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संगीतमय शाम में दिखाई दी युवा प्रतिभा




चंडीगढ़ | प्राचीन कला केन्द्र द्वारा संगीत-नृत्य सीख रहे विद्यार्थियों के लिए आयोजित मासिक शृंखला “परंपरा” के अंतर्गत युवा कलाकारों ने केंद्र के मोहाली परिसर में प्रस्तुति दी। इसमें केंद्र के संगीत विभाग के गुरु प्रवेश कुमार और देविंदर सिंह के निर्देशन में लगभग 40 स्टूडेंट्स ने हिस्सा लिया और भारतीय शास्त्रीय संगीत की विभिन्न विधाओं की प्रस्तुति दी। कार्यक्रम का शुभारंभ 11 बच्चों ने सरस्वती वंदना “हंस वाहिनी जगतनयानी” से किया, जो ताल कहरवा पर आधारित रही। इसके बाद राग भीमपलासी पर आधारित बड़े ख्याल की रचना “पिया मोसे काहे न बोले” (एकताल) और छोटे ख्याल “जा जा रे अपने मंदिरवा’ और भजन “भज गोविन्दम्” प्रस्तुत किया गया। युवा कलाकारों ने राग दरबारी कान्हड़ा में बड़े ख्याल “नन्द के छैल छोड़ दे’ और छोटे ख्याल “घर जाने दे’ प्रस्तुत किया। गिटार वादन भी हुआ। कार्यक्रम के समापन पर केन्द्र की रजिस्ट्रार डॉ शोभा कौसर ने कहा- ऐसे कार्यक्रम बच्चों को मंचीय अनुभव प्रदान करते हैं, साथ ही युवा पीढ़ी में भारतीय शास्त्रीय संगीत के प्रति रुचि जागृत करने और देश की समृद्ध सांगीतिक परंपरा के संरक्षण और प्रसार में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।



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