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पलवल जिले का प्रमुख पृथला औद्योगिक क्षेत्र गंभीर समस्याओं से जूझ रहा है। यहां की सड़कें खस्ताहाल हैं, जिससे वाहनों को आवागमन में भारी दिक्कतें हो रही हैं। प्रशासन की अनदेखी के चलते अब उद्यमी अपने खर्चे पर सड़कों की मरम्मत कराने को मजबूर हैं, जबकि इस क्षेत्र से सरकार को हर साल करोड़ों रुपए का जीएसटी मिलता है। यहां 250 से अधिक औद्योगिक इकाइयों में करीब 20 हजार लोग कार्यरत हैं। पृथला औद्योगिक क्षेत्र पलवल और फरीदाबाद के बीच नेशनल हाईवे-19 पर स्थित है। इसे पलवल जिले का ‘ग्रोथ इंजन’ कहा जाता है, जो विकास की असीम संभावनाओं वाला क्षेत्र है। तीन दशक पहले कुछ उद्योगों के साथ इसकी शुरुआत हुई थी और अब पृथला, बघौला, ततारपुर, दूधौला, जटौला, धतीर, छपरौला, सिकंदरपुर, नंगला भीकू व देवली सहित दर्जनभर से अधिक गांव इसके औद्योगिक हिस्से बन गए हैं। उद्योगपति स्वयं भरवा रहे गड्ढे़ सड़कों की खराब हालत का अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि उद्योगपतियों को स्वयं गड्ढे भरवाने पड़ रहे हैं। पृथला-ततारपुर मार्ग की अत्यधिक खराब स्थिति को देखते हुए उद्योगपति सचिन झिंगन ने अपने निजी खर्चे पर सड़क के गड्ढे भरवाने का काम कराया। इस पर करीब पांच लाख रुपये खर्च हुए। उनकी कंपनी इसी मार्ग पर स्थित है, और आसपास लगभग 20 बड़ी कंपनियां भी मौजूद हैं। उद्योगपतियों का कहना है कि उन्होंने जिला प्रशासन और संबंधित विभागों को कई बार इन समस्याओं से अवगत कराया है। हालांकि, हर बार उन्हें केवल आश्वासन ही मिले हैं और औद्योगिक क्षेत्र के बिगड़ते स्वरूप को सुधारने के लिए कोई उचित कदम नहीं उठाए गए हैं। जर्जर सड़कों के कारण होती है परेशानी पलवल इंडस्ट्रीज एसोसिएशन के उपायध्यक्ष राजीव मेहरा का कहना है कि,जर्जर सड़क के कारण काफी परेशानी हो रही है। गंदगी में लोगों को गुजरना पड़ रहा है। कर्मचारी रोजाना सड़कों पर बने गड्ढों के कारण चोटिल हो रहे हैं। लोक निर्माण विभाग के एक्सईएन को सड़कों को ठीक कराने के बारे में कई बार लिखा जा चुका है, लेकिन अधिकारी सुनने को तैयार नहीं हैं।
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