सोनीपत में करीब 4 महीने पहले मुरथल रोड स्थित पार्क निदान अस्पताल में ऑपरेशन के बाद एक महिला की मौत के मामले में अब पुलिस ने डॉक्टरों के खिलाफ आपराधिक मामला दर्ज कर लिया है। शिकायतकर्ता ने आरोप लगाया था कि अस्पताल प्रबंधन ने दूरबीन (लेप्रोस्कोपिक) सर्जरी का भरोसा देकर फीस ली, लेकिन बिना पूर्व जानकारी ओपन सर्जरी कर दी। ऑपरेशन के दौरान आंत कटने से संक्रमण फैल गया और बाद में महिला की मौत हो गई। मामले की जांच के लिए गठित मेडिकल बोर्ड की रिपोर्ट मिलने के बाद मुरथल थाना पुलिस ने डॉक्टरों के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 106 और 3(5) के तहत एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। मामले को लेकर पार्क निदान के जीएम संतोष कुमार को फोन किया गया। लेकिन उनके द्वारा फोन रिसीव नहीं किया गया और ना ही व्हाट्सएप पर भेजें गए मैसेज का कोई जवाब दिया गया है। जानें…पूरा मामला गांव खेवड़ा निवासी रोहित ने पुलिस को दी शिकायत में बताया कि उसकी मां संतोष देवी के पेट में दर्द रहने पर जांच कराई गई थी, जिसमें बच्चेदानी में दो रसौलियां (फाइब्रॉयड) मिली थीं। इसके बाद 25 मार्च 2026 को वह अपनी मां को मुरथल रोड स्थित पार्क निदान अस्पताल लेकर गया, जहां डॉक्टर विजेता दहिया ने जांच के बाद दूरबीन से छोटा ऑपरेशन करने की बात कही। अगले दिन 26 मार्च को ऑपरेशन के लिए बुलाया गया और ₹25 हजार फीस जमा करवाई गई।
ऑपरेशन के दौरान खून की जरूरत पड़ी शिकायत के अनुसार, ऑपरेशन के दौरान डॉक्टरों ने बताया कि मरीज के शरीर में खून की कमी है और दो यूनिट रक्त की आवश्यकता है। परिजनों ने तुरंत दो यूनिट रक्त उपलब्ध कराया। अस्पताल स्टाफ ने ऑपरेशन के बाद परिवार को बताया कि मरीज की स्थिति सामान्य है। दूरबीन की जगह ओपन सर्जरी का आरोप रोहित का आरोप है कि ऑपरेशन के बाद जब वह अपनी मां से मिला तो उन्होंने बताया कि दूरबीन से ऑपरेशन नहीं हुआ, बल्कि पेट काटकर ओपन सर्जरी की गई है। शिकायतकर्ता का कहना है कि डॉक्टरों ने पहले लेप्रोस्कोपिक सर्जरी का भरोसा दिया था और उसी आधार पर फीस ली गई। लगातार दर्द और बिगड़ती गई हालत शिकायत में कहा गया है कि 27 मार्च को मरीज को आईसीयू से वार्ड में शिफ्ट किया गया, लेकिन उन्हें लगातार पेट में तेज दर्द बना रहा। डॉक्टरों ने दर्द कम करने के लिए बार-बार इंजेक्शन दिए। 28 मार्च को पूरे पेट में सूजन आ गई, जिसके बाद सीटी स्कैन कराया गया। डॉक्टरों ने परिजनों को बताया कि हल्का संक्रमण है और दवाओं से ठीक हो जाएगा। डॉक्टरों ने कहा- आंत में कट लग गया रोहित के अनुसार, 29 मार्च को डॉक्टर गौरव मित्तल और डॉक्टर विजेता दहिया ने उन्हें बुलाकर बताया कि ऑपरेशन के दौरान आंत में कट लग गया था, जिससे संक्रमण फैल गया है। डॉक्टरों ने दोबारा ऑपरेशन करने की सलाह दी और आश्वासन दिया कि इसके बाद मरीज पूरी तरह ठीक हो जाएगी। दूसरे ऑपरेशन से पहले 6 यूनिट ब्लड निकाला 30 मार्च को दोबारा ऑपरेशन की तैयारी की गई। शिकायतकर्ता का कहना है कि इस बार 6 यूनिट रक्त की मांग की गई, जिसे परिवार ने उपलब्ध कराया। उन्होंने आरोप लगाया कि जब उन्होंने मरीज को किसी दूसरे अस्पताल ले जाने की बात कही तो डॉक्टरों ने भरोसा दिलाया कि स्थिति नियंत्रण में है। इसी दौरान कुछ कोरे कागजों पर औपचारिकता बताकर हस्ताक्षर भी करवा लिए गए। 31 मार्च को हो गई महिला की मौत शिकायतकर्ता के अनुसार 31 मार्च 2026 को उसकी मां की मौत हो गई। शिकायत में यह भी दावा किया गया कि मौत के बाद डॉक्टरों ने अपनी लापरवाही स्वीकार की थी, जिसकी ऑडियो और वीडियो रिकॉर्डिंग उनके पास मौजूद हैं। इसके आधार पर अस्पताल का लाइसेंस रद्द करने और संबंधित डॉक्टरों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की गई। अब पढ़िए मेडिकल बोर्ड ने क्या कहा… ऑपरेशन के निर्णय को बताया उचित शिकायत मिलने के बाद मुरथल थाना पुलिस ने मामले की जांच के लिए सिविल सर्जन कार्यालय के माध्यम से मेडिकल बोर्ड से राय मांगी थी। मेडिकल बोर्ड ने अपनी रिपोर्ट में कहा कि मरीज को बच्चेदानी में फाइब्रॉयड और रक्तस्राव की समस्या थी तथा ऑपरेशन का निर्णय उचित था। ऑपरेशन के दौरान आई तकनीकी कठिनाइयों और चिपकाव (एडहीज़न) के कारण ओपन सर्जरी में बदलने का फैसला भी उचित माना गया। हालांकि, मेडिकल बोर्ड ने यह भी कहा कि मरीज की आंत में चोट लगने के बाद समय पर उचित पोस्टऑपरेटिव निगरानी नहीं की गई। रिपोर्ट के अनुसार ऑपरेशन के बाद लगातार पेट दर्द, उल्टी, बुखार और संक्रमण के लक्षण होने के बावजूद मरीज का किसी सर्जन द्वारा समुचित मूल्यांकन नहीं किया गया। डॉ. विजेता दहिया को माना गया लापरवाह मेडिकल बोर्ड ने अपनी राय में कहा कि डॉ. गौरव मित्तल पर आंत की चोट के लिए प्रत्यक्ष लापरवाही नहीं ठहराई जा सकती, लेकिन कठिन सर्जरी के बाद मरीज की पोस्टऑपरेटिव निगरानी बेहतर होनी चाहिए थी। वहीं डॉ. विजेता दहिया को मरीज की क्लिनिकल स्थिति का पर्याप्त मूल्यांकन, दस्तावेजीकरण और जांच रिपोर्टों की सही व्याख्या नहीं करने तथा आंत की चोट की पहचान और दोबारा ऑपरेशन में देरी के लिए लापरवाह माना गया। एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू मेडिकल बोर्ड की रिपोर्ट और शिकायत की तस्दीक के बाद मुरथल थाना पुलिस ने 28 जुलाई 2026 को एफआईआर दर्ज किया। पुलिस ने भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 106 और 3(5) के तहत मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। पुलिस का कहना है कि मामले की विवेचना के दौरान सभी तथ्यों और साक्ष्यों के आधार पर आगे की कानूनी कार्रवाई की जाएगी। डॉक्टर बोलीं – सारी जिम्मेदारी मेरी परिवार ने इस घटना से जुड़ी एक वीडियो भी शेयर की है, जिसमें डॉक्टर विजेता कहती हैं- मैंने संतोष को एडमिट किया था, सारी जिम्मेदारी मेरी है। इसमें मुझसे गलती हुई है, मुझे पहले ही सब बता देना चाहिए था। मुझे दूरबीन से ऑपरेशन करना नहीं आता, इसीलिए डॉक्टर गौरव ने सारा प्रोसिजर किया था। मैंने केवल कैमरा डाला था। हालांकि दैनिक भास्कर एप इस वीडियो की पुष्टि नहीं करता है। 3 पॉइंट में पढ़िए डॉक्टर ने ऑडियो में क्या कहा था…. डॉक्टर का रोते हुए पहला फोन: परिवार ने डॉक्टर विजेता से जुड़ी एक ऑडियो भी शेयर की है। जिसमें डॉ. विजेता दहिया रोते हुए पीड़ित परिवार से बात करती हैं। कहती हैं- जिस डॉक्टर ने ऑपरेशन किया है, वह अब इसे मानने से इनकार कर रहा है। आगे डॉ. विजेता के पति कहते हैं कि अस्पताल उनकी पत्नी पर दबाव बना रहा है। अस्पताल चाहता है कि विजेता कहे, ऑपरेशन उसने किया है। विजेता को नौकरी छोड़ने के लिए भी कहा जा रहा है। फाइल पर साइन करने से इनकार: ऑडियो में डॉक्टर विजेता के पति कहते हैं कि मेरी पत्नी ने कोई ऑपरेशन नहीं किया, इसलिए उन्होंने ऑपरेशन फाइल पर साइन करने से मना कर दिया है। वे इस्तीफा देने को भी तैयार हैं। अस्पताल इस केस में जबरन पत्नी का नाम डाल रहा है। रोज खाना बनाकर घर भेजूंगी: डॉ. विजेता के पति आगे कहते सुनाई दे रहे हैं- विजेता ओपन सर्जरी करती हैं, जबकि दूरबीन से ऑपरेशन डॉक्टर गौरव मित्तल करते हैं। ऑपरेशन उन्होंने ही किया है। बाद में डॉ. विजेता दहिया की आवाज भी आ रही है, जिसमें वे कहती हैं- भैया, आपकी मदर एक्सपायर हुई है, मैं इतनी जिम्मेदारी लेती हूं कि आपके घर में रोज खाना बनाकर भेजूंगी, आपकी मां की कमी पूरी करूंगी।
Source link
