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करनाल जिले की मंडियों में धान उठान को लेकर बड़ा खुलासा सामने आया है। इलेक्ट्रॉनिक सबूतों में यह सामने आया कि जिन गाड़ियों से धान उठाने का दावा किया गया, वे जीपीएस सिस्टम में ‘शून्य किलोमीटर’ चली दिखीं। इसके बाद विभाग ने करीब 35 प्रतिशत गाड़ियों का भुगतान रोक दिया, जिसकी राशि लगभग 20 करोड़ रुपये आंकी जा रही है। मामले की विस्तृत रिपोर्ट सरकार को भेजी जा चुकी है और अब अंतिम फैसला उच्च स्तर पर लिया जाएगा। जीपीएस रिकॉर्ड से खुली गड़बड़ी
जानकारी के अनुसार मंडियों में लिफ्टिंग की गड़बड़ी तब सामने आई जब उच्च अधिकारियों के समक्ष जीपीएस डेटा पेश किया गया। इसमें साफ दिखा कि कई गाड़ियां कागजों में धान उठाती रहीं, लेकिन असल में चली ही नहीं। इस खुलासे ने पूरे सिस्टम पर सवाल खड़े कर दिए हैं कि जब गाड़ियां चली ही नहीं, तो लाखों क्विंटल धान मिलों तक कैसे पहुंचा? तकनीकी खामी
जांच की आंच बढ़ने पर ट्रांसपोर्ट ठेकेदारों ने विभाग के अधिकारियों के सामने प्रेजेंटेशन दी। उनका कहना था कि तकनीकी दिक्कतों के कारण जीपीएस में गाड़ियों की लोकेशन शून्य दिखी। वहीं, सूत्रों के अनुसार कई ठेकेदारों ने बिना चली गाड़ियों के भुगतान का दावा छोड़ना भी शुरू कर दिया है, जिससे संदेह और गहरा गया है। गेट पास की जांच से खुल सकता है बड़ा राज
प्रशासन द्वारा बनाई गई एसआईटी यदि इन गाड़ियों के आउटर गेट पास की गहन जांच करे तो घोटाले का बड़ा और चौंकाने वाला स्वरूप सामने आ सकता है। सवाल उठ रहा है कि जब गाड़ियां चली ही नहीं, तो आखिर मंडियों से कौन सा धान उठाया गया और वह कहां गया। छह मामलों की जांच में पुलिस जुटी धान घोटाले की इस के पूरे मामले में पुलिस ने अलग-अलग थानों में छह FIR दर्ज कर मामलों की बारीकी से जांच कर रही है। जांच के दौरान कई अहम तथ्य सामने आने की संभावना जताई जा रही है। माना जा रहा है कि जांच आगे बढ़ने पर और भी लोगों की भूमिका सामने आ सकती है। फर्जी गेट पास से एमएसपी पर डाका
जानकारी के मुताबिक, मंडी अधिकारियों की मिलीभगत से फर्जी गेट पास काटकर कागजों में धान खरीदा गया। इस खेल में किसानों की न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) पर भी डाका डाला गया। फर्जी गेट पास, फर्जी खरीद और फर्जी उठान के जरिए बड़े स्तर पर गड़बड़ी की गई। 45 अधिकारियों-कर्मचारियों पर कार्रवाई
सरकार ने इस मामले में सख्त रुख अपनाते हुए कार्रवाई शुरू की। करनाल में ही करोड़ों के धान घोटाले में खरीद एजेंसियों के छोटे-बड़े कर्मचारियों से लेकर मंडी सचिवों तक को जेल भेजा जा चुका है। अब तक 45 अधिकारियों और कर्मचारियों के खिलाफ कार्रवाई हो चुकी है। धान सीजन खत्म होने के आठ महीने बाद भी एसआईटी की जांच जारी है और गिरफ्तारियों का दौर थमा नहीं है। ट्रांसपोर्टर्स की भूमिका पर सवाल
इतनी बड़ी कार्रवाई के बावजूद विभाग ने अभी तक फर्जी उठान के आंकड़े सार्वजनिक नहीं किए हैं। इससे यह सवाल उठ रहा है कि क्या इस मामले में ट्रांसपोर्टर्स की भूमिका को नजरअंदाज किया जा रहा है। पूरे घोटाले की कड़ी ट्रांसपोर्ट सिस्टम से भी जुड़ी हो सकती है। डीएफएससी मुकेश बोले-रिपोर्ट सरकार के पास
डीएफएससी मुकेश ने बताया कि ट्रांसपोर्टर्स ने तकनीकी दिक्कतों का हवाला देते हुए अपनी बात रखी है। पूरे मामले की विस्तृत रिपोर्ट सरकार को भेज दी गई है। अब जो भी निर्णय होगा, वह उच्च स्तर पर लिया जाएगा। अंतिम फैसले पर टिकी निगाहें
मंडियों में धान उठान की इस गड़बड़ी ने पूरे सिस्टम की पारदर्शिता पर सवाल खड़े कर दिए हैं। एक ओर करोड़ों रुपये का भुगतान अटका हुआ है, तो दूसरी ओर जांच के दायरे में नए पहलू सामने आ रहे हैं। अब सभी की निगाहें सरकार के अंतिम फैसले पर टिकी हैं, जिससे तय होगा कि इस मामले में आगे क्या कार्रवाई होगी।
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जीरो किलोमीटर गाड़ियों ने खोली धान उठान की पोल:20 करोड़ का भुगतान रुका,ट्रांसपोर्टर्स की प्रेजेंटेशन: बताई तकनीकी खामी, सरकार को भेजी गई रिपोर्ट







