पंजाब एंड हरियाणा हाई कोर्ट ने स्पष्ट किया है कि यदि किसी दोपहिया वाहन का बीमा व्यापक (पैकेज) पॉलिसी के तहत किया गया है, तो पीछे बैठे यात्री (पिलियन राइडर) का जोखिम भी बीमा कंपनी की जिम्मेदारी में शामिल होगा। इसी आधार पर अदालत ने सड़क हादसे में जान गंवाने वाले व्यक्ति के परिजनों को दिए गए 53.66 लाख रुपये के मुआवजे को बरकरार रखते हुए बीमा कंपनी की अपील खारिज कर दी। पंजाब एंड हरियाणा हाईकोर्ट ने एक फैसले में इफको टोकियो जनरल इंश्योरेंस कंपनी की अपील खारिज करते हुए मोटर दुर्घटना दावा अधिकरण (एमएसीटी) द्वारा मृतक के परिजनों को दिए गए 53.66 लाख रुपये के मुआवजे को बरकरार रखा है। जस्टिस सुदीप्ति शर्मा ने स्पष्ट किया कि यदि वाहन व्यापक (पैकेज) बीमा पालिसी के तहत बीमित है तो उस पर सवार पिलियन राइडर (पीछे बैठा व्यक्ति) का जोखिम भी बीमा कंपनी की जिम्मेदारी के दायरे में आता है। मामले के अनुसार 26 मई 2021 को मेजर सिंह अपने भाई वरिंदर सिंह की मोटरसाइकिल पर पीछे बैठे हुए जीरकपुर से राजपुरा की ओर जा रहे थे। जीरकपुर में लकी फर्नीचर के पास सड़क किनारे खड़ी एक कार को पार करते समय मोटरसाइकिल अचानक सड़क के बीच की ओर मुड़ी। इसी दौरान पीछे से आ रहे एक अज्ञात टैंकर ने मोटरसाइकिल को टक्कर मार दी। टक्कर के बाद मोटरसाइकिल रेलिंग से जा भिड़ी और मेजर सिंह गंभीर रूप से घायल हो गए। उन्हें अस्पताल ले जाया गया, जहां डॉक्टरों ने मृत घोषित कर दिया। घटना के बाद टैंकर चालक मौके से फरार हो गया। साक्ष्यों के आधार पर दिया था मुआवजा मृतक के परिजनों ने दावा किया था कि मेजर सिंह गांव दमनहेड़ी में स्नैक्स बार चलाते थे और लगभग 50 हजार रुपये प्रतिमाह कमाते थे। परिजनों ने मोटर दुर्घटना दावा अधिकरण में मुआवजे की मांग की थी। अधिकरण ने साक्ष्यों के आधार पर 53.66 लाख रुपये मुआवजा सात प्रतिशत वार्षिक ब्याज सहित देने का आदेश दिया था। बीमा कंपनी ने हाई कोर्ट में दलील दी कि मृतक मोटरसाइकिल पर पिलियन राइडर था और उसे तीसरा पक्ष नहीं माना जा सकता। कंपनी ने यह भी कहा कि पालिसी केवल एक्ट पॉलिसी थी, इसलिए उसकी कोई जिम्मेदारी नहीं बनती। हालांकि अदालत ने पाया कि रिकार्ड पर मौजूद बीमा पालिसी पैकेज पॉलिसी थी और कंपनी ने ट्रिब्यूनल के समक्ष कभी यह साबित नहीं किया कि पिलियन राइडर का जोखिम पॉलिसी से बाहर था। हाईकोर्ट ने सही ठहराया मुआवजा अदालत ने यह भी माना कि दुर्घटना अज्ञात टैंकर चालक और मोटरसाइकिल चालक दोनों की संयुक्त लापरवाही का परिणाम थी। मोटरसाइकिल चालक ने स्वयं स्वीकार किया था कि वह बिना पीछे से आ रहे ट्रैफिक की पर्याप्त जांच किए सड़क के बीच की ओर मुड़ा था। ऐसे में मृतक, जो केवल पीछे बैठा यात्री था, किसी भी प्रकार से दुर्घटना के लिए जिम्मेदार नहीं था। हाईकोर्ट ने कहा कि संयुक्त लापरवाही के मामलों में पीड़ित या उसके आश्रित किसी भी एक दोषी पक्ष से पूरा मुआवजा वसूल सकते हैं। इसी आधार पर बीमा कंपनी पर डाली गई जिम्मेदारी को सही ठहराते हुए उसकी अपील खारिज कर दी गई।
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