मोहाली के बहुचर्चित सुच्चा सिंह हत्याकांड में कोर्ट ने दोषी जागीर सिंह को उम्रकैद की सजा सुनाई है। साथ ही एक लाख रुपए जुर्माना भी लगाया है। जुर्माना नहीं भरने पर आरोपी को 6 महीने की अतिरिक्त सश्रम कैद काटनी होगी। इसके अलावा अदालत ने मृतक सुच्चा सिंह की पत्नी सुनीता देवी को मुआवजा देने के लिए जिला कानूनी सेवाएं प्राधिकरण (DLSA) को सिफारिश भी भेजी है। इस पूरे मर्डर केस को सुलझाने और आरोपियों तक पहुंचने में सुच्चा सिंह के पालतू कुत्ते ‘रॉकी’ की भूमिका सबसे अहम और निर्णायक रही। अगर रॉकी न होता, तो शायद यह अंधा कत्ल लंबे समय तक एक रहस्य ही बना रहता। जब सजा सुनाई जा रही थी।
इस दौरान उसने अदालत को कहा कि उसकी उम्र 67 वर्ष है और वह खुद तथा उसकी पत्नी दोनों बीमार हैं। आरोपी ने यह भी दलील दी कि उसके तीनों बच्चे शादी के बाद अलग रहते हैं, इसलिए वह अपनी बीमार पत्नी की देखभाल करने वाला अकेला व्यक्ति और परिवार का मुख्य सहारा है। इसी आधार पर उसने कम सजा देने की अपील की। अब सारी मर्डर की कहानी को क्रमवाइज जानिए बकरियों का सौदा और ₹40,000 का बकाया
मुल्लांपुर स्थित गांव छोटी बड़ी नांगल (मुल्लांपुर गरीबदास) के रहने वाले सुच्चा सिंह बकरियां पालकर अपना और परिवार का गुजर-बसर करते थे। उन्होंने गांव पड़ोल के रहने वाले जागीर सिंह उर्फ घोला को 2 बकरियां और 4 मेमने ₹40,000 में बेचे थे। जब सुच्चा सिंह ने अपने ₹40,000 मांगे, तो जागीर सिंह पैसे देने के बजाय उन्हें धमकियां देने लगा। इसी रंजिश में जागीर सिंह ने सुच्चा सिंह को हमेशा के लिए रास्ते से हटाने का मन बना लिया। पशु चराने गए और अचानक गायब हुए सुच्चा सिंह
12 जून 2021 की दोपहर सुच्चा सिंह अपने गांव के ही साथी बुध राम के साथ जंगल में बकरियां चराने निकले थे। शाम को बकरियां तो अपने आप घर लौट आईं, लेकिन सुच्चा सिंह वापस नहीं पहुंचे। चिंतित पत्नी सुनीता देवी और बेटे संदीप ने जब खोजबीन शुरू की, तो बुध राम ने बताया कि सुच्चा सिंह को जागीर सिंह उर्फ घोला काम के बहाने अपने साथ ले गया था। आखिरी फोन कॉल शाम करीब 7:20 बजे
सुच्चा सिंह के बेटे संदीप के फोन पर एक कॉल आई। कॉल जागीर सिंह के मोबाइल से की गई थी। सुच्चा सिंह ने बेटे को बताया कि वह जागीर सिंह के फार्म हाउस पर काम में व्यस्त हैं और थोड़ी देर में घर लौट आएंगे। परिवार को नहीं पता था कि यह सुच्चा सिंह की आखिरी आवाज थीइसके बाद उनका फोन बंद हो गया और वह कभी घर नहीं लौटे। फार्म हाउस पर खौफनाक वारदात और साक्ष्य मिटाने की साजिश
जागीर सिंह ने अपने फार्म हाउस पर सुच्चा सिंह को धोखे से बुलाया था। उसने अपने साथियों सतनाम सिंह उर्फ सत्ती, देस राज उर्फ देसा और अपने नेपाली नौकर बहादुर के साथ मिलकर सुच्चा सिंह का अपहरण किया और लोहे के ‘दात’ (धारदार हथियार) से उनकी गर्दन काटकर बेरहमी से हत्या कर दी। इसके बाद लाश को ठिकाने लगाने के लिए कसी/बेलचे से फार्म हाउस की दीवार के पास एक गहरा गड्ढा खोदा गया। आरोपियों ने सुच्चा सिंह का धड़ गड्ढे में गाड़ दिया और कटा हुआ सिर पहचान छिपाने के लिए दूसरी जगह ले जाकर दबा दिया। वफादार कुत्ते ‘रॉकी’ की एंट्री और बेनकाब हुआ सच कई दिनों तक पुलिस और परिजनों की छानबीन में कोई सुराग नहीं मिला। इसके बाद परिजन सुच्चा सिंह के पालतू वफादार कुत्ते ‘रॉकी’ को साथ लेकर जागीर सिंह के संदेहास्पद फार्म हाउस पहुंचे। मैदान में छोड़ते ही रॉकी सूंघते हुए सीधे दीवार के पास बने गड्ढे पर जाकर खड़ा हो गया। वह जोर-जोर से भौंकने लगा और अपना सिर हिलाकर परिजनों को इशारा करने लगा। परिजनों ने जब कुदाली से मिट्टी हटाई तो सुच्चा सिंह का पैर और टी-शर्ट दिखाई दी। जेसीबी से खोदा गड्ढा, बिना सिर वाला धड़ देखकर उड़े होश सूचना मिलते ही मुल्लांपुर गरीबदास थाने की पुलिस मौके पर पहुंची। जब जेसीबी बुलाकर गड्ढे की खुदाई कराई गई और शव को बाहर निकाला गया, तो परिजनों और पुलिस के होश उड़ गए सुच्चा सिंह की गर्दन कटी हुई थी और धड़ बिना सिर का था। 17 जून 2021 को पुलिस ने FIR नंबर 84 दर्ज कर जागीर सिंह व उसके साथियों को हिरासत में लिया। कड़ाई से पूछताछ के बाद आरोपियों की निशानदेही पर सुच्चा सिंह का कटा हुआ सिर भी पास के क्षेत्र से बरामद किया गया। सिविल अस्पताल खरड़ के डॉक्टरों का बोर्ड: मेडिकल सबूत पुलिस को पहले बिना सिर का शव मिला था और बाद में कटा हुआ सिर बरामद हुआ। दोनों का पोस्टमार्टम सिविल अस्पताल खरड़ के डॉक्टरों के बोर्ड ने किया। डॉक्टरों ने अपनी रिपोर्ट में बताया कि सुच्चा सिंह की मौत गर्दन पर लोहे के भारी धारदार हथियार (दात) से वार होने और ज्यादा खून बहने के कारण हुई। यह रिपोर्ट अदालत में अहम मेडिकल सबूत बनी। मोहाली FSL के विशेषज्ञ: डीएनए से हुई पहचान शव का धड़ और सिर अलग-अलग जगहों से मिले थे। ऐसे में यह सवाल उठ सकता था कि दोनों एक ही व्यक्ति के हैं या नहीं। मोहाली की फॉरेंसिक साइंस लैब (FSL) ने डीएनए जांच की। रिपोर्ट में साफ हुआ कि कटा हुआ सिर और धड़ दोनों का डीएनए एक ही व्यक्ति, यानी सुच्चा सिंह का है। इस वैज्ञानिक सबूत ने मामले को मजबूत किया और बचाव पक्ष के तर्क कमजोर पड़ गए। सरकारी वकील ने दोषी को मांगी फांसी
सरकारी वकील (एडिशनल पब्लिक प्रॉसिक्यूटर) ने दलील दी थी कि सुच्चा सिंह की बेहद बेरहमी से हत्या की गई है, इसलिए दोषी को फांसी की सजा दी जानी चाहिए। इस पर अदालत ने सुप्रीम कोर्ट के ऐतिहासिक फैसले (बच्चन सिंह बनाम पंजाब राज्य और संगीत व अन्य बनाम हरियाणा राज्य) का हवाला देते हुए अपने फैसले में कहा कि “अदालत की राय में, यह मामला ‘रेअरेस्ट ऑफ रेयर’ (दुर्लभ से दुर्लभतम) की श्रेणी में नहीं आता है। इस मामले के सभी तथ्यों और परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए, दोषी को सश्रम आजीवन कारावास की सजा सुनाई जाती है।
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सुच्चा सिंह मर्डर केस में दोषी को उम्रकैद:कुत्ते के इशारे से सुलझी थी मर्डर की मिस्ट्री; कोर्ट ने एक लाख जुर्माना भी लगाया
