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पंजाब कांग्रेस में नहीं थम रही आपसी खींचतान:नेतृत्व परिवर्तन की सुगबुगाहट, हाईकमान ने नियुक्त किए तीन केंद्रीय ऑब्जर्वर, रिपोर्ट बनाएंगे




पंजाब कांग्रेस के भीतर मचे अंदरूनी कलह और गुटबाजी कम होने का नाम नहीं ले रही। पंजाब के नेता हाईकमान के सामने भी एक दूसरे पर आरोप प्रत्यारोप लगा रहे हैं। पंजाब में विधानसभा चुनाव से पहले गुटबाजी खत्म करने के लिए हाईकमान ने तीन ऑब्जर्वर लगा दिए। पार्टी ने एक बार फिर पंजाब में गुटबाजी को कंट्रोल करने की जिम्मेदारी सीनियर नेता अजय माकन को सौंपी है। पार्टी ने अजय माकन, मीनाक्षी नटराजन और भजन लाल जाटव को पंजाब ममें ऑब्जर्वर नियुक्त किया है। ये तीनों नेता पंजाब आकर कार्यकर्ताओं और नेताओं से फीडबैक लेंगे और अपनी रिपोर्ट सीधे कांग्रेस अध्यक्ष को सौंपेंगे। हालांकि हाईकमान सार्वजनिक रूप से नेतृत्व परिवर्तन से इनकार कर रहा है, लेकिन राजनीतिक गलियारों में इस कवायद को राज्य में नए चेहरे को कमान सौंपने से पहले जमीन टटोलने की रणनीति के रूप में देखा जा रहा है। केसी वेणुगोपाल ने जो पत्र जारी किया है उसमें लिखा है कि तीनों ऑब्जर्वर पंजाब में राजनीतिक सिनारियों पर चर्चा करेंगे और उसकी रिपोर्ट जल्दी से जल्दी हाईकमान को देंगे। बताया जा रहा है कि तीनों नेता पार्टी की अंदरूनी रिपोर्ट के अलावा पंजाब में अन्य दलों की पॉजिशन की भी रिपोर्ट बनाएंगे।
कांग्रेस को क्यों पड़ी ऑब्जर्वर लगाने की जरूरत, जानिए… 2022 विधानसभा चुनाव से एक साल पहले माकन को भेजा था पंजाब पंजाब कांग्रेस में गुटबाजी हमेशा से रही है। 2022 विधानसभा चुनाव से पूर्व भी कांग्रेस अलग-अलग खेमों में बंटी थी। पार्टी अध्यक्ष नवजोत सिंह सिद्धू ने मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह के खिलाफ सीधी जंग शुरू कर दी थी। पार्टी ने तब पंजाब प्रभारी हरीश रावत को हटाया और हरीश चौधरी को जिम्मेदारी सौंपी। लेकिन हरीश चौधरी भी पार्टी की गुटबाजी रोकने में कामयाब नहीं रही। पार्टी ने फिर अजय माकन को स्क्रीनिंग कमेटी का चेयरमैन बनाकर पंजाब भेजा। अजय माकन ने ग्राउंड लेवल पर जाकर कार्यकर्ताओं से रिपोर्ट ली और पार्टी हाईकमान को दी। 2022 विधानसभा चुनाव से कुछ माह पहले पार्टी ने कैप्टन को हटाकर चरणजीत सिंह चन्नी को मुख्यमंत्री बनाया। हालांकि नवजोत सिंह सिद्धू अध्यक्ष होते हुए भी चुनाव प्रचार में चरणजीत सिंह चन्नी की नीतियों का विरोध करते रहे और नतीजा यह हुआ कि पार्टी बुरे तरीके से चुनाव हार गई। इस बार पार्टी वो गलती दोबारा नहीं दोहराना चाहती है। इसलिए पार्टी ने पंजाब के लिए तीन ऑब्जर्वर नियुक्त कर दिए। प्रधान पद के दावेदार; उनके स्ट्रॉन्ग और वीक पॉइंट्स, जानिए.. 1. चरणजीत सिंह चन्नी स्ट्रॉन्ग पॉइंट: पंजाब के सबसे बड़े दलित चेहरे हैं। राज्य के बड़े वोट बैंक (SC वर्ग) में गहरी पैठ रखते हैं और पूर्व मुख्यमंत्री रह चुके हैं। वीक पॉइंट: पार्टी के भीतर ही एक बड़ा धड़ा उनके नेतृत्व को पूरी तरह स्वीकार करने में हिचकता है। 2. प्रताप सिंह बाजवा स्ट्रॉन्ग पॉइंट: वर्तमान में नेता प्रतिपक्ष (LoP) हैं। जट्ट सिख चेहरा हैं, आक्रामक वक्ता हैं और पंजाब की जमीनी राजनीति का लंबा अनुभव है। वीक पॉइंट: उनका आक्रामक स्वभाव कई बार पार्टी के अंदर ही टकराव पैदा करता है। 3. सुखजिंदर सिंह रंधावा स्ट्रॉन्ग पॉइंट: पूर्व डिप्टी सीएम रहे हैं। टकसाली कांग्रेसी परिवार से आते हैं और संगठन के भीतर कैडर पर उनकी पकड़ काफी मजबूत मानी जाती है। वीक पॉइंट: वे विवादों में जल्दी घिर जाते हैं और अक्सर अन्य गुटों के साथ उनके रिश्ते तल्ख रहते हैं। 4. विजयइंद्र सिंगला स्ट्रॉन्ग पॉइंट: पंजाब कांग्रेस का सबसे प्रमुख हिंदू चेहरा हैं। साफ-सुथरी और बेदाग छवि है, साथ ही राहुल गांधी के करीबी रणनीतिकारों में गिने जाते हैं। वीक पॉइंट: पंजाब की राजनीति में इस समय जट्ट सिख और दलित समीकरणों के हावी होने के कारण उनका दावा कमजोर पड़ सकता है। 5. अमरिंदर सिंह राजा वडिंग (मौजूदा प्रधान) स्ट्रॉन्ग पॉइंट: युवाओं में लोकप्रिय हैं और आक्रामक तरीके से अपनी बात रखते हैं। वर्तमान में पद पर काबिज हैं, जिससे उनका तंत्र मजबूत है। वीक पॉइंट: हालिया चुनावों और स्थानीय निकाय स्तर पर मनमुताबिक नतीजे न दे पाना। विरोधी गुट एकजुट होकर उन्हें पद से हटाने के लिए पूरी ताकत लगा रहा है।



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