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विधानसभा में CM के व्यवहार ने विरोधियों को चौंकाया:पहले नाराज, फिर इमोशनल हुए भगवंत मान; कांग्रेस को ज्यादा टाइम देने को कहा




पंजाब विधानसभा में हर वक्त हमलावर नजर आने वाले आम आदमी पार्टी (AAP) सरकार के CM भगवंत मान के शुक्रवार के व्यवहार ने विरोधियों को चौंका दिया। यहां CM ने न केवल विपक्षी दल कांग्रेस के नेता प्रताप सिंह बाजवा को सीनियर कहकर सहयोग मांगा बल्कि स्पीकर से कांग्रेस को बोलने के लिए भी ज्यादा टाइम देने के लिए कह दिया। इससे सब हैरान रह गए, हालांकि थोड़ी ही देर में माहौल बदल गया। कांग्रेस MLA सुखपाल खैहरा ने CM के व्यवहार पर सवाल उठाए तो नेता विपक्ष प्रताप सिंह बाजवा ने कहा कि सदन का दरवाजा बंद कर दो। यहां मौजूद हर विधायक की एल्कोमीटर से जांच कराओ। इसको लेकर विधानसभा में हंगामा हो गया। बाद में CM भगवंत मान वहां से चले गए। कांग्रेस ने भी वॉकआउट कर दिया। वित्तमंत्री हरपाल चीमा ने कहा कि CM भगवंत मान पर फर्जी आरोप लगाए जा रहे हैं। सदन में ऐसा क्या हुआ, जो अचानक CM सुर्खियों में आ गए 1. बाजवा ने स्पेशल सेशन पर सवाल उठाए तो CM नाराज हुए
जैसे ही सुबह 11 बजे सेशन शुरू हुआ तो मजदूर दिवस पर मंत्री तरुणप्रीत सिंह सोंध ने मजदूर दिवस को प्रस्ताव पेश किया। प्रस्ताव पर चर्चा से पहले मुख्यमंत्री भगवंत मान और विपक्ष के नेता प्रताप सिंह बाजवा के बीच तीखी बहस हो गई। बाजवा ने कहा कि पिछले चार सालों में आम आदमी पार्टी सरकार द्वारा बुलाए गए आठ विशेष सत्रों से बहुत कम हासिल हुआ है और सदस्यों को जनता से जुड़े मुद्दे उठाने का मौका नहीं मिला। इस पर मुख्यमंत्री भगवंत मान अचानक नाराज हो गए और अपनी सीट से उठकर बाजवा को जवाब देने लगे। मान ने पूछा कि 13 अप्रैल को बुलाया गया विशेष विधानसभा सत्र, जिसमें ‘जागत जोत श्री गुरु ग्रंथ साहिब (संशोधन) बिल, 2026’ पास किया गया था, क्या वह महत्वपूर्ण नहीं था? उन्होंने कांग्रेस पर आरोप लगाया कि उसने कभी बेअदबी विरोधी कानून लाने की कोशिश नहीं की और अब बिल पर भी सवाल खड़े कर रही है। इसके बाद उन्होंने प्रताप सिंह बाजवा से कहा कि मानसून सेशन में हम 10 दिन का सत्र ले आएंगे। आप जितने मर्जी सवाल पूछना चाहें, उस समय पूछ लेना। 2. कांग्रेस को ज्यादा टाइम देने को कहा, रिपोर्टर के जाने पर एतराज जताया
इसके बाद जैसे ही सेशन थोड़ा आगे बढ़ा तो स्पीकर कुलतार सिंह संधवां ने प्रस्ताव पर बहस के लिए समय तय किया। इस दौरान मुख्यमंत्री ने कांग्रेस को बहस के लिए 8 मिनट की बजाय पहले 16 मिनट और फिर 20 मिनट देने की सिफारिश कर डाली। इस पर स्पीकर ने मजाकिया अंदाज में कहा कि आज सदन के नेता विपक्ष पर मेहरबान हैं। सत्र के दौरान मुख्यमंत्री ने विधानसभा की एक महिला रिपोर्टर के स्पीकर के सामने से गुजरने पर भी आपत्ति जताई और कार्रवाई की मांग की। इसके बाद स्पीकर ने रिपोर्टर को प्रोटोकॉल का पालन करने के लिए कहा। 3. खैहरा की बातों पर इमोशनल हुए
मुख्यमंत्री ने कांग्रेस विधायक सुखपाल सिंह खैहरा पर भी निशाना साधा और कहा कि वह मजदूरों के मुद्दे पर चर्चा सुनने की बजाय फोन में व्यस्त हैं। उन्होंने खैहरा के बैठने के तरीके पर भी आपत्ति जताई। खैहरा ने जवाब में कहा कि उन्हें बिना वजह निशाना बनाया जा रहा है और वह सिर्फ अपने फोन पर बिल पढ़ रहे थे। इसके बाद बहस बढ़ने लगी तो सीएम भगवंत मान भावुक होकर कहने लगे, “स्पीकर साहब, यह गवर्नर गैलरी है। यहां बड़े मानयोग लोग आते हैं। यहां अफसर बैठे हैं। गैलरी में पहले ही बताया जाता है कि पैर पर पैर नहीं रखना। जिन्हें कहा गया, उन्होंने ठीक कर लिया। वह तो मेंबर नहीं है। तू (खैहरा) तो मेरी बेटी के बारे में बोलता रहता है। मैं पंजाबी पढ़ाऊंगा। यह बकवास करता है। इसका विधानसभा के खर्च पर इलाज करवाओ जी।” 4. बाजवा ने सवाल उठाए तो कहा- आप अपना सहयोग दें
कांग्रेस नेता प्रताप सिंह बाजवा ने जब कहा कि पंजाब के कई मजदूर सारी स्कीमों का लाभ नहीं उठा पा रहे है। इस पर सीएम ने प्रताप सिंह बावजा को कहा कि आप बहुत सीनियर है। आप जानते हैं कि हमेशा बिहार-UP से कंस्ट्रशन वर्कर आते हैं और फिर चले जाते हैं। जबकि यहां के लोग रह जाते है। आप अपना सहयोग दें। इस पर बाजवा ने कहा कि हम पूरा सहयेाग करेंगे। ताकि वह फंड प्रयोग हो पाए। हरियाणा और पंजाब की मजूदरी में पांच हजार का फर्क है। हरियाणा से पांच सौ अधिक कर लें। दूसरी विनती है साढ़े 7 लाख सरकारी मुलाजिमों का DA बकाया है, उन्हें कोर्ट भी जाना पड़ा, उनका बकाया दे दो। इसके लिए तब तक मेरे समेत सारे विधायक, मंत्रियों और आईएएस अधिकारियों की सैलरी रोक कर उनकी अदायगी करे। इससे एक अच्छा मैसेज जाएगा 5. खैहरा ने CM पर आपत्तिजनक आरोप लगाए
इसी दौरान कांग्रेस विधायक सुखपाल खैहरा ने भी सीएम भगवंत मान को लेकर नशे में आने के आरोप लगाए। इसके बाद प्रताप सिंह बाजवा ने मांग कर दी कि सदन का दरवाजा बंद कर लो। सभी सदस्यों का “एल्कोमीटर टेस्ट” कराया जाए। इस मांग के बाद विधानसभा में भारी हंगामा शुरू हो गया। कांग्रेस विधायक वेल में पहुंच गए और मुख्यमंत्री के सदन से बाहर जाने के बाद भी विरोध जारी रखा। बाद में कांग्रेस विधायकों ने वॉकआउट कर दिया। इस दौरान विधानसभा में भाजपा और शिरोमणि अकाली दल का कोई विधायक मौजूद नहीं था।



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