हरियाणा के कुरुक्षेत्र में करीब 200 साल पुराने उप-ज्योर्तिलिंग नागेश्वर महादेव मंदिर में रविवार तड़के करीब 108 फीट ऊंचा गुंबद भरभराकर गिर गया। हादसे में मंदिर के सेवादार की मलबे में दबने से मौत हो गई। साथ ही मंदिर के गर्भगृह को भी नुकसान हुआ। मंदिर के गुंबद के अचानक ढहने के पीछे की वजह फिलहाल स्पष्ट नहीं हो सकी है। घटना की खबर फैलते ही बड़ी संख्या में श्रद्धालु मंदिर परिसर में पहुंचने लगे, जिससे मौके पर भारी भीड़ जमा हो गई। सूचना मिलने पर पुलिस टीम भी घटनास्थल पर पहुंची और स्थिति का जायजा लिया। श्रद्धालुओं का कहना है कि उस समय न तेज हवा चली थी और न ही कोई तूफान आया था, ऐसे में गुंबद का अचानक गिर जाना सभी के लिए हैरानी का विषय है। उधर, बाबैन थाने के SHO राजीव कुमार ने बताया कि अभी मामले की जांच चल रही है। शव को कब्जे में लिया गया है। शव का पोस्टमॉर्टम करवाया जाएगा। जानिए क्या है पूरा मामला… 5 साल से मंदिर में रह रहे थे सेवादार मृतक सेवादार की पहचान नटराजन गिरी के रूप में हुई है। नटराजन गिरी करीब 5 साल से बाबैन में बने इस शिव मंदिर में रह रहे थे। फिलहाल पुलिस मामले की जांच में जुटी है। हादसे की सूचना मिलते ही मुख्यमंत्री कार्यालय के प्रतिनिधि कैलाश सैनी भी मौके पर पहुंचे और घटनास्थल का जायजा लिया। मंदिर के बगल में सोया था सेवादार सेवादार नटराजन गिरी मंदिर के बाहर बगल में अपनी चारपाई पर सो रहा था। सुबह करीब 4 बजे अचानक मंदिर की विशाल गुंबद गिर गई, जिससे नटराजन मलबे के नीचे दब गया। गुंबद गिरने की तेज आवाज सुनकर मंदिर के पुजारी व अन्य सेवादार भी मौके पर दौड़ पड़े। पुजारी और ग्रामीणों ने मिलकर हटाया मलबा उन्होंने ग्रामीणों की मदद से मलबा हटाने का काम शुरू किया। काफी मशक्कत के बाद नटराजन गिरी को बाहर निकाला गया, लेकिन तब तक उसकी मौत हो चुकी थी। घटना की खबर फैलते ही बड़ी संख्या में ग्रामीण मंदिर पहुंच गए। लोगों ने राहत कार्य में मदद की। मंदिर के गर्भगृह को भी नुकसान गुंबद गिरने के चलते मंदिर के गर्भगृह को भी नुकसान हुआ है। मंदिर के गर्भगृह के अंदर मलबा गिरने से शिवलिंग व प्रतिमाएं मलबे के नीचे दबी हैं। अभी मंदिर के अंदर से मलबा पड़ा हुआ है। मलबा हटाने के बाद नुकसान का अंदाजा लगेगा। उधर, पुलिस ने शव को कब्जे में लेकर कार्रवाई शुरू कर दी। 20 साल पहले हुआ था मंदिर का जीर्णोद्धार ग्रामीणों के मुताबिक, नागेश्वर महादेव मंदिर क्षेत्र की आस्था का प्रमुख केंद्र है। मंदिर करीब 200 साल पुराना बताया जाता है। यहां स्थापित शिवलिंग स्वयंभू यानी खुद प्रकट हुए थे। करीब 20 साल पहले मंदिर का जीर्णोद्धार कराया गया था। मंदिर का बड़ा गुंबद चार इंच मोटी (चार पट्टी) दीवार पर खड़ा था।
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