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पंजाब के मोगा जिले के गांव किशनपुरा कलां स्थित सरकारी सीनियर सेकेंडरी स्कूल के खेल स्टेडियम का नाम बदलने को लेकर क्षेत्र के लोगों, खेल प्रेमियों और खिलाड़ियों में भारी नाराजगी है। इस स्टेडियम का नाम ‘संत बाबा विसाखा सिंह यादगारी खेल स्टेडियम’ से बदलकर ‘मुख्यमंत्री खेल मैदान’ कर दिया गया है। ग्रामीणों का कहना है कि यह स्टेडियम वर्षों से संत बाबा विसाखा सिंह जी की स्मृति से जुड़ा हुआ है। यहां हर वर्ष उनकी याद में कबड्डी कप का आयोजन किया जाता है, जो क्षेत्र की एक महत्वपूर्ण परंपरा है। लोगों के अनुसार, स्टेडियम पर अब ‘मुख्यमंत्री खेल मैदान’ लिखे जाने से उनकी धार्मिक और सामाजिक भावनाएं आहत हुई हैं। वे इस बदलाव को अपने महापुरुष के प्रति अनादर मानते हैं। पहले कभी देखने को नहीं मिली ऐसी स्थिति इलाका निवासियों ने बताया कि पंजाब में पहले भी कई सरकारें आईं और गईं, लेकिन महापुरुषों, गुरुओं और पीरों के नाम पर बने स्मारकों और खेल स्टेडियमों के नाम बदलने जैसी स्थिति पहले कभी देखने को नहीं मिली। उनका मानना है कि इन संस्थानों को महापुरुषों की स्मृति को जीवित रखने के लिए समर्पित किया गया था। खिलाड़ियों ने भी फैसले पर जताई आपत्ति ग्रामीणों ने सवाल उठाया कि आखिर ऐसी कौन-सी विशेष उपलब्धि या बड़ी सरकारी सहायता गांव को दी गई है, जिसके आधार पर संत बाबा विसाखा सिंह यादगारी खेल स्टेडियम का नाम बदलकर ‘मुख्यमंत्री खेल मैदान’ रखा गया है। खेल प्रेमियों और खिलाड़ियों ने भी इस फैसले पर आपत्ति जताई है। स्टेडियम का पुराना नाम बहाल करने की मांग उनका कहना है कि खेल स्टेडियमों की पहचान उनके ऐतिहासिक और सामाजिक महत्व से जुड़ी होती है और महापुरुषों के नाम हटाकर नए नाम देने से उनकी विरासत को नुकसान पहुंचता है। क्षेत्रवासियों ने सरकार से मांग की है कि स्टेडियम का पुराना नाम बहाल किया जाए और संत बाबा विसाखा सिंह जी की स्मृति को सम्मानपूर्वक बनाए रखा जाए। इस मुद्दे को लेकर गांव में चर्चा और असंतोष का माहौल बना हुआ है।
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मोगा में स्टेडियम का नाम बदलने पर विरोध:खिलाड़ियों और ग्रामीणों ने जताई आपत्ति; पुराना नाम बहाल करने की मांग







