हरियाणा में होने जा रहे शहरी निकाय चुनावों के बीच एक दिलचस्प और महत्वपूर्ण तथ्य सामने आया है। प्रदेश के अंबाला, पंचकूला और सोनीपत नगर निगमों में इस बार बीसी(बी) वर्ग के लिए एक भी ओपन वार्ड नहीं रखा गया है, जिससे इस वर्ग के पुरुष उम्मीदवारों को मजबूरन सामान्य (अनारक्षित) वार्डों से चुनाव मैदान में उतरना पड़ रहा है।
पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट के एडवोकेट और म्युनिसिपल कानून विशेषज्ञ हेमंत कुमार ने बताया कि तीनों नगर निगमों में केवल एक-एक वार्ड बी.सी.(बी) महिला के लिए आरक्षित किया गया है।
यहां पढ़िए कहां-कहां आरक्षित हैं बीसी(बी) महिला के वार्ड इस निकाय चुनाव में अंबाला नगर निगम, वार्ड नंबर 11, पंचकूला नगर निगम वार्ड नंबर 18 और सोनीपत नगर निगम वार्ड नंबर 11 को बीसीबी महिला के लिए आरक्षित किया गया है। इस स्थिति में बीसी(बी) वर्ग के पुरुष उम्मीदवारों को इन नगर निगमों में सामान्य वार्डों से ही चुनाव लड़ना पड़ रहा है।
अंबाला में मेयर पद बीसी(बी) महिला के लिए आरक्षित तीनों नगर निगमों में से अम्बाला नगर निगम का मेयर पद भी बीसी(बी) महिला के लिए आरक्षित है। इसका मतलब है कि इस नगर निगम में बीसी(बी) वर्ग का कोई पुरुष मेयर पद का चुनाव भी नहीं लड़ सकता। यह स्थिति तब है जब हरियाणा के मौजूदा मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी स्वयं बीसी(बी) वर्ग से आते हैं।
कानून में कैसे हुआ आरक्षण का प्रावधान
एडवोकेट हेमंत कुमार के अनुसार, वर्ष 2024 में राज्य सरकार ने नगरपालिका और नगर निगम कानूनों में संशोधन कर बीसी(बी) वर्ग के लिए अलग से आरक्षण का प्रावधान किया था। बाद में विधानसभा ने इन अध्यादेशों को विधेयक के रूप में पारित कर कानून बना दिया।
इससे पहले 2023 में तत्कालीन मुख्यमंत्री मनोहर लाल खट्टर के कार्यकाल में बीसी(ए) वर्ग के लिए आरक्षण का प्रावधान किया गया था।
पहले भी कुछ निगमों में नहीं थे बीसी(बी) ओपन वार्ड
मार्च 2025 में हुए नगर निगम चुनावों में भी हिसार, करनाल और पानीपत में एक भी बीसी(बी) ओपन वार्ड नहीं था। वहीं गुरुग्राम, फरीदाबाद, मानेसर, रोहतक और यमुनानगर में कुछ ओपन वार्ड उपलब्ध थे, जहां बी.सी.(बी) पुरुष और महिला दोनों चुनाव लड़ सकते थे।
इन चुनावों के तहत तीन नगर निगमों के अलावा रेवाड़ी नगर परिषद और उकलाना, सांपला व धारूहेड़ा नगरपालिका समितियों में भी चुनाव कराए जा रहे हैं, जबकि 6 अन्य शहरी निकायों में उपचुनाव होंगे।
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