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सिरसा के बकरियावाली कचरा प्लांट का निरीक्षण:नहीं मिला रीसाइक्लिंग का रिकॉर्ड, गायब मिले ग्रीन बेल्ट के पौधे, केमिकल रिसाव से फसलें प्रभावित




नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (NGT) के आदेश पर सिरसा जिले के गांव बकरियावाली में स्थित कचरा प्लांट का संयुक्त जांच कमेटी ने निरीक्षण किया। इस दौरान प्लांट में कई गंभीर खामियां सामने आईं। कमेटी ने रिपोर्ट तैयार कर NGT को भेजने का आश्वासन दिया है। डीसी के नेतृत्व में पहुंची इस टीम में पंचायती राज विभाग के कार्यकारी अभियंता गौरव भारद्वाज, पॉल्यूशन कंट्रोल बोर्ड सिरसा के एसडीओ हरिप्रसाद, नगर परिषद के अधिकारी, प्लांट से जुड़े ठेकेदार व कर्मचारी शामिल थे। निरीक्षण के दौरान बकरियावाली गांव के सरपंच प्रतिनिधि विनोद कासनिया, पूर्व सरपंच हरि सिंह मंडा, पूर्व जिला परिषद अध्यक्ष प्रतिनिधि महेंद्र बाना, किसान सुभाष कड़वासरा, समाजसेवी जगदीप गोदारा सहित आसपास के गांवों के दर्जनों ग्रामीण भी मौजूद रहे। निरीक्षण के दौरान प्लांट में कई खामियां मिली इस दौरान शिकायतकर्ता गुडिया खेड़ा निवासी हनुमान पूनिया ने कमेटी को पूर्व में जुटाए गए दस्तावेज प्रस्तुत किए। उन्होंने अधिकारियों को मौके की वास्तविक स्थिति से भी अवगत कराया। निरीक्षण के दौरान प्लांट परिसर में कई गंभीर खामियां पाई गईं। पूर्व में लगाए गए 3 लेयर के पौधे पूरी तरह गायब मिले, जिनकी जगह कचरे का बड़ा ढेर लगा हुआ था। कचरा डालने वाले वाहनों की सफाई के लिए बनाया गया सर्विस स्टेशन भी जर्जर हालत में मिला, जिसके आसपास दीवारों तक कचरा फैला हुआ था। रीसाइक्लिंग का कोई रिकॉर्ड मौके पर नहीं मिला इसके अलावा, प्लांट में आने वाले कचरे की मात्रा, उसके निपटान और रीसाइक्लिंग का कोई स्पष्ट रिकॉर्ड मौके पर उपलब्ध नहीं था। अधिकारियों ने इस पर कड़ा रुख अपनाते हुए निर्देश दिए कि प्लांट में उपयोग हो रही सभी मशीनों पर अलग-अलग सब-मीटर लगाए जाएं। साथ ही, उनकी सुबह-शाम रिपोर्ट दर्ज करने और साफ-सफाई व्यवस्था में सुधार के निर्देश भी दिए गए। निरीक्षण के दौरान शिकायतकर्ता हनुमान पूनिया और अन्य ग्रामीणों ने पर्यावरण प्रदूषण को लेकर अपनी चिंताएं व्यक्त कीं। खेतों में नहीं उग रही फसल किसानों ने अधिकारियों को अपनी बंजर होती जमीन भी दिखाई, जहां कचरे से निकलने वाले केमिकल युक्त पानी के रिसाव के कारण फसल उगना बंद हो गया है। ग्रामीणों ने बताया कि क्षेत्र में कैंसर, दमा और त्वचा रोग जैसी बीमारियों के मामलों में बढ़ोतरी हो रही है, जिसकी जांच की मांग भी अधिकारियों से की गई। लोगों ने स्पष्ट कहा कि यह लड़ाई उनके लिए जीवन-मरण का विषय बन चुकी है और जब तक स्थायी समाधान नहीं होता, वे संघर्ष जारी रखेंगे।



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