पोस्ट ग्रेजुएट इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल एजुकेशन एंड रिसर्च।
बच्चों की स्किन से जुड़ी बीमारियों के इलाज के लिए अब देश में अलग से विशेषज्ञ डॉक्टर तैयार होंगे। पोस्टग्रेजुएट इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल एजुकेशन एंड रिसर्च (PGIMER), चंडीगढ़ ने डीएम पीडियाट्रिक डर्मेटोलॉजी यानी बच्चों के त्वचा रोगों में सुपर-स्पेशलाइजेशन
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यह देश का पहला ऐसा कोर्स है, जिसमें बच्चों की त्वचा, बाल और नाखूनों से जुड़ी बीमारियों के लिए विशेष रूप से डॉक्टरों को प्रशिक्षित किया जाएगा। यह सुपर-स्पेशलिटी प्रोग्राम INI-SS टेस्ट के माध्यम से शुरू किया गया है।
अब तक बच्चों की त्वचा संबंधी बीमारियों का इलाज सामान्य डर्मेटोलॉजिस्ट ही करते थे। बच्चों की त्वचा बड़ों की तुलना में अधिक संवेदनशील और अलग होती है। ऐसे में इस कोर्स के बाद तैयार होने वाले विशेषज्ञ बच्चों की त्वचा से जुड़ी बीमारियों की बेहतर और सटीक पहचान कर सकेंगे।
इन बीमारियों के इलाज में मिलेगा फायदा
पीडियाट्रिक डर्मेटोलॉजी विशेषज्ञ बच्चों में होने वाली कई गंभीर त्वचा संबंधी बीमारियों का इलाज करेंगे। इनमें:
- एक्जिमा (एटॉपिक डर्मेटाइटिस): त्वचा पर लाल चकत्ते, खुजली और त्वचा का फटना।
- सोरायसिस और अर्टिकेरिया: त्वचा पर पपड़ी जमना, लाल निशान और पित्ती होना।
- स्किन इंफेक्शन और एलर्जी: बैक्टीरिया, फंगस या मौसम और खान-पान से होने वाली एलर्जी।
- सफेद दाग और बालों की समस्याएं: कम उम्र में त्वचा का रंग बदलना, सफेद दाग और बाल झड़ना।
जन्मजात और दुर्लभ बीमारियों की जल्द पहचान
कई बच्चों में जन्म से ही त्वचा से जुड़ी आनुवंशिक और दुर्लभ बीमारियां होती हैं। कई बार इनकी सही पहचान देर से हो पाती है, जिससे इलाज में भी देरी होती है। नए सुपर-स्पेशलाइजेशन कोर्स के बाद पीजीआई में ऐसी बीमारियों की शुरुआती चरण में पहचान पर विशेष ध्यान दिया जाएगा। इससे बच्चों को गलत दवाइयां देने की संभावना कम होगी और बीमारी के अनुसार सही इलाज जल्द शुरू किया जा सकेगा।
एक ही जगह कई विशेषज्ञों की मदद
बच्चों की त्वचा से जुड़ी कई बीमारियां केवल त्वचा तक सीमित नहीं रहतीं। इनका असर शरीर के दूसरे अंगों पर भी पड़ सकता है। ऐसे मामलों में पीडियाट्रिक डर्मेटोलॉजिस्ट के साथ बाल रोग विशेषज्ञ, बच्चों के सर्जन, जेनेटिक्स विशेषज्ञ और अन्य डॉक्टर मिलकर इलाज कर सकेंगे। इससे मरीजों को अलग-अलग विभागों के चक्कर लगाने की जरूरत कम होगी और बच्चे को एक ही जगह पर विशेषज्ञों की संयुक्त चिकित्सा सुविधा मिल सकेगी।
रिसर्च और नई दवाइयों पर भी होगा काम
PGI के निदेशक प्रो. विवेक लाल के अनुसार, इस कोर्स के शुरू होने से बच्चों की त्वचा संबंधी बीमारियों पर उच्च स्तर की रिसर्च और जीनोमिक स्टडी को भी बढ़ावा मिलेगा। रिसर्च के जरिए बच्चों के लिए अधिक सुरक्षित और प्रभावी दवाइयों और इलाज के नए तरीके विकसित किए जा सकेंगे। इसका फायदा देशभर के बच्चों को मिलेगा। खासतौर पर आर्थिक रूप से कमजोर और मध्यम वर्गीय परिवारों को पीजीआई जैसी सरकारी संस्था में कम खर्च में विशेषज्ञ इलाज मिल सकेगा।
पीजीआई में देश के अलग-अलग हिस्सों से बच्चे इलाज के लिए आते हैं। ऐसे में इस नए कोर्स से न केवल पीजीआई में आने वाले मरीजों को फायदा होगा, बल्कि आने वाले समय में देशभर में बच्चों की त्वचा संबंधी बीमारियों के लिए प्रशिक्षित विशेषज्ञ डॉक्टरों की संख्या भी बढ़ेगी।
