महर्षि वेद व्यास जयंती के उपलक्ष्य में अखिल भारतीय साहित्य परिषद्, चंडीगढ़ इकाई की ओर से प्रेस क्लब, सेक्टर-27 में काव्य गोष्ठी आयोजित की गई। गोष्ठी की अध्यक्षता परिषद की प्रांतीय अध्यक्ष डॉ. संतोष गर्ग ने की, जबकि मंच संचालन गणेश दत्त बजाज ने किया। उन्होंने कहा कि गुरु तत्व हमें जीवन में सही और गलत का बोध कराकर अंधकार से प्रकाश की ओर ले जाता है। काव्य पाठ के दौरान रचनाकारों ने गुरु की महिमा पर आधारित रचनाएं सुनाईं। कवयित्री सुषमा जोशी ने कहा- गुरु के बिना भटक रही थी मिथ्या संसार में, कौन दिखाए किनारा? गुरु ने ही ज्ञान का दीप जलाया। छंदों की साधिका सरोज चोपड़ा पद्म ने कहा कि गुरु अपने शिष्यों पर जब करते हैं उपकार, तब होती है गुरुकृपा, बहती है रसधार। अखिल भारतीय अग्रवाल संगठन के प्रदेश सचिव राजीव गुप्ता ने कहा कि गुरु की महिमा को लिखने के लिए कई जन्म लेने पड़ते हैं। दुआओं का अनोखा रंग चढ़े जिस पर एक बार, जिंदगी भर कभी उसकी हरियाली नहीं जाती। साहित्यकार एमएल अरोड़ा ने कहा- गुरु एक से अनेक हो सकते हैं, जिस अवसर पर जो राह दिखाए वही आपका गुरु है। कवयित्री नेह शर्मा नेह ने कहा- गुरु की कृपा के बिना कुछ नहीं, गुरु कृपा से ही सब कुछ संभव हो सकता है। डॉ. संतोष गर्ग ने कहा कि इस धरती पर जो पूर्णता हमें अंधेरे से प्रकाश की ओर ले जाए, वही हमारी गुरु है। यह धरती जो हमें झुकना सिखाती है वह भी गुरु है। जल, पेड़, पौधे, पूरी प्रकृति के सभी संसाधन हमें पल पल ज्ञान का बोध करवाते हैं। डॉ. विनोद शर्मा ने कहा कि गुरु के ज्ञान से हमें दूसरा जन्म मिलता है और देह का अभिमान दूर हो कर मन में पवित्रता भर जाती है। गुरु मेरी पूजा, गुरु गोविंद… विश्व गुप्ता ने कहा कि हमें सदैव गुरु की शरण में रहना चाहिए। भगवान धरा पर स्वयं नहीं आते, वह हमें ज्ञान देने के लिए माता पिता के साथ- साथ गुरु के रूप में किसी न किसी को भेज देते हैं। इस गोष्ठी के संयोजन में इकाई महासचिव अनिल शर्मा चिंतक का विशेष सहयोग रहा। अंत में साहित्यप्रेमी सुशील चोपड़ा ने ‘गुरु मेरी पूजा गुरु गोविंद, गुरु मेरा पारब्रह्म गुरु भगवंत’ शब्द सुनाकर सभी को गुरु प्रेम रसधार में डुबो दिया।
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साहित्यकारों ने गुरु की महिमा पर आधारित रचनाएं पेश की
