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फरीदाबाद में एक हैरान कर देने वाला मामला सामने आया है। यंहा पर एक बच्चे के फेफड़े में टीवी रिमोट का छोटा बल्बनुमा हिस्सा करीब एक हफ्ते तक फंसा रहा, जिससे उसे लगातार खांसी, सांस लेने में दिक्कत और बुखार की शिकायत हो रही थी। अमृता अस्पताल में डॉक्टरों ने एक बेहद जटिल और जोखिमभरे ऑपरेशन के जरिए दो साल के बच्चे फेफड़े के पास उसको निकाला। एक सप्ताह से हो रही थी शिकायत अस्पताल प्रशासन से मिली जानकारी के अनुसार बच्चा फरीदाबाद का रहने वाला है। जिसको एक सप्ताह से लगातार खांसी हो रही थी। परिजन शुरुआत में इसे सामान्य संक्रमण समझते रहे और स्थानीय डॉक्टर से इलाज कराते रहे। लेकिन जब हालत में सुधार नहीं हुआ तो बच्चे के माता-पिता को याद आया कि करीब एक सप्ताह पहले बच्चा टीवी रिमोट के छोटे बल्ब जैसे हिस्से के साथ खेल रहा था और संभव है कि वह गलती से उसके गले में चला गया हो। इसके बाद बाल रोग विशेषज्ञ को वस्तु सांस की नली में फंसने का संदेह हुआ और बच्चे को तुरंत अस्पताल रेफर किया गया। करीब 5 घंटे तक चली सर्जरी अस्पताल में जांच के दौरान डॉक्टरों ने पाया कि रिमोट का बल्बनुमा हिस्सा दाहिने फेफड़े की निचली ब्रोंकस में गहराई तक फंसा हुआ है। वस्तु में धातु के तार और कांच होने के कारण मामला और भी चुनौतीपूर्ण बन गया था। लंबे समय तक फंसे रहने से वहां सूजन और ग्रैनुलेशन टिश्यू भी विकसित हो चुका था। स्थिति की गंभीरता को देखते हुए पीडियाट्रिक पल्मोनोलॉजी, एडल्ट पल्मोनोलॉजी, पीडियाट्रिक एनेस्थीसिया और ईएनटी विभाग की संयुक्त टीम ने इमरजेंसी ब्रोंकोस्कोपी की। डॉ. मनिंदर ढालीवाल, डॉ. सौरभ पाहुजा और डॉ. रिधिमा भाटिया समेत विशेषज्ञों ने एडवांस तकनीक की मदद से विदेशी वस्तु को सुरक्षित बाहर निकाल लिया। ऑपरेशन के तुरंत बाद बच्चे की सांस सामान्य हो गई और अगले ही दिन उसे अस्पताल से छुट्टी दे दी गई। बच्चों को लेकर डॉक्टर की सलाह विशेषज्ञों का कहना है कि यदि किसी बच्चे को अचानक खांसी, सांस लेने में परेशानी या तेज आवाज के साथ सांस आने जैसी समस्या हो, खासकर किसी वस्तु के मुंह या गले में जाने के बाद, तो इसे नजरअंदाज न करें। समय पर पहचान और उपचार ऐसे मामलों में बच्चे की जान बचा सकता है।
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दो साल के मासूम के फेफड़े में फंसा रिमोट बल्ब:1 हफ्ते बाद 5 घंटे की सर्जरी करके निकाला गया, इमरजेंसी ब्रोंकोस्कोपी की गई







