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रोहतक जिले के सांपला में पावर ग्रिड परियोजना को लेकर किसानों का विरोध प्रदर्शन तेज हो गया है। शनिवार को टावर लगाने पहुंची पावर ग्रिड और प्रशासनिक टीम को किसानों के विरोध के कारण बीच रास्ते से ही लौटना पड़ा। किसानों का आरोप है कि मुआवजे में भारी भेदभाव किया गया है, जिस पर जिला प्रशासन जवाब देने से बच रहा है। भैंसरू कलां, भैंसरू खुर्द, नायाबांस, गिझी, इस्माईला और आसपास के गांवों से बड़ी संख्या में किसान इस विरोध प्रदर्शन में शामिल हुए। उन्होंने सरकार और प्रशासन के खिलाफ नारेबाजी करते हुए कहा कि जब तक मुआवजे की विसंगतियां दूर नहीं की जातीं, तब तक गांव में एक भी टावर नहीं लगने दिया जाएगा। इस प्रदर्शन के कारण निर्माण कार्य शुरू होने से पहले ही प्रशासनिक टीम को वापस लौटना पड़ा। किसानों का सवाल- मुआवजे की राशि में अंतर क्यों महेश कुमार, शिवकुमार, प्रशांत कुमार, अजय भारद्वाज, मनीष, प्रवेश, शकुंतला, प्रर्मिला, रीना, परमेश्वरी आदि का आरोप है कि एक ही परियोजना के तहत एक टावर के लिए जमीन का मुआवजा करोड़ों रुपए अधिक तय किया गया है, जबकि दूसरे टावर के लिए करोड़ों रुपए कम। उन्होंने सवाल उठााया कि इस बड़े अंतर का आधार क्या है। किसानों का कहना है कि यदि मूल्यांकन निष्पक्ष है, तो जिला प्रशासन सामने आकर उनके और मीडिया के सवालों का जवाब क्यों नहीं दे रहा है। प्रदर्शनकारी शिवकुमार ने बताया कि उन्होंने कई बार उपायुक्त और अन्य अधिकारियों से मिलकर अपनी आपत्तियां दर्ज कराई हैं, लेकिन आज तक किसी भी अधिकारी ने संतोषजनक जवाब नहीं दिया है। किसानों ने यह भी आरोप लगाया कि मौके पर मौजूद ड्यूटी मजिस्ट्रेट ने भी मीडिया से दूरी बनाए रखी और किसी सवाल का जवाब नहीं दिया। कल भी वापस लौटी थी टीम किसानों ने अपनी बात दोहराते हुए कहा कि, हमारा सवाल सीधा है कि एक टावर का मुआवजा करोड़ों रुपए ज्यादा और दूसरे का करोड़ों रुपए कम क्यों है? यदि सब कुछ पारदर्शी है, तो प्रशासन मीडिया के सामने आकर जवाब दे। जब तक हमें जवाब नहीं मिलेगा, तब तक टावर नहीं लगने दिए जाएंगे। भैंसरू कलां में किसानों का यह आक्रोश अब एक बड़े आंदोलन का रूप लेता जा रहा है। यह लगातार दूसरा दिन था जब प्रशासनिक टीम को बिना काम किए वापस लौटना पड़ा।
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