spot_imgspot_img

Top 5 This Week

spot_img

Related Posts

भारत में आवारा कुत्ते बड़ी समस्या:पर ताइवान ने इनकी देखरेख का सबसे सफल मॉडल बनाया, यहां आवारा कुत्तों के लिए पार्क और पूल बने




भारत में आवारा कुत्तों की समस्या सिरदर्द बन चुकी है। सुप्रीम कोर्ट इन्हें मौत की नींद सुलाने की टिप्पणियां कर रहा है, लेकिन ताइवान की राजधानी ताइपे ने इस समस्या का ऐसा समाधान निकाला है, जो अब विश्व मॉडल बन रहा है। आज यहां आवारा कुत्तों को लोग गोद लेते हैं। उनके लिए मेट्रो ट्रेनें हैं। डॉग पार्क हैं। स्वीमिंग पूल हैं, लेकिन ताइपे के लिए यहां तक पहुंचना आसान नहीं था। इसकी भी एक दिलचस्प कहानी है, जो भास्कर को ताइपे में हुई डॉग ​​स्प्रिंग आउटिंग इवेंट में पता चली। इसमें मेयर वांग एन चियांग भी डॉग फ्रेंडली मेट्रो और बस में सवारी करते हुए 100 से अधिक पेट मालिकों के बीच मिलने पहुंचे थे। यहां एरिजोना यूनिवर्सिटी के प्रोफेसर फ्रांसिस नोबर्ट ने इस बदलाव की पूरी कहानी सुनाई। उन्होंने बताया कि एक समय यहां आवारा कुत्तों की गंभीर समस्या थी। इन्हें रोकने के लिए 1998 में एनिमल प्रोटेक्शन एक्ट लागू हुआ। फिर 2013 में ‘12 नाइट्स’ नामक डॉक्यूमेंट्री आई। इसने सरकारी शेल्टरों की भयावह तस्वीर दुनिया के सामने रखी। इसके बाद ताइवान में बड़ा जनांदोलन खड़ा हुआ। पांच उपाय: कुत्तों के कान में माइक्रोचिप, ताकि उसे व मालिक को ढूंढ सकें 1. अनिवार्य डिजिटल पहचान: हर पालतू कुत्ते के कान में माइक्रोचिप लगाई। इसमें कुत्ते और उसके मालिक की जानकारी होती है। इसकी लागत सिर्फ 650 रु. है। 2. जियो-टैगिंग एप से ट्रैकिंग: आवारा कुत्तों की ट्रैकिंग के लिए कृषि मंत्रालय ने एक एप लॉन्च किया है। नागरिक इस पर कुत्ते की फोटो जियो-टैगिंग (लोकेशन) के साथ अपलोड करते हैं, जिसके बाद नगर निकाय की टीम तुरंत उसका टीकाकरण करती है। 3. भारी जुर्माना भी: यदि कोई मालिक अपने कुत्ते को सड़क पर बेसहारा छोड़ता है तो उस पर 10 हजार रु. का जुर्माना लगाते हैं। इसे सख्ती से वसूला जाता है। 4. नसबंदी पर सब्सिडी: सरकार और नगर निगम में नर कुत्ते के लिए 3 हजार रुपए और मादा के लिए करीब 9 हजार रुपए की सब्सिडी दे रहा है। 5. स्मार्ट आउटडोर फीडिंग: खुले में खाना खिलाने वालों को नसबंदी अभियान से जोड़ा।



Source link

कोई जवाब दें

कृपया अपनी टिप्पणी दर्ज करें!
कृपया अपना नाम यहाँ दर्ज करें

Popular Articles