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हरियाणवी बोली सीख तो ली, मगर फिर हिंदी में बात करना ही भूल गया




भाषा को जल्द से जल्द सीखना हो तो उसकी व्याकरण को समझना ज़रूरी है। भाषा के कुछ रंग होते हैं, वह कैनवास को भरने में मदद करते हैं। हरियाणवी बोली को कहते तो लठमार हैं, लेकिन मुझे यह बोली बड़ी प्यारी लगी। जितना बोलने में मजा आया, उतना ही सीखने में भी। हरियाणवी डायलेक्ट कोच कमल ने सिखाने में बहुत मदद की। बोली तो सिखाई ही, उसको बोलने के तरीके पर भी काम करवाया। यह बताया एक्टर पुलकित सम्राट ने, जो ग्लोरी वेबसीरीज़ के ट्रेलर लॉन्च के लिए सेक्टर-17 में राइटर डायरेक्टर करन अंशुमन, एक्टर्स दिव्येंदु आैर सुविंदर विक्की के साथ पहुंचे थे। हमने इनसे इनके काम करने के तरीके आैर सफर पर बात की। फुक्रे, सनम रे, तैश, फोन भूत, राहू केतू, पागलपंती, ओ तेरी, जय हो, हाथी मेरे साथी, थ्री स्टोरीज़ आदि कई प्रोजेक्ट्स कर चुके हैं। जब आप कई महीने एक ही भाषा में बात करते हैं, तो क्या उसमें से बाहर निकल पाना मुश्किल है? – ग्लोरी शूट करने के बाद जब मैं राहू केतू के सेट पर पहुंचा तो मैंने हिंदी बोलनी थी, मगर मेरी मसल मेमोरी में हरियाणवी ऐसे रची-बसी थी कि कई टेक लेने पड़े हरियाणवी से हिंदी में शिफ्ट होने के लिए। घर पर भी हरियाणवी में ही बात करता था। ऐसा ही मेरे साथ तेलुगू में शिफ्ट करने के दौरान हुआ था। ज़िंदगी के 8-9 महीने मैंने हिंदी बोली ही नहीं। मेरे किरदार ने मुझे बहुत कुछ सिखाया। इस वेबसीरीज के लिए मैं खुद ही रोल मांगने गया था, जो मुझे मिला। मुझे काम मांगने में कोई शर्म नहीं आती। मैंने करन अंशुमन को कॉल किया आैर उनसे मिला। मैंने कहा मुझे तुम्हारे साथ काम करना है क्योंकि अच्छा काम करना है। तब करन ने बताया कि बॉक्सिंग को लेकर कहानी है। हालांकि कहानी कब बनेगी, मुझे नहीं पता था। मगर मैंने बतौर बॉक्सर खुद को सोचना शुरू कर दिया था। चॉकलेट ब्वॉय, कॉमिक, इंटेंस रोल्स के बाद बॉक्सर के किरदार में उतरने के लिए ट्रेनिंग के अलावा खुद को कैसे तैयार किया? – बॉक्सिंग मैं करता तो नहीं हूं, लेकिन बॉक्सिंग को लेकर अलग ही जुनून है। मैं यह भी जानता हूं कि यह कोई बच्चों का खेल नहीं, लेकिन मैं काफी लंबे समय से बॉक्सर का किरदार निभाना चाहता था। मैं इतना ज्यादा उत्साहित था कि किरदार मिलते ही अगले दिन मैं बॉक्सिंग किट ले आया। रंग में शारीरिक रूप से उतरने से पहले अपने ज़हन में रिंग में उतरना था। आप पंच को नकली रूप से लगाकर नहीं दिखा सकते। जब मुझे पता लगा कि सुविंदर विकी सीरीज़ का हिस्सा हैं तो मैंने उनका नंबर लेकर उन्हें कॉल किया। वह जिम में थे। मैं उसी समय प्रेरित हो गया। वैसे तो मैं लंबे समय से फिटनेस में हूं। फिजिकली फिट दिखना मुश्किल नहीं था, मगर बॉक्सर दिखना आसान नहीं था। इसे लेकर मैंने समझा कि अगर आपको एथलीट दिखना है तो उन्हीं की तरह तैयारी करनी होगी। मैंने बॉक्सिंग की ट्रेनिंग ली। मैं 15 घंटे भी बॉक्सिंग के लिए शूट करुं तो भी सेट पर ना थकूं। इस तरह खुद को तैयार किया। शूट के बाद मेरा समय रिंग ट्रेनिंग में जाता था। कई नेशनल और इंटरनेशनल बॉक्सर्स ने हमें ट्रेन किया। निभाई पहली रसोई की रसम आपने एक ट्रेंड शुरू किया है, क्राइंग ग्रूम्स का। यह कैसे हुआ? इस पर पुलकित ने बताया – जब आप को अपना ट्रू लव मिलता है तो खुशी के मारे आंखें नम हो ही जाती हैं। वो बात अलग है कि इसके बाद लोगों को लगा कि लड़के भी रो सकते हैं। मगर, सच कहूं तो मैं बहुत इमोशनल म था। मुझे लगता है कि शादी के बाद जो लड़की को करना पड़ता है, वह लड़कों को भी करना चाहिए। जैसे कृति की पहली रसोई हुई, मैंने भी कृति के घर (जो अब मेरा भी घर है) में पहली रसोई बनाई थी। मैंने हलवा बनाया था। मुझे लगता है कि लड़की और लड़के दोनों को अपना घर छोड़कर नया घर बनाना चाहिए, दोनों को एक साथ आगे बढ़ना चाहिए, न कि केवल लड़कियों को।



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