spot_imgspot_img

Top 5 This Week

spot_img

Related Posts

चंडीगढ़ की पानी सप्लाई व्यवस्था का होगा सुधार:कजौली से 28 किमी लंबी नई स्टील पाइपलाइन बिछेगी, ₹227.7 करोड़ के प्रोजेक्ट को मंजूरी




शहर की पेयजल आपूर्ति को अधिक सुरक्षित बनाने के लिए नगर निगम ने बड़ा फैसला लिया है। कजौली वाटर वर्क्स से सेक्टर-39 स्थित वाटर ट्रीटमेंट प्लांट तक नई माइल्ड स्टील (एमएस) पाइपलाइन बिछाने की परियोजना को एमसी हाउस ने मंजूरी दे दी है। करीब 227.7 करोड़ रुपए की लागत वाले इस प्रोजेक्ट के तहत 28 किलोमीटर लंबी नई पाइपलाइन बिछाई जाएगी। इसका उद्देश्य पुरानी कंक्रीट पाइपलाइनों में लगातार हो रही लीकेज और तकनीकी खराबियों से छुटकारा दिलाना है। नगर निगम के पब्लिक हेल्थ विंग के अनुसार कजौली वाटर वर्क्स से रोजाना 40 एमजीडी पानी लाने वाली फेज-3 और फेज-4 की पाइपलाइनें काफी पुरानी हो चुकी हैं। रबर-रिंग जोड़ों की खराबी, पानी के दबाव में उतार-चढ़ाव और वाटर हैमर के कारण पाइपलाइनें बार-बार फट रही थीं। इससे पानी की बर्बादी होने के साथ शहर में सप्लाई और प्रेशर भी प्रभावित हो रहा था। नई पाइपलाइन बिछने के बाद इन समस्याओं से काफी हद तक राहत मिलने की उम्मीद है। अंदर इपॉक्सी लाइनिंग और बाहर सीमेंट मोर्टार कोटिंग नई योजना के तहत मौजूदा 1200 मिमी प्री-स्ट्रेस्ड कंक्रीट पाइपलाइन की जगह बड़ी क्षमता वाली एमएस पाइपलाइन बिछाई जाएगी। इसके अंदर इपॉक्सी लाइनिंग और बाहर सीमेंट मोर्टार कोटिंग की जाएगी, जिससे पाइपलाइन की उम्र बढ़ेगी और लीकेज की संभावना कम होगी। हालांकि, परियोजना को मंजूरी देने की प्रक्रिया को लेकर विवाद भी खड़ा हो गया है। विपक्ष और कई पार्षदों ने आरोप लगाया है कि इतने बड़े प्रोजेक्ट को बिना विस्तृत चर्चा के टेबल एजेंडा के रूप में पास किया गया। मामले की शिकायत यूटी प्रशासक तक पहुंच चुकी है। नई पाइपलाइन इसलिए जरूरी कजौली वाटर वर्क्स से चंडीगढ़ तक आने वाली फेज-3 और फेज-4 की कंक्रीट पाइपलाइनें कई दशक पुरानी हो चुकी हैं। रबर-रिंग जोड़ों की खराबी, पानी के दबाव में उतार-चढ़ाव और वाटर हैमर के कारण इनमें बार-बार लीकेज और पाइप फटने की घटनाएं हो रही थीं। इससे शहर की पेयजल आपूर्ति प्रभावित होने के साथ पानी की बर्बादी और रखरखाव का खर्च भी लगातार बढ़ रहा था। यह होंगे बदलाव करीब 227.7 करोड़ रुपए की लागत से कजौली वाटर वर्क्स से सेक्टर-39 वाटर ट्रीटमेंट प्लांट तक 28 किलोमीटर लंबी नई माइल्ड स्टील (एमएस) पाइपलाइन बिछाई जाएगी। यह पुरानी 1200 मिमी प्री-स्ट्रेस्ड कंक्रीट पाइपलाइन की जगह लेगी। नई पाइपलाइन के अंदर इपॉक्सी लाइनिंग और बाहर सीमेंट मोर्टार कोटिंग होगी, जिससे लीकेज कम होगी और पाइपलाइन की उम्र बढ़ेगी। मंजूरी पर क्यों उठा विवाद? परियोजना को एमसी हाउस से मंजूरी तो मिल गई, लेकिन इसे टेबल एजेंडा के रूप में बिना विस्तृत चर्चा के पास किए जाने पर कई पार्षदों ने सवाल उठाए हैं। भाजपा समेत अन्य पार्षदों ने प्रक्रिया पर आपत्ति जताई है। मामला यूटी प्रशासक तक पहुंच चुका है और मंजूरी प्रक्रिया की जांच की मांग की गई है।



Source link

कोई जवाब दें

कृपया अपनी टिप्पणी दर्ज करें!
कृपया अपना नाम यहाँ दर्ज करें

Popular Articles