हरियाणा में स्टिल्ट+4 मंजिला इमारतों की अनुमति देने वाली नीति पर लगी रोक के मामले में राज्य सरकार अब सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटा सकती है। जानकारी के मुताबिक, राज्य के नगर एवं ग्रामीण योजना विभाग (TCPD) ने पंजाब एंड हरियाणा हाईकोर्ट के 2 अप्रैल के अंतरिम आदेश के खिलाफ विशेष अनुमति याचिका (SLP) दायर करने का फैसला लिया है। हालांकि, इस पर अंतिम मंजूरी मुख्यमंत्री से मिलना अभी बाकी है। दरअसल, हाईकोर्ट ने अपने आदेश में कहा था कि गुरुग्राम जैसे शहरों में पहले से ही बुनियादी ढांचे की कमी है। ऐसे में बिना पर्याप्त सड़क, पानी, सीवर और पार्किंग जैसी सुविधाओं के, मंजिलों की संख्या बढ़ाने से शहर पर अतिरिक्त दबाव पड़ेगा। हाईकोर्ट ने यह भी टिप्पणी की कि केवल अधिक राजस्व कमाने के लिए जनता की सुरक्षा को खतरे में नहीं डाला जा सकता और सरकार को पहले इंफ्रास्ट्रक्चर की क्षमता का आकलन करना चाहिए था। सरकार के सुप्रीम कोर्ट जाने के ये कारण… HC के आदेश के बाद सरकार एक्टिव स्थगन आदेश के बाद, 16 अप्रैल को एसीएस (TCPD) अनुराग अग्रवाल ने सभी शहरी स्थानीय निकायों, हरियाणा शहरी विकास प्राधिकरण (HSVP), गुरुग्राम, फरीदाबाद, सोनीपत और पंचकुला के महानगरीय विकास प्राधिकरणों और टीसीपीडी के निदेशक को पत्र लिखकर कहा कि सड़कों के राइट ऑफ वे (ROW) पर हरित क्षेत्रों/लॉन/लैंडस्केप क्षेत्रों/बाउंड्री वॉल आदि के निर्माण के रूप में अतिक्रमण को तत्काल हटाया जाए और आवासीय भूखंडों में स्टिल्ट फ्लोर में अनधिकृत उपयोग/कब्जा/निर्माण में लिप्त सभी उल्लंघनकर्ताओं के खिलाफ तत्काल कार्रवाई की जाए। यहां पढ़िए स्टिल्ट+4 नीति का पूरा इतिहास
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हरियाणा में स्टिल्ट प्लस 4 बिल्डिंग कंट्रोवर्सी:सरकार सुप्रीम कोर्ट जाने की तैयारी में; TCPD विभाग ने तैयार किया मसौदा, CM की मंजूरी बाकी
