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रायबरेली से सांसद लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी की कथित ब्रिटिश नागरिकता को लेकर चल रहे विवाद में इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ बेंच में शुक्रवार को अहम प्रगति हुई। मिनिस्ट्री ऑफ होम अफेयर्स के सिटिजनशिप विंग ने 2 अप्रैल 2026 को अपना हलफनामा दाखिल कर केंद्र सरकार का पक्ष स्पष्ट किया। कोर्ट ने मामले से जुड़ी महत्वपूर्ण फाइलें अगली सुनवाई पर पेश करने के निर्देश दिए। मामले की अगली सुनवाई 6 अप्रैल 2026 को शाम 4 बजे न्यायमूर्ति सुभाष विद्यार्थी की अदालत में निर्धारित की गई है। यह सुनवाई जज के चैंबर में होगी, जहां गृह मंत्रालय को सभी संबंधित दस्तावेज प्रस्तुत करने होंगे। पहली बार हाईकोर्ट में इस स्तर पर सुनवाई यह मामला पहली बार इस स्तर पर लखनऊ बेंच में विस्तार से सुना जा रहा है, जिसमें केंद्र सरकार के गृह मंत्रालय ने आधिकारिक रूप से अपना पक्ष रखा है। याचिकाकर्ता की ओर से दावा किया गया है कि दाखिल हलफनामा उनके आरोपों के समर्थन में महत्वपूर्ण साबित हो सकता है। हालांकि, हलफनामे की सामग्री पर अदालत में विस्तृत बहस अगली सुनवाई में होने की संभावना है। कोर्ट ने मांगी ‘टॉप सीक्रेट’ फाइलें, मंत्रालय को निर्देश सुनवाई के दौरान न्यायमूर्ति सुभाष विद्यार्थी ने गृह मंत्रालय के फॉरेनर्स डिवीजन को निर्देश दिया कि मामले से संबंधित सभी जरूरी दस्तावेज, जिनमें गोपनीय फाइलें भी शामिल हैं, अगली तारीख पर प्रस्तुत की जाएं। याचिकाकर्ता का दावा- ब्रिटेन में वोटिंग के सबूत पेश हुए मामले में याचिका दायर करने वाले विग्नेश शिशिर ने दावा किया है कि उन्होंने कोर्ट के समक्ष ऐसे दस्तावेज और साक्ष्य पेश किए हैं, जिनसे यह संकेत मिलता है कि राहुल गांधी यूनाइटेड किंगडम में मतदाता रहे हैं। वहां चुनावों में भागीदारी से जुड़े रिकॉर्ड मौजूद हैं। हालांकि, इन दावों की सत्यता पर अंतिम निर्णय न्यायालय द्वारा ही किया जाएगा। FIR दर्ज कराने की मांग, निचली अदालत के आदेश को चुनौती यह याचिका आपराधिक प्रार्थना पत्र (क्रिमिनल एप्लिकेशन) के रूप में दाखिल की गई है, जिसमें 28 जनवरी 2026 को स्पेशल MP-MLA मजिस्ट्रेट द्वारा दिए गए आदेश को चुनौती दी गई है। निचली अदालत ने कोतवाली थाना, रायबरेली को FIR दर्ज करने के निर्देश देने से इनकार कर दिया था, जिसे अब हाईकोर्ट में चुनौती दी गई है। कई गंभीर धाराओं में केस दर्ज करने की मांग याचिका में राहुल गांधी के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (BNS) 2023 की विभिन्न धाराओं के साथ-साथ ऑफिशियल सीक्रेट्स एक्ट 1923, पासपोर्ट एक्ट 1967 और फॉरेनर्स एक्ट 1946 के तहत FIR दर्ज करने की मांग की गई है। याचिकाकर्ता का कहना है कि यह मामला राष्ट्रीय सुरक्षा और नागरिकता से जुड़ा गंभीर विषय है।
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राहुल गांधी नागरिकता विवाद:लखनऊ हाईकोर्ट में MHA का हलफनामा, सीक्रेट फाइल तलब; आज होगी अहम सुनवाई







