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चंडीगढ़ में अवैध वेंडरों ने नही उठाने दिया सामान:एनफोर्समेंट इंस्पेक्टर से धक्का-मुक्की, सुप्रीम कोर्ट प्रशासन-निगम अधिकारियों को लगा चुका फटकार




सुप्रीम कोर्ट की सख्त टिप्पणी और अवैध वेंडरों को हटाने के स्पष्ट निर्देशों के बावजूद चंडीगढ़ में नगर निगम की कार्रवाई का खास असर नहीं दिखा। सोमवार को नगर निगम की एनफोर्समेंट टीम पुलिस के साथ सेक्टर-22 स्थित शास्त्री मार्केट में अवैध वेंडरों को हटाने पहुंची। लेकिन कार्रवाई शुरू होते ही वेंडरों ने विरोध शुरू कर दिया। मौके पर काफी हंगामा हुआ और कुछ वेंडरों ने निगम टीम द्वारा जब्त किया गया सामान भी वापस छीन लिया। विरोध के चलते निगम की टीम सिर्फ कुछ सामान ही जब्त कर सकी, जबकि अधिकांश वेंडर दोबारा वहीं बैठ गए। एनफोर्समेंट इंस्पेक्टर सतेंद्र अपनी टीम और पुलिस बल के साथ कार्रवाई के लिए पहुंचे थे। जैसे ही टीम ने अवैध रूप से लगाए गए रेहड़ी-फड़ी और सामान हटाना शुरू किया, बड़ी संख्या में वेंडर मौके पर जुट गए और कार्रवाई का विरोध करने लगे। देखते ही देखते माहौल तनावपूर्ण हो गया। इस दौरान कुछ महिला वेंडरों और महिला पुलिसकर्मियों के बीच धक्का-मुक्की भी हुई। काफी देर तक हंगामा चलता रहा, जिसके कारण निगम की कार्रवाई प्रभावित हुई। सुप्रीम कोर्ट की फटकार के बाद भी नहीं बदले हालात कार्रवाई के दौरान पर्याप्त पुलिस बल तैनात था, लेकिन इसके बावजूद वेंडरों का विरोध जारी रहा। पुलिस और निगम कर्मचारियों के समझाने के बावजूद अधिकांश वेंडर अपनी दुकानें हटाने को तैयार नहीं हुए। विरोध के कारण निगम की टीम पूरी कार्रवाई नहीं कर सकी और सीमित सामान जब्त करने के बाद लौटना पड़ा। हाल ही में सुप्रीम कोर्ट ने चंडीगढ़ में सड़कों, बाजारों और सार्वजनिक स्थानों पर अवैध वेंडरों के कब्जे को लेकर नगर निगम, प्रशासन और अन्य अधिकारियों को कड़ी फटकार लगाई थी। अदालत ने स्पष्ट कहा था कि सार्वजनिक स्थानों पर अवैध कब्जे हटाए जाएं और नियमों का सख्ती से पालन कराया जाए। इसके बावजूद सेक्टर-22 शास्त्री मार्केट में बड़ी संख्या में वेंडर पहले की तरह सड़क और फुटपाथ पर दुकानें लगाए बैठे हैं। एसोसिशन बोली सिर्फ खानापूर्ति चंडीगढ़ स्मॉल ट्रेडर्स एसोसिएशन के प्रधान मुकेश गोयल बोले नगर निगम की कार्रवाई केवल औपचारिकता बनकर रह गई है। उनका कहना है कि महीने में एक-दो बार एनफोर्समेंट विंग पुलिस के साथ आती है, कुछ देर कार्रवाई करती है और फिर लौट जाती है। इसके कुछ घंटे बाद ही सभी वेंडर दोबारा वहीं दुकानें लगा लेते हैं। व्यापारियों का कहना है कि जब तक लगातार अभियान नहीं चलेगा, तब तक समस्या का समाधान संभव नहीं है। वूसली मामले में विजिलेंस की FIR नगर निगम के एनफोर्समेंट विंग पर पहले से ही सवाल उठ रहे हैं। हाल ही में एनफोर्समेंट विंग के अधिकारियों के खिलाफ विजिलेंस ने वसूली के आरोप में मामला दर्ज होने के बाद विभाग की कार्यशैली चर्चा में है। व्यापारियों का आरोप है कि अवैध वेंडरों के खिलाफ प्रभावी कार्रवाई नहीं होने से संदेह और गहरा हो गया है। उनका कहना है कि यदि नियमित और निष्पक्ष कार्रवाई हो तो बाजारों में अवैध कब्जों की समस्या काफी हद तक खत्म हो सकती है।
सड़क और फुटपाथ पर बढ़ रहा दबाव शास्त्री मार्केट में बड़ी संख्या में अवैध वेंडर सड़क और फुटपाथ घेरकर दुकानें लगा रहे हैं। इससे ग्राहकों और राहगीरों को आने-जाने में परेशानी होती है। कई बार बाजार में जाम जैसी स्थिति बन जाती है। उनका कहना है कि सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों के बाद भी यदि हालात नहीं बदलते, तो प्रशासन की कार्रवाई पर सवाल उठना स्वाभाविक है। बॉडी कैमरे सिर्फ खानापूर्ति नगर निगम के एनफोर्समेंट विंग में पारदर्शिता लाने के लिए कमिश्नर अमित कुमार ने सभी एनफोर्समेंट इंस्पेक्टरों को ड्यूटी के दौरान बॉडी कैमरे पहनने के निर्देश दिए थे। इसका मकसद यह था कि कार्रवाई के दौरान होने वाली पूरी गतिविधि रिकॉर्ड हो सके और किसी तरह के विवाद या आरोप लगने पर वीडियो सबूत मौजूद रहे। हालांकि, हकीकत में यह व्यवस्था सिर्फ खानापूर्ति बनकर रह गई है। एनफोर्समेंट कर्मचारी ड्यूटी के दौरान बॉडी कैमरे तो पहन रहे हैं, लेकिन इनमें से कई कैमरों में रिकॉर्डिंग नहीं हो रही या वीडियो सही तरीके से सेव नहीं हो रही। अधिकारियों का कहना है कि कैमरों में तकनीकी खराबी है, लेकिन काफी समय बीतने के बाद भी इन्हें ठीक नहीं कराया गया। दरअसल, ये बॉडी कैमरे उस समय लगाए गए थे, जब एनफोर्समेंट इंस्पेक्टरों पर पैसे लेकर अवैध वेंडरों को बैठाने और कार्रवाई में पक्षपात करने जैसे आरोप लग रहे थे। कैमरों का उद्देश्य यह था कि पूरी कार्रवाई रिकॉर्ड हो, ताकि किसी भी शिकायत की निष्पक्ष जांच की जा सके।



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