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चंडीगढ़ में पहला फुली डिजिटल म्यूजियम बनेगा:ली कॉर्बूजिए सेंटर के लिए भेजा गया प्रस्ताव, VR और AR में दिखेगा शहर का इतिहास




चंडीगढ़ की ऐतिहासिक विरासत को अब आधुनिक तकनीक के जरिए नई पहचान मिलने जा रही है। सेक्टर-19 स्थित ऐतिहासिक ली कॉर्बूजिए सेंटर को चंडीगढ़ का पहला फुली डिजिटल और इंटरैक्टिव म्यूजियम बनाने की तैयारी शुरू हो गई है। इसके लिए चंडीगढ़ प्रशासन ने केंद्र सरकार की स्वदेश दर्शन 2.0 योजना के तहत विस्तृत प्रस्ताव भेज दिया है। यदि इस परियोजना को मंजूरी मिल जाती है, तो यह न केवल चंडीगढ़ का पहला पूर्ण रूप से डिजिटाइज्ड म्यूजियम होगा, बल्कि उत्तर भारत के प्रमुख डिजिटल हेरिटेज सेंटरों में भी अपनी जगह बना सकता है। अब डिजिटल अवतार में दिखेगी चंडीगढ़ की विरासत विश्व प्रसिद्ध वास्तुकार ली कॉर्बूजिए और उनकी टीम द्वारा तैयार किए गए चंडीगढ़ के इतिहास, वास्तुकला और विकास यात्रा को अब लोग आधुनिक तकनीक के माध्यम से बेहद करीब से महसूस कर सकेंगे। प्रशासन का उद्देश्य केवल एक संग्रहालय तैयार करना नहीं, बल्कि शहर की विरासत को नई पीढ़ी और दुनिया भर के पर्यटकों तक आकर्षक और तकनीकी तरीके से पहुंचाना है। चंडीगढ़ की पर्यटन निदेशक राखिका सिंह के अनुसार, फिलहाल परियोजना का प्रस्ताव केंद्र सरकार के पास विचाराधीन है। मंजूरी मिलने के बाद सेंटर को अत्याधुनिक सुविधाओं से लैस किया जाएगा। वर्चुअल रियलिटी और 3D तकनीक से मिलेगा नया अनुभव डिजिटल म्यूजियम में पर्यटकों को कई हाईटेक सुविधाएं उपलब्ध करवाई जाएंगी। इनमें वर्चुअल रियलिटी (VR) टूर, ऑगमेंटेड रियलिटी (AR) आधारित प्रदर्शन, इंटरैक्टिव टच स्क्रीन, 3D मॉडल और डिजिटल आर्काइव्स शामिल होंगे। इन तकनीकों के जरिए पर्यटक चंडीगढ़ के निर्माण, उसके वास्तु डिजाइन और शहर के विकास की कहानी को एक नए और जीवंत अंदाज में देख और समझ सकेंगे। पुराने नक्शों, दस्तावेजों और ऐतिहासिक रिकॉर्ड को भी डिजिटल रूप में संरक्षित किया जाएगा। केवल प्रदर्शनी नहीं, इतिहास को महसूस कराने की तैयारी पर्यटन विभाग के अधिकारियों का कहना है कि इस परियोजना का मकसद सिर्फ वस्तुओं को प्रदर्शित करना नहीं है, बल्कि लोगों को चंडीगढ़ के इतिहास और वास्तुकला से भावनात्मक और अनुभवात्मक रूप से जोड़ना है। प्रशासन चाहता है कि यहां आने वाला हर पर्यटक शहर के निर्माण की पूरी कहानी को आधुनिक तकनीक के माध्यम से महसूस कर सके। यहीं तैयार हुआ था चंडीगढ़ का ऐतिहासिक मास्टर प्लान सेक्टर-19 स्थित ली कॉर्बूजिए सेंटर का ऐतिहासिक महत्व भी बेहद खास है। वर्ष 1951 में इस भवन का निर्माण अस्थायी रूप से किया गया था। इसी इमारत में बैठकर विश्व प्रसिद्ध वास्तुकार ली कॉर्बूजिए, पियरे जेनेरे और उनकी अंतरराष्ट्रीय टीम ने स्वतंत्र भारत के पहले योजनाबद्ध शहर चंडीगढ़ का मास्टर प्लान तैयार किया था। इतिहास के इस महत्वपूर्ण अध्याय का गवाह यह भवन आज भी अपनी अनूठी वास्तुकला और डिजाइन के कारण विशेष पहचान रखता है। यह है स्वदेश दर्शन 2.0 योजना? स्वदेश दर्शन 2.0 केंद्र सरकार के पर्यटन मंत्रालय की महत्वाकांक्षी योजना है। इसका उद्देश्य केवल पर्यटन स्थलों का सौंदर्यीकरण करना नहीं, बल्कि उन्हें टिकाऊ, जिम्मेदार और अनुभव आधारित पर्यटन केंद्रों के रूप में विकसित करना है, ताकि पर्यटकों को केवल घूमने का नहीं बल्कि उस जगह को समझने और महसूस करने का अवसर भी मिल सके।



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