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करनाल के घरौंडा में 17 से 23 मई तक नई अनाज मंडी में हुई शिव महापुराण कथा के एक महीने बाद अब आयोजन के आय-व्यय को लेकर विवाद सामने आ गया है। नगरखेड़ा सभा ने मंडी की मैनेजमेंट कमेटी के हिसाब पर सवाल उठाते हुए असंतोष जताया है। सभा का कहना है कि उन्होंने अपने स्तर पर एक-एक पैसे का हिसाब सार्वजनिक कर दिया है, लेकिन मंडी की ओर से दिया गया लेखा-जोखा स्पष्ट नहीं है, जिससे समाज में भी नाराजगी है। विवादों के बीच शुरू हुई थी कथा, अब हिसाब पर सवाल
घरौंडा की नई अनाज मंडी में 17 से 23 मई तक शिव महापुराण कथा का आयोजन हुआ था। कथा वाचक पंडित प्रदीप मिश्रा थे। आयोजन की शुरुआत में ही वीआईपी पास बेचने के मामले को लेकर विवाद खड़ा हो गया था और कथा रद्द होने की नौबत तक आ गई थी। इसके बाद कथा से दो-तीन दिन पहले नगरखेड़ा मंदिर में समाज के लोगों की बैठक हुई, जिसमें कथा को हर हाल में पूरा कराने का संकल्प लिया गया। इसी प्रयास के चलते कथा शांतिपूर्वक संपन्न हुई। नगरखेड़ा सभा ने प्रैसवार्ता में दिया पूरा हिसाब
घरौंडा नगरखेड़ा सभा के पदाधिकारी वीर सिंह, श्रीपाल, जोगिंदर पप्पू, जवाहर सिंह और अमित राणा सहित अन्य ने प्रैसवार्ता कर कथा के आय-व्यय का पूरा ब्यौरा दिया। उन्होंने बताया कि नगरखेड़ा सभा की अगुवाई में आयोजन शुरू हुआ था और बाद में एक मैनेजमेंट कमेटी बनाई गई, जिसमें मंडी प्रधान भी शामिल थे। सभा के अनुसार समाज के सहयोग से कुल 89 लाख 41 हजार 328 रुपए एकत्रित हुए थे। इसमें से 61 लाख 1 हजार रुपए की राशि कथा की मैनेजमेंट टीम को नगरखेड़ा मंदिर में ही सौंप दी गई थी। पंडित प्रदीप मिश्रा को दी गई राशि का भी खुलासा
सभा पदाधिकारियों ने बताया कि कथा वाचन के लिए पंडित प्रदीप मिश्रा को 15 लाख रुपए और 9 लाख रुपए की राशि दी गई। इसके अलावा 6 लाख रुपए टेंट के भुगतान के लिए मैनेजमेंट कमेटी के राजिंद्र जैन को दिए गए। एक लाख एक हजार रुपए बिल्ले लाला जी को भी दिए गए। ऑनलाइन और ऑफलाइन राशि का पूरा ब्योरा
सभा के अनुसार कुल राशि में से खर्च के बाद 28 लाख 40 हजार 328 रुपए शेष बचे थे। दादा खेड़ा के नाम से जारी स्कैनर पर 17 लाख 9900 रुपए ऑनलाइन प्राप्त हुए। इस राशि को घटाने के बाद 11 लाख 30 हजार 728 रुपए शेष रहे। इसके बाद राणा रिसॉर्ट में बाउंसरों के ठहरने, डीजल और भोजन पर 84 हजार 700 रुपए खर्च किए गए। इसके बाद बची राशि 10 लाख 45 हजार 686 रुपए रह गई। भंडारे के खर्च के बाद बचे 8.81 लाख रुपए
नगरखेड़ा मंदिर में कथा समापन पर आयोजित भंडारे में 1 लाख 63 हजार 688 रुपए खर्च हुए। इसके बाद 8 लाख 81 हजार 998 रुपए शेष बचे, जो नगरखेड़ा सभा के प्रधान को सौंप दिए गए। मंडी कमेटी के हिसाब पर जताई नाराजगी
सभा पदाधिकारियों ने बताया कि कथा समाप्ति के बाद मंडी प्रधान जयभगवान गोयल ने आश्वासन दिया था कि सभी काम पूरे होने के बाद बैठकर हिसाब किया जाएगा। बाद में मंडी की ओर से हिसाब दिया गया, लेकिन वह उनकी समझ में नहीं आया। उन्होंने आरोप लगाया कि टेंट के भुगतान के समय कमेटी के सदस्यों को नहीं बुलाया गया। किसे कितना भुगतान हुआ, इसकी स्पष्ट जानकारी नहीं दी गई। इस पूरे मामले में पारदर्शिता की कमी है और इसका जवाब मंडी प्रधान जयभगवान गोयल को देना चाहिए। टेंट के सामान के गुम होने पर भी उठे सवाल
वीर सिंह ने बताया कि अब यह बात भी सामने आई है कि टेंट वाले का करीब साढ़े 7 लाख रुपए का सामान गायब हो गया है और इसके लिए भी भुगतान किया गया है। उन्होंने कहा कि यदि सामान गुम हुआ है तो इसकी जिम्मेदारी टेंट वाले की होनी चाहिए, न कि आयोजकों की। उन्होंने यह भी बताया कि करीब 4 से 5 हजार प्लेटें भी गायब हुई हैं। टेंट वाले ने कुल सवा करोड़ रुपए लिए हैं, ऐसे में अपने सामान की सुरक्षा उसकी जिम्मेदारी बनती है। भंडारे के सामान को लेकर भी उठे सवाल
सभा पदाधिकारियों ने कहा कि भंडारे के दौरान बचा हुआ सामान कहां गया, इसकी जानकारी उन्हें नहीं दी गई। यह भी एक बड़ा सवाल है, जिस पर स्पष्ट जवाब आना चाहिए। मंडी के स्कैनर पर आए पैसों की डिटेल
सभा के अनुसार मंडी की ओर से एक स्कैनर की जानकारी दी गई, जिसमें 2 लाख 94 हजार 723 रुपए आने की बात कही गई है। इसके अलावा कोई अन्य विवरण नहीं दिया गया। यह स्कैनर मंडी प्रधान के छोटे भाई के नाम पर बताया गया है। मैनेजमेंट टीम में नगरखेड़ा सभा को नहीं मिली जगह
सभा पदाधिकारियों ने आरोप लगाया कि आयोजन के दौरान दो अलग-अलग टीमें बन गई थीं। इसके बावजूद नगरखेड़ा सभा के किसी भी सदस्य को मंडी की मैनेजमेंट टीम में शामिल नहीं किया गया। उन्होंने कहा कि जब भंडारे का सामान उठाया गया, तब भी सभा के किसी सदस्य को शामिल नहीं किया गया। इससे पारदर्शिता पर सवाल खड़े होते हैं। समाज भी हिसाब से असंतुष्ट, कमेटी से मांगा जवाब
नगरखेड़ा सभा ने बताया कि मंडी की ओर से दिया गया हिसाब समाज के सामने रखा गया, लेकिन समाज के लोग इससे संतुष्ट नहीं हैं। हिसाब में कई खामियां सामने आई हैं। सभा ने मांग की है कि मंडी की आयोजन कमेटी सामने आकर सभी सवालों का स्पष्ट जवाब दे और पूरा हिसाब पारदर्शी तरीके से प्रस्तुत करे, ताकि समाज में फैली असमंजस की स्थिति खत्म हो सके।
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प्रदीप मिश्रा की कथा में हिसाब को लेकर बवाल:नगरखेड़ा सभा ने मंडी कमेटी पर उठाए सवाल, खुद का पूरा लेखा-जोखा किया सार्वजनिक







