रोहतक के गांव रिठाल में गवर्नमेंट स्कूल के स्टूडेंट क्लास छोड़कर सड़क पर बैठ गए और सरकार के खिलाफ रोष प्रकट किया। स्कूली स्टूडेंटों ने कहा कि हड़ताल करना उनका शौक नहीं, बल्कि मजबूरी है। क्योंकि जंतर मंतर पर अपनी आवाज उठा रहे युवाओं के साथ पुलिस ने आतंकवादियों जैसा व्यवहार किया है। स्कूल के स्टूडेंटों ने कहा कि जंतर मंतर पर युवा अपनी समस्याओं को लेकर गए थे, जिनका जवाब सरकार को देना चाहिए। आए दिन हो रहे पेपर लीक व बढ़ती बेरोजगारी के कारण युवाओं का भविष्य दांव पर लगा हुआ है। प्रजातंत्र में अपनी बात रखने का अधिकार सबको है, लेकिन उनके साथ दिल्ली पुलिस ने बर्बरता की, जिसका पूरे देश में विरोध हो रहा है। सुबह क्लास की बजाय सड़क पर बैठ गए छात्र
गांव रिठाल के सरकारी स्कूल के स्टूडेंट सुबह क्लास में जाने की बजाय वर्दी में ही स्कूल के बाहर सड़क पर बैठे नजर आए। छात्रों को सपोर्ट करने के लिए ग्रामीण भी पहुंच गए। स्टूडेंट सड़क पर बैठकर लगातार नारेबाजी करते रहे और शिक्षक भी केवल उन्हें देखते रहे। सरकार अपनी हठधर्मिता पर कायम
गांव रिठाल के पूर्व सरपंच व किसान मजदूर संगठन हरियाणा के प्रदेशाध्यक्ष उमेद सिंह ने कहा कि सरकार अपनी हठधर्मिता पर कायम है। जंतर मंतर पर युवाओं का हुजुम था, जो सरकार ने पेपर लीक व बेरोजगारी के मुद्दे पर जवाब मांग रहा है, लेकिन सरकार जवाब देने की बजाय उन पर लाठियां व आंसू गैस के गोले चलवा रही है, जैसे वह आतंकवादी हो। किसानों को कल बनाए रखा बंधक
उमेद सिंह ने कहा कि दिल्ली के किसान घाट पर कल महापंचायत बुलाई गई थी, लेकिन पुलिस ने सुबह से ही किसान नेताओं को उनके घर पर ही बंधक बना लिया। हाउस अरेस्ट करके उन्हें दिल्ली जाने से रोका गया। वह भारत देश के नागरिक है और प्रजातंत्र में सभी को अपनी बात रखने का अधिकार है, लेकिन सरकार डरी हुई है और उनके आंदोलन को कुचलने का प्रयास कर रही है। जंतर मंतर पर युवाओं के साथ हुआ गलत व्यवहार
उमेद सिंह ने कहा कि जंतर मंतर पर युवा अपनी बात रखने के लिए एकत्रित हुए थे और केंद्र सरकार में मंत्री धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा मांग रहे थे। लेकिन सरकार के आदेश पर दिल्ली पुलिस ने युवाओं के साथ अमानवीय व्यवहार किया। काफी युवा गंभीर रूप से जख्मी हुए है।
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