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लुधियाना में व्यक्ति ने खुद को लगाई आग:70% झुलसा,दर्द से तड़पते हुए बोला-ब्याज और किश्तों वालों ने जीना मुश्किल कर दिया था




लुधियाना के कैलाश नगर इलाके में चंद रुपयों के कर्ज और फाइनेंसरों की लगातार मिल रही धमकियों से टूटकर एक 43 वर्षीय व्यक्ति ने खुद को जिंदा जला लिया। पीड़ित की पहचान संजीव उर्फ मोनू के रूप में हुई है,जो अपने परिवार का पेट पालने के लिए कबाड़ का काम करता है। अस्पताल में जिंदगी और मौत के बीच झूल रहे मोनू के बयानों ने यह साफ कर दिया है कि किस तरह इन सूदखोरों के आतंक ने एक हंसते-खेलते परिवार को बर्बादी की कगार पर लाकर खड़ा कर दिया है। छत पर खाना खाकर लौटा और लगा ली आग पीड़ित के भाई अजय कुमार और रिश्तेदार राजू ने घटना बताते कहा मोनू ने कुछ लोगों से ब्याज और किश्तों पर लगभग 50 से 60 हजार रुपये का कर्ज लिया था। इस मामूली रकम के लिए लक्की टेंट वाले सहित 4-5 अन्य फाइनेंसर उसे लगातार मानसिक रूप से प्रताड़ित कर रहे थे।

अजय ने बताया,वह छत पर रोटी खाने गया था। जब नीचे आया तो उसने देखा मोनू ने खुद को आग लगा ली। कर्ज वाले उसे बहुत ज्यादा परेशान कर रहे थे। अजय के मुताबिक कल रात भी एक कर्जदार का फोन आया था। मोनू ने उसके सामने मिन्नतें कीं और दोपहर 12-1 बजे तक की मोहलत मांगी कि वह पैसों का जुगाड़ कर देगा। लेकिन पत्थरदिल सूदखोरों ने उसकी एक न सुनी और उसे इस कदर जलील और मजबूर कर दिया कि उसने अपनी जान देने की ठान ली। पत्नी का रो-रोकर बुरा हाल: फोन पर धमका रहे थे- पैसे आज ही चाहिए’ मोनू की आर्थिक स्थिति ठीक नहीं थी, जिसके चलते उसकी पत्नी नेहा भी एक फैक्ट्री में काम करती है। घटना के वक्त नेहा अपनी ड्यूटी पर थी, तभी उसे पति के आग लगाने की खबर मिली। अस्पताल पहुंची नेहा का रो-रोकर बुरा हाल है। उसने बताया कि कर्जदार लगातार फोन करके दबाव बना रहे थे और धमकियां दे रहे थे कि हमें पैसे आज ही चाहिए, अभी चाहिए। इस खौफनाक कदम के बाद परिवार के सामने रोजी-रोटी का संकट भी खड़ा हो गया है। मोनू के परिवार में तीन छोटे बच्चे (दो लड़कियां और एक लड़का) और एक बुजुर्ग मां है, जिन्हें आंखों से कम दिखाई देता है। पूरे परिवार का रो-रोकर बुरा हाल है और वे बेबस नजर आ रहे हैं। 70 फीसदी जला शरीर, तड़पते हुए बोला- मरने के सिवा कोई रास्ता नहीं बचा था’ अस्पताल के बेड पर मौत से लड़ रहे मोनू का शरीर 70% तक जल चुका है। दर्द से बुरी तरह कराहते हुए उसने खुद अपने बयान में कहा, किश्तों और ब्याज वालों ने मुझे इतना तंग कर दिया था कि मेरे पास मरने के अलावा और कोई रास्ता ही नहीं बचा था। उसने बताया कि उस पर 30 से 50 हजार रुपये के करीब का कर्ज था, जिसे चुकाने के लिए उसे रोज गालियां और जलालत झेलनी पड़ रही थी। हालत बेहद नाजुक, पटियाला किया गया रेफर फिलहाल मोनू की हालत बेहद नाजुक बनी हुई है। शरीर का 70% हिस्सा जल जाने के कारण स्थानीय अस्पताल में प्राथमिक उपचार के बाद डॉक्टरों ने उसकी गंभीर स्थिति को देखते हुए उसे पटियाला अस्पताल में रेफर कर दिया है।



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