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हिसार में पेयजल संकट से परेशान बासड़ा गांव की महिलाओं ने शुक्रवार को पब्लिक हेल्थ विभाग के कार्यालय में ऐसा विरोध प्रदर्शन किया, जिसने अधिकारियों को भी असहज कर दिया। गांव की एक बुजुर्ग महिला अपनी मांग मनवाने के लिए विभाग के जेई के पैर पकड़कर बैठ गई और तब तक पैर नहीं छोड़े, जब तक अधिकारियों ने जल्द पेयजल उपलब्ध कराने का आश्वासन नहीं दिया। काफी देर तक अधिकारी महिला को समझाते रहे, लेकिन वह अपनी मांग पर अड़ी रही। इस दौरान कार्यालय में काफी देर तक हंगामे की स्थिति बनी रही। कई दिनों से पेयजल की पर्याप्त आपूर्ति नहीं प्रदर्शन कर रही महिलाओं ने बताया कि गांव में कई दिनों से पेयजल की पर्याप्त आपूर्ति नहीं हो रही है। मजबूरी में लोगों को निजी टैंकरों से पानी मंगवाकर अपनी जरूरत पूरी करनी पड़ रही है, जिससे आर्थिक बोझ भी बढ़ रहा है। उनका कहना था कि कई बार शिकायत करने के बावजूद समस्या का समाधान नहीं हुआ, इसलिए विभाग पहुंचकर प्रदर्शन करना पड़ा। 25 करोड़ की लागत से पाइपलाइन बिछाई दरअसल, किरतान, सरसाना, बासड़ा, गोरछी, बालसमंद और बुड़ाक गांवों में पेयजल आपूर्ति के लिए करीब 25 करोड़ रुपए की लागत से पाइपलाइन बिछाई गई है। इन गांवों में सीसवाला हेड पंप से पानी की सप्लाई की जाती है, लेकिन पर्याप्त पानी नहीं मिलने से ग्रामीण लगातार परेशान हैं। अधिकारियों से ठेकेदार के साथ कराई बैठक विभाग के अधिकारियों और ठेकेदार रामफल सांगवान के साथ ग्रामीणों की बैठक कराई गई। ग्रामीण कमल सिंह, राकेश और कृष्णा देवी ने आरोप लगाया कि ठेकेदार की लापरवाही के कारण गांव में नियमित पानी नहीं पहुंच रहा। उनका कहना है कि जब ग्रामीणों ने इस संबंध में सवाल उठाए तो ठेकेदार रामफल सांगवान नाराज हो गया और कथित तौर पर कह दिया, नहीं मिलेगा पानी, जो करना है कर लो। इस बयान के बाद ग्रामीणों में और अधिक रोष फैल गया। कुछ दिन पहले जलघर पर जड़ा था ताला ग्रामीणों ने चेतावनी दी कि यदि जल्द नियमित पेयजल आपूर्ति शुरू नहीं की गई, तो आंदोलन को और तेज किया जाएगा। उल्लेखनीय है कि लगातार पेयजल संकट से नाराज किरतान गांव के ग्रामीण भी कुछ दिन पहले जलघर पर ताला लगाकर विरोध जता चुके हैं। अब बासड़ा गांव की महिलाओं के इस अनोखे प्रदर्शन ने एक बार फिर विभाग की व्यवस्थाओं और पेयजल परियोजना पर सवाल खड़े कर दिए हैं।
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