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अमृतसर के दबुर्जी में 'पहले विकास, फिर वोट' का ऐलान:15 साल से सीवरेज न होने से नेताओं की एंट्री रोकी, 10 दिन का दिया अल्टीमेटम




अमृतसर के दबुर्जी गांव में पिछले डेढ़ दशक से जारी सीवरेज और जल निकासी की गंभीर समस्या को लेकर ग्रामीणों का गुस्सा फूट पड़ा है। लंबे समय से नरकीय जीवन जीने को मजबूर ग्रामीणों ने एकजुट होकर प्रदर्शन किया और ऐलान किया कि जब तक क्षेत्र में विकास कार्य व्यावहारिक रूप से शुरू नहीं होते, तब तक किसी भी राजनीतिक दल के नेता को गांव में चुनाव प्रचार करने की अनुमति नहीं दी जाएगी। ग्रामीणों ने दो टूक शब्दों में संदेश दिया है—”पहले विकास होगा, उसके बाद ही वोट मिलेगा।” स्थानीय निवासी लखविंदर सिंह ने बताया कि बीते करीब 15 वर्षों से पूरा गांव जलभराव और सीवरेज की समस्या से जूझ रहा है। हल्की सी बारिश होते ही गांव की गलियां और घरों के बाहर गंदा पानी भर जाता है, जिससे लोगों का पैदल निकलना भी दूभर हो जाता है। आरोप- वादा करके चले जाते हैं नेता फि्र झांकने नहीं आते प्रदर्शन में शामिल महिलाओं—बलविंदर कौर और सुखविंदर कौर ने राजनीतिक दलों पर वादाखिलाफी का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि चुनाव आते ही नेता बड़े-बड़े वादे करते हैं, लेकिन सत्ता में आते ही गांव की सुध लेना भूल जाते हैं। ग्रामीणों का कहना है कि उन्होंने शिरोमणि अकाली दल, कांग्रेस और आम आदमी पार्टी—तीनों ही दलों के प्रत्याशियों पर भरोसा जताया, लेकिन किसी भी सरकार ने इस मूलभूत समस्या का स्थायी समाधान नहीं निकाला। गांव के एक पूर्व सैनिक ने प्रशासनिक तंत्र की लापरवाही पर सवाल उठाते हुए कहा कि सांसद, क्षेत्रीय विधायक, नगर निगम और भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (NHAI) तक को सालों से गुहार लगाई जा रही है। नेशनल हाईवे के निर्माण के समय गांव में सीवरेज लाइन डालने का आश्वासन दिया गया था, जो आज तक अधूरा है। स्थिति यह है कि नगर निगम और NHAI अपनी जिम्मेदारी एक-दूसरे पर डालकर पल्ला झाड़ लेते हैं। नगर निगम टैक्स तो लेता है लेकिन सुविधाएं देने में पीछे ग्रामीणों का आरोप है कि दबुर्जी को नगर निगम की सीमा में शामिल कर उनसे नियमित रूप से हाउस टैक्स तो वसूला जा रहा है, लेकिन बदले में बुनियादी सुविधाएं शून्य हैं। इससे पहले ग्रामीणों ने हस्ताक्षर अभियान चलाकर प्रशासनिक अधिकारियों को ज्ञापन भी सौंपा था, पर कोई सुनवाई नहीं हुई। इस स्थिति से तंग आकर ग्रामीणों ने प्रशासन को 10 दिन का अल्टीमेटम दिया है। उन्होंने चेतावनी दी है कि यदि तय सीमा के भीतर निर्माण कार्य शुरू नहीं हुआ, तो वे डिप्टी कमिश्नर (DC) कार्यालय के बाहर विशाल धरना देंगे। इसके साथ ही गांव के प्रवेश द्वारों पर बोर्ड लगाकर सभी राजनीतिक दलों और नगर निगम प्रतिनिधियों के प्रवेश का पूर्ण बहिष्कार किया जाएगा।



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