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भारत-अमेरिका व्यापार समझौते के विरोध में कल देशभर में मोटरसाइकिल-मार्च:मांगें न मानने पर पंधेर ने दी बड़े आंदोलन की चेतावनी




भारत-अमेरिका प्रस्तावित व्यापार समझौते के विरोध में कल देशभर में बड़े स्तर पर मोटरसाइकिल मार्च निकाला जाएगा। किसान संगठनों ने इस मार्च के जरिए केंद्र सरकार तक अपना विरोध दर्ज कराने का ऐलान किया है। उनका कहना है कि यह समझौता किसानों, मजदूरों, छोटे व्यापारियों और आम लोगों के हितों के खिलाफ है। किसान मजदूर संघर्ष समिति के राज्य नेता सरवन सिंह पंधेर ने जानकारी देते हुए बताया कि देश बचाओ मोर्चा के आह्वान पर कल पूरे देश में मोटरसाइकिल मार्च आयोजित किए जाएंगे। उन्होंने कहा कि इस आंदोलन का उद्देश्य केंद्र सरकार को यह संदेश देना है कि देश का किसान और मजदूर वर्ग भारत-अमेरिका व्यापार समझौते का विरोध करता है। पंजाब के 23 जिलों में मोटरसाइकिल मार्च निकाले जाएंगे पंधेर के अनुसार, पंजाब के 23 जिलों में मोटरसाइकिल मार्च निकाले जाएंगे, जिनमें किसान मजदूर मोर्चा, संयुक्त किसान मोर्चा (गैर-राजनीतिक), आजाद किसान मोर्चा सहित कई किसान संगठन भाग लेंगे। इसके अलावा हरियाणा, राजस्थान, हिमाचल प्रदेश, उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड, मध्य प्रदेश, ओडिशा, दिल्ली और महाराष्ट्र समेत कई राज्यों में भी विरोध प्रदर्शन, मोटरसाइकिल और साइकिल मार्च आयोजित किए जाएंगे। सरवन सिंह पंधेर का दावा है कि भारत कृषि उत्पादन के मामले में आत्मनिर्भर देश है। यहां अनाज, दालें, फल, सब्जियां, फूल और तिलहन जैसी लगभग सभी आवश्यक कृषि उपज का पर्याप्त उत्पादन होता है। ऐसे में विदेशों से कृषि उत्पादों के आयात की आवश्यकता नहीं है। उन्होंने आशंका जताई कि यदि भारत-अमेरिका व्यापार समझौता लागू हुआ तो अमेरिकी कृषि उत्पाद कम या शून्य आयात शुल्क पर भारतीय बाजार में पहुंचेंगे। उनका कहना है कि अमेरिका में किसानों और कृषि कंपनियों को भारी सरकारी सब्सिडी मिलती है, जबकि भारत के अधिकांश किसान छोटी जोतों पर खेती करते हैं। ऐसे में उनके लिए प्रतिस्पर्धा करना बेहद कठिन होगा, जिससे छोटे और मध्यम किसानों के साथ-साथ छोटे उद्योगों और व्यापारियों को भी आर्थिक नुकसान उठाना पड़ सकता है। समझौता वापस न होने पर बड़े किसान आंदोलन की चेतावनी पंधेर ने देशवासियों से अपील की है कि वे कल होने वाले मोटरसाइकिल मार्च में अधिक से अधिक संख्या में शामिल हों। साथ ही उन्होंने चेतावनी दी कि यदि केंद्र सरकार ने प्रस्तावित व्यापार समझौते को वापस नहीं लिया, तो किसान संगठन पहले के किसान आंदोलन से भी बड़ा आंदोलन शुरू करने के लिए मजबूर होंगे।



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