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सिरसा में बिजली कटौती-गंदे पानी पर फूटा ग्रामीणों का गुस्सा:पैदल मार्च निकाला, बोले- '4 घंटे भी नहीं मिल रही बिजली, सौंपा मांगपत्र




सिरसा जिले के डबवाली क्षेत्र के गांवों चौटाला, आसाखेड़ा, भारुखेड़ा, तेजा खेड़ा, अबुबशहर, गंगा और कालूआना सहित आसपास के ग्रामीण क्षेत्रों में अघोषित बिजली कटौती और चौटाला गांव में दूषित पेयजल आपूर्ति के विरोध में रविवार को ग्रामीणों ने प्रदर्शन किया। ग्रामीणों ने पंचायत घर से चौटाला बिजली घर तक पैदल मार्च निकाला। प्रदर्शन के बाद, उन्होंने हरियाणा के ऊर्जा मंत्री के नाम एसडीओ रजत शर्मा और जन स्वास्थ्य अभियांत्रिकी विभाग के नाम जेई सनी को ज्ञापन सौंपकर समस्याओं के शीघ्र समाधान की मांग की। ग्रामीण बोले- बार-बार शिकायतों के बाद नहीं हो रही कार्रवाई ज्ञापन में ग्रामीणों ने बताया कि क्षेत्र में बिजली आपूर्ति पूरी तरह अव्यवस्थित है। बार-बार शिकायतें करने के बावजूद संबंधित विभाग कोई प्रभावी कार्रवाई नहीं कर रहा है। इसका सबसे अधिक खामियाजा किसानों को भुगतना पड़ रहा है। कृषि नलकूपों की बिजली बार-बार बाधित होने से किसानों को पूरी रात खेतों में जागना पड़ता है। सरकार 8 घंटे बिजली देने का दावा करती है, लेकिन हकीकत में मुश्किल से 4 घंटे ही बिजली मिल रही है। नहरी पानी उपलब्ध न होने के कारण फसलें पूरी तरह नलकूपों पर निर्भर हैं। समय पर बिजली न मिलने से फसलों के सूखने का खतरा बढ़ गया है, जिससे किसानों को भारी आर्थिक नुकसान उठाना पड़ रहा है। ग्रामीणों ने मांग की है कि गांवों और कृषि नलकूपों के लिए बिना किसी अघोषित या अनावश्यक कटौती के निर्धारित समयानुसार निर्बाध बिजली आपूर्ति सुनिश्चित की जाए। साथ ही, बिजली व्यवस्था में सुधार के लिए संबंधित अधिकारियों की जवाबदेही भी तय की जाए। चौटाला गांव में दूषित पेयजल आपूर्ति का मुद्दा भी उठाया प्रदर्शन के दौरान चौटाला गांव में दूषित पेयजल आपूर्ति का मुद्दा भी प्रमुखता से उठाया गया। ज्ञापन में कहा गया कि गांव में पेयजल के नाम पर नलकूपों का पानी सप्लाई किया जा रहा है, जो पीने योग्य नहीं है। दूषित पानी के कारण बच्चे, बुजुर्ग और अन्य ग्रामीण लगातार बीमार हो रहे हैं तथा अस्पतालों के चक्कर लगाने को मजबूर हैं। इसके बावजूद जन स्वास्थ्य अभियांत्रिकी विभाग इस गंभीर समस्या की अनदेखी कर रहा है। इस दौरान किसान नेता राकेश फगोड़िया ने जन स्वास्थ्य विभाग के जेई से कई सवाल पूछे। उन्होंने पूछा कि ग्रामीणों को उपलब्ध कराए जा रहे पेयजल का टीडीएस (TDS) कितना है, क्या विभाग इस पानी को पीने योग्य मानता है और क्या यही पानी विभाग के अधिकारी या डबवाली के एसडीएम अपनी मेज पर पीने के लिए रख सकते हैं। ग्रामीणों का आरोप है कि विभागीय अधिकारी इन सवालों का संतोषजनक जवाब नहीं दे सके। हालांकि अधिकारियों ने आश्वासन दिया कि भविष्य में स्वच्छ नहरी पेयजल की नियमित आपूर्ति सुनिश्चित करने के लिए आवश्यक कदम उठाए जाएंगे।
गांवों को स्वच्छ नहरी पेयजल उपलब्ध कराना विभाग की जिम्मेदारी राकेश फगोड़िया ने कहा कि गांवों को स्वच्छ नहरी पेयजल उपलब्ध कराना जन स्वास्थ्य अभियांत्रिकी विभाग की संवैधानिक और प्रशासनिक जिम्मेदारी है। यदि विभाग जल्द नहरी पेयजल उपलब्ध कराने में विफल रहता है तो ग्रामीण दूषित पानी के बदले किसी भी प्रकार का पेयजल शुल्क जमा नहीं करवाएंगे और लोकतांत्रिक तरीके से अपने आंदोलन को और तेज करेंगे। प्रदर्शन के अंत में ग्रामीणों ने चेतावनी दी कि यदि अघोषित बिजली कटौती और दूषित पेयजल की समस्या का शीघ्र समाधान नहीं किया गया तो आंदोलन को और व्यापक रूप दिया जाएगा, जिसकी पूरी जिम्मेदारी संबंधित विभागों और प्रशासन की होगी।



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