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हिमाचल में फाइनेंसियल इमरजेंसी, MLA सैलरी देने तक पैसे नहीं:मुख्यमंत्री निर्लज्ज होकर झूठ बोल रहे, 6 सीपीएस का बोझ झेलता रहा प्रदेश




हरियाणा के पंचकूला में हिमाचल प्रदेश के पूर्व सीएम जयराम ठाकुर रविवार की शाम PWD रेस्ट हाऊस पहुंचे। जहां पर उन्होंने पत्रकारों से बातचीत में हिमाचल सीएम सुक्खू को निर्लज्ज होकर झूठ बोलने वाला कह दिया। हिमाचल के नेता प्रतिपक्ष जयराम ठाकुर ने कहा कि फिलहाल प्रदेश फाइनेंसियल इमरजेंसी के दौर से गुजर रहा है। कर्मचारियों-पेंशनर को सैलरी देने तक के पैसे सरकार के पैसे नहीं है। MLA-मंत्रियों के सैलरी के एक हिस्से को टालना पड़ रहा है। ऐसे हालात में कांग्रेस के शासनकाल से प्रदेश के लोग क्या उम्मीद कर सकते हैं। ठाकुर ने कहा कि ऐसे हालात के बावजूद 3 साल तक 6 सीपीएस का बोझ हिमाचल के खजाने पर डाल दिया। पहले हाईकोर्ट और बाद में सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर उन्हें वापस लिया गया। हिमाचल में पहली बार ऐसा हो रहा है कि 100 से अधिक डिप्टी एडवोकेट जनरल और एडवोकेट जनरल लगाए गए हैं। उसके बाद भी इलेक्शन टालने के लिए दिल्ली से महंगी फीस पर वकील बुलाए गए। प्रदेश में कभी 40 से अधिक डिप्टी एडवोकेट जनरल और एडवोकेट जनरल नहीं रहे। लेकिन सरकार अभी भी रूकी नहीं है। मोदी सरकार ने प्रदेश को दिया ज्यादा ग्रांट हिमाचल प्रदेश के सीएम बार-बार केंद्र की ग्रांट को लेकर निर्लज्ज होकर झूठ बोलते हैं कि मिलती नहीं है। अगर आंकड़ों की बात की जाए तो मनमोहन सिंह के कार्यक्रम में करीब 18 हजार करोड़ रुपए की मदद केंद्र से मिली थी। लेकिन नरेंद्र मोदी शासनकाल में 89 हजार करोड़ रुपए केंद्र से मिले हैं। झूठी गारंटियां देकर सत्ता में आए सुखविंद्र सुक्खू व कांग्रेसी नेताओं ने सत्ता में आने के लिए झूठी गारंटियों के सपने लोगों को दिखाए। अब दूसरे प्रदेशों के लोगों को जाकर बताते हैं कि हमने 10 गारंटी पूरी कर दी हैं। यह बिल्कुल झूठ है वे गारंटियां पूरी करने में फेल हुए हैं क्योंकि हिमाचल के पास बजट ही नहीं है।



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