवन सेवा, त्याग, सादगी और मानव कल्याण को समर्पित रहा। उन्होंने गुरबाणी से प्रेरणा लेकर जीवन के अंतिम क्षण तक जरूरतमंदों की सेवा को अपना धर्म माना। पत्र में उल्लेख किया गया है कि देश के विभाजन के समय भगत पूर्ण सिंह ने एक अपाहिज और बेसहारा व्यक्ति प्यारा सिंह को अपनी पीठ पर उठाकर अमृतसर पहुंचाया था। यह घटना उनके सेवा-जीवन का एक महत्वपूर्ण मोड़ बनी। इसके बाद उन्होंने ‘पिंगलवाड़ा’ की स्थापना की, जहां लावारिस, दिव्यांग, मानसिक रूप से पीड़ित, बुजुर्ग और बेसहारा लोगों को आश्रय, उपचार और सम्मानजनक जीवन प्रदान किया जाता है। सांसद सीचेवाल ने पर्यावरण के प्रति दूरदर्शिता का भी किया जिक्र संत सीचेवाल ने पत्र में भगत पूर्ण सिंह की पर्यावरण के प्रति दूरदर्शिता का भी विशेष रूप से जिक्र किया। उन्होंने बताया कि जब पर्यावरण संकट आज की तरह व्यापक चर्चा का विषय नहीं था, तब भी भगत जी ने प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण, पेड़ों की रक्षा और सादगीपूर्ण जीवन के महत्व के प्रति लोगों को जागरूक किया। वे सार्वजनिक परिवहन के उपयोग, कागज के पुनः उपयोग और लकड़ी की अनावश्यक खपत से बचने के लिए भी लोगों को प्रेरित करते थे। भारत सरकार ने उनकी सेवाओं को मान्यता देते हुए वर्ष 1979 में उन्हें ‘पद्म श्री’ से सम्मानित किया था। संत सीचेवाल ने कहा कि भगत पूर्ण सिंह की मानव सेवा और पर्यावरण के प्रति जागरूकता आज भी समाज के लिए प्रेरणास्रोत है। उनके अतुलनीय योगदान को देखते हुए उन्हें ‘भारत रत्न’ से सम्मानित करना उनकी महान विरासत के प्रति सच्चा सम्मान होगा। भगत पूर्ण सिंह जी ने मानव सेवा के साथ-साथ पर्यावरण संरक्षण को भी अपने जीवन का अभिन्न हिस्सा बनाया। उन्होंने लोगों को पेड़ों की रक्षा, प्राकृतिक संसाधनों के विवेकपूर्ण उपयोग, कागज के पुनः उपयोग और सार्वजनिक परिवहन अपनाने के लिए प्रेरित किया। उनका सादगीपूर्ण जीवन और प्रकृति के प्रति संवेदनशील दृष्टिकोण आज के पर्यावरणीय संकट के दौर में और भी अधिक प्रासंगिक हो गया है।



Source link

कोई जवाब दें

कृपया अपनी टिप्पणी दर्ज करें!
कृपया अपना नाम यहाँ दर्ज करें

Popular Articles