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सोनीपत कोर्ट ने रेपिस्ट को 20 साल की सजा सुनाई:पीड़ित परिवार को मिलेगा मुआवजा; गली में खेल रही बच्ची को साथ ले गया था




सोनीपत में अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश एवं फास्ट ट्रैक स्पेशल कोर्ट (पॉक्सो) ने रेप के 20 सजा सुनाई है। दोषी ने गोहाना के सिटी थाना क्षेत्र में गली में खेल रही एक मासूम बच्ची के साथ दुष्कर्म किया और उसे जान से मारने की धमकी दी थी। यह फैसला नरेंद्र सिंह की कोर्ट ने सुनाया है। कोर्ट ने आरोपी सुनील उर्फ बॉबी को पॉक्सो एक्ट के तहत दोषी ठहराते हुए 20 वर्ष के कठोर कारावास की सजा सुनाई है। इसके साथ ही आरोपी पर कुल 52 हजार रुपए का जुर्माना भी लगाया गया है। जानें…पूरा मामला यह मामला साल 2025 का है। शिकायत के अनुसार गोहाना के सिटी थाना क्षेत्र में गली में खेल रही एक मासूम बच्ची को पड़ोस में रहने वाला आरोपी सुनील उर्फ बॉबी बहला-फुसलाकर अपने घर ले गया। आरोप है कि वहां उसने बच्ची के साथ गलत काम किया और किसी को बताने पर जान से मारने की धमकी दी। घर लौटने के बाद बच्ची ने अपने माता-पिता को पूरी घटना बताई। इसके बाद परिजनों की शिकायत पर अप्रैल 2025 में सिटी थाना गोहाना में आरोपी के खिलाफ पॉक्सो एक्ट सहित विभिन्न धाराओं में मामला दर्ज किया गया था। पॉक्सो एक्ट की धारा-6 में 20 साल की सजा मामले की सुनवाई पूरी होने के बाद विशेष पॉक्सो कोर्ट ने आरोपी को पॉक्सो एक्ट की धारा-6 के तहत 20 वर्ष के कठोर कारावास की सजा सुनाई। अदालत ने इस धारा के तहत 50 हजार रुपए का जुर्माना भी लगाया। जुर्माना अदा नहीं करने की स्थिति में आरोपी को 6 माह का अतिरिक्त साधारण कारावास भुगतना होगा। BNS की धारा 351(2) में भी दोषी करार कोर्ट ने भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 351(2) के तहत भी आरोपी को दो वर्ष के कठोर कारावास और 2 हजार रुपए जुर्माने की सजा सुनाई है। जुर्माना जमा नहीं करने पर एक माह का अतिरिक्त साधारण कारावास भुगतना होगा। स्पेशल प्रॉसिक्यूटर ने दी जानकारी स्पेशल प्रॉसिक्यूटर विजेंद्र सिंह खत्री ने बताया कि अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश एवं फास्ट ट्रैक स्पेशल कोर्ट (पॉक्सो) के न्यायाधीश नरेंद्र ने आरोपी को कुल 52 हजार रुपए के जुर्माने में से 40 हजार रुपए पीड़िता को मानसिक आघात और पीड़ा के मुआवजे के रूप में देने के आदेश दिए हैं। कोर्ट ने इसे पीड़िता के हित में राहत का महत्वपूर्ण हिस्सा माना है। एक साथ चलेंगी दोनों सजा कोर्ट ने आदेश दिया कि पॉक्सो एक्ट और BNS के तहत सुनाई गई दोनों सजाएं साथ-साथ चलेंगी। साथ ही आरोपी द्वारा इस मामले में न्यायिक हिरासत में बिताई गई अवधि को सजा में समायोजित किया जाएगा। डीएलएसए को भेजी जाएगी फैसले की प्रति कोर्ट ने अपने आदेश में कहा कि फैसले की प्रति मुख्य न्यायिक दंडाधिकारी (सीजेएम) सह जिला विधिक सेवा प्राधिकरण (DLSA), सोनीपत को आवश्यक कार्रवाई के लिए भेजी जाए, ताकि नियमानुसार आगे की प्रक्रिया पूरी की जा सके।



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