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सोनिया-संजीव केस में सुप्रीम कोर्ट में फाइनल बहस पूरी:20 अगस्त तक केस से जुड़ा पॉलिसी रिकॉर्ड मांगा; रेलूराम पूनिया हत्याकांड मामला




रेलू राम पूनिया हत्याकांड में जमानत पर रिहा सोनिया और संजीव मामले में आज मंगलवार को सुप्रीम कोर्ट में फाइनल बहस हुई। दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद सुप्रीम कोर्ट ने फांसी की सजा से उम्रकैद केस में बदलने वाली 2001 से लेकर अब तक की पॉलिसी का रिकॉर्ड मांगा है। मामले की सुनवाई जस्टिस दीपांकर दत्ता और जस्टिस शील नागू की पीठ में हुई। सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता जितेंद्र पूनिया व अन्य और प्रतिवादी संजीव कुमार व अन्य की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ताओं की टीम ने पैरवी की। दोनों पक्षों की दलील सुनने के बाद सुप्रीम कोर्ट ने 20 अगस्त को मामले की अगली सुनवाई की तारीख तय की है। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि पूर्व में दिया गया अंतरिम आदेश अगली सुनवाई की तारीख (20 अगस्त 2026) तक जारी रहेगा। जमानत रद करवाने को लगाई थी याचिका बता दें कि पंजाब और हरियाणा उच्च न्यायालय ने 9 दिसंबर 2025 को हत्या मामले में उम्रकैद की सजा काट रहे सोनिया और संजीव को जमानत दे दी थी। इस मामले को लेकर रेलूराम पूनिया के भतीजे जितेंद्र व अन्य की ओर से हाईकोर्ट के आदेश को चुनौती दी गई थी। इस याचिका पर आज मंगलवार (11 अगस्त 2026) को अहम सुनवाई हुई। जमानत पर कई वकील आए साथ इस मामले में याचिकाकर्ताओं की ओर से एडवोकेट आयना वर्मा खोवाल, एडवोकेट लाल बहादुर खोवाल सहित अन्य वकीलों ने पैरवी करते हुए अपना पक्ष रखा। वहीं, प्रतिवादियों की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता अशोक कुमार शर्मा और पीएस दत्ता सहित वकीलों का पैनल अदालत में पेश हुआ। अधिवक्ता लाल बहादुर खोवाल का कहना है कि इस मामले में 20 अगस्त को सुप्रीम कोर्ट फैसला सुना सकता है। 2001 में की थी 8 लोगों की निर्मम हत्या, जानिए पूरा मामला… लोहे की रॉड और डंडों से की गई थी हत्या रेलूराम पूनिया फैमिली हत्याकांड को हरियाणा के सबसे क्रूर मामलों में गिना जाता है। 23 अगस्त 2001 की रात हिसार जिले के लितानी गांव स्थित फार्महाउस में यह खूनखराबा हुआ। सभी लोग गहरी नींद में थे, तभी उन पर हमला किया गया। लोहे की रॉड और डंडों से एक-एक कर सभी को बेरहमी से मार डाला गया। इस हमले में पूर्व विधायक रेलूराम पूनिया, उनकी पत्नी, बेटा, बहू, पोता, पोती और एक अन्य बच्चा मारा गया। इसमें पूरी फैमिली खत्म हो गई थी। 19वें जन्मदिन पर रची थी खौफनाक साजिश सोनिया वही बेटी है, जिसने अपने 19वें जन्मदिन पर अपने ही पिता रेलूराम पूनिया सहित पूरे परिवार को मौत के घाट उतरवाने की साजिश रची थी। संजीव ने पूछताछ में बताया था कि उन्होंने इस हत्याकांड के लिए सोनिया के जन्मदिन को चुना था। पहले सभी को एक साथ गोली मारने की योजना थी, लेकिन ऐसा नहीं हो पाया। इसके बाद लोहे की रॉड से हमला किया गया। जमीन-जायदाद बनी हत्या की वजह जांच में सामने आया कि इस नरसंहार के पीछे जमीन-जायदाद का विवाद था। सोनिया और उसके पति संजीव ने परिवार की संपत्ति पर कब्जा करने की योजना बनाई और इसी लालच में इस हत्याकांड को अंजाम दिया। दोनों ने वारदात के बाद आत्महत्या की भी कोशिश की, लेकिन वे बच गए। अदालत ने इसे पूरी तरह से योजनाबद्ध और क्रूर हत्या माना था। पहले फांसी, फिर उम्रकैद का लंबा कानूनी सफर साल 2004 में अदालत ने सोनिया और संजीव को मृत्युदंड की सजा सुनाई थी। बाद में हाईकोर्ट ने इस सजा को उम्रकैद में बदल दिया। इसके खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी गई। सुप्रीम कोर्ट ने फिर से फांसी की सजा को बहाल कर दिया। इसके बाद दया याचिकाओं और अन्य कानूनी प्रक्रियाओं के चलते सजा का स्वरूप बदलता रहा। अंततः सुप्रीम कोर्ट के एक फैसले के बाद दोनों की सजा उम्रकैद में बदल गई।



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