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IAS अफसर को सरकारी गवाह बनाने की तैयारी:हरियाणा 661 करोड़ IDFC-AU स्मॉल फाइनेंस बैंक घोटाला; CBI का राज खुलने का दावा




हरियाणा IDFC फर्स्ट बैंक और AU स्मॉल फाइनेंस बैंक से जुड़े 661 करोड़ रुपए के कथित घोटाले की जांच में केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) अब एक अहम कदम उठाने की तैयारी में है। सूत्रों के अनुसार, जांच एजेंसी हरियाणा कैडर के एक IAS अधिकारी को सरकारी गवाह बनाने पर विचार कर रही है। माना जा रहा है कि इस अधिकारी के बयान से पूरे नेटवर्क और घोटाले की कार्यप्रणाली से जुड़े कई महत्वपूर्ण तथ्य सामने आ सकते हैं। CBI ने शनिवार को इस मामले में पहली बार हरियाणा-चंडीगढ़ से बाहर कार्रवाई करते हुए दिल्ली-एनसीआर तक जांच का दायरा बढ़ाया। एजेंसी ने चंडीगढ़, पंचकूला और दिल्ली-एनसीआर में हरियाणा कैडर के तीन IAS अधिकारियों और एक IFS अधिकारी के आवास समेत छह ठिकानों पर छापेमारी की। क्यों IAS अधिकारी को सरकारी गवाह बनानी चाहती है CBI 1. खुल सकते हैं कई राज जांच एजेंसी का मानना है कि सरकारी विभागों के बैंक खाते खुलवाने, फर्जी एफडीआर (FDR) तैयार करने और सरकारी धन को विभिन्न खातों में ट्रांसफर करने की प्रक्रिया में कुछ अधिकारियों की भूमिका महत्वपूर्ण रही है। ऐसे में एक IAS अधिकारी को सरकारी गवाह बनाए जाने से जांच को मजबूत आधार मिल सकता है और अन्य आरोपियों के खिलाफ साक्ष्य जुटाने में मदद मिल सकती है। 2. पूछताछ में मिल चुका अहम इनपुट सूत्रों के अनुसार, संबंधित अधिकारी से पहले भी पूछताछ की जा चुकी है और उसके पास उपलब्ध दस्तावेजी व प्रशासनिक जानकारी पूरे मामले की कड़ियां जोड़ने में अहम साबित हो सकती है। ये आईएएस अधिकारी विकास व पंचायत राज विभाग में लंबे समय तक कार्यरत रह चुके हैं। अब सिविल सचिवालय में अच्छे पद पर ये अधिकारी पोस्टेड हैं। पहली बार दिल्ली-एनसीआर तक पहुंची जांच CBI की टीम ने हरियाणा, चंडीगढ़ और दिल्ली-एनसीआर में कई स्थानों पर एक साथ तलाशी अभियान चला चुकी। जांच एजेंसी का दावा है कि छापों के दौरान ऐसे दस्तावेज और डिजिटल साक्ष्य मिले हैं, जिनसे संकेत मिलता है कि कुछ सरकारी कर्मचारियों ने बैंक अधिकारियों के साथ मिलकर सरकारी खाते खुलवाने, रकम ट्रांसफर करने और बाद में उसके दुरुपयोग में सहयोग किया। नोएडा की कंपनी तक पहुंची जांच जांच के दौरान नोएडा स्थित एक निजी कंपनी के परिसरों पर भी सर्च ऑपरेशन किया गया। CBI को संदेह है कि घोटाले से जुड़ी रकम पहले कंपनी के खातों में जमा कराई गई और बाद में उसे निजी खातों में ट्रांसफर किया गया। तलाशी के दौरान कई महत्वपूर्ण दस्तावेज, डिजिटल उपकरण और वित्तीय रिकॉर्ड जब्त किए गए हैं, जिनकी जांच जारी है। दो एजेंसियां कर रही जांच मामले की जांच फिलहाल CBI और प्रवर्तन निदेशालय (ED) दोनों कर रहे हैं। CBI पहले ही 13 लोगों और दो फर्जी संस्थाओं के खिलाफ आरोप पत्र दाखिल कर चुकी है। जांच में सामने आया है कि सरकारी विभागों के करोड़ों रुपए फर्जी एफडीआर के जरिए बैंकिंग सिस्टम में घुमाए गए और बाद में अलग-अलग खातों में भेजे गए। इन अधिकारियों के नाम आए सामने जांच के दायरे में आए अधिकारियों में मोहम्मद शाइन, पंकज अग्रवाल, विनीत गर्ग, आरके सिंह, प्रदीप कुमार, मनीराम शर्मा, संकेत कुमार और डॉ. वैभव शर्मा के नाम शामिल बताए जा रहे हैं। हरियाणा सरकार पहले ही इन अधिकारियों के खिलाफ भ्रष्टाचार निरोधक अधिनियम की धारा 17A के तहत जांच की अनुमति दे चुकी है। CBI की नजर अब उस अधिकारी पर है, जिसे सरकारी गवाह बनाकर पूरे घोटाले की परतें खोली जा सकती हैं। यदि ऐसा होता है, तो 661 करोड़ रुपए के इस बहुचर्चित बैंक घोटाले की जांच में बड़ा मोड़ आ सकता है और कई नए नाम भी सामने आ सकते हैं।



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