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भारतीय जनता पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नबीन के पंजाब दौरे के दौरान पहली बार मंच पर तीन ट्रेडिशनल तस्वीरों के साथ एक चौथी तस्वीर देखने को मिली। इस चौथी तस्वीर से साफ हो गया कि पार्टी ने पंजाब विधानसभा चुनाव के लिए नई स्ट्रेटर्जी फाइनल कर दी। भाजपा के मंच पर पार्टी के संस्थापक डॉ श्यामा प्रसाद मुखर्जी, पंडित दीनदयाल उपध्याय और भारत माता की तस्वीरें होती हैं। लुधियाना में संगठनात्मक संवाद के दौरान मंच पर तीन तस्वीरों के साथ चौथी तस्वीर महाराजा रणजीत सिंह की रखी गई। प्रदेश अध्यक्ष केवल सिंह ढिल्लों जहां पहले दिन से राज्य में महाराजा रणजीत सिंह के ‘खालसा राज’ जैसी व्यवस्था लाने की वकालत कर रहे हैं, वहीं लुधियाना पहुंचे राष्ट्रीय अध्यक्ष ने भी महाराजा रणजीत सिंह के सुशासन को भाजपा का विजन बताया। इन तथ्यों से साफ है कि इस बार भाजपा पंजाब में महाराजा रणजीत सिंह को अपना सबसे बड़ा रोल मॉडल बनाकर चुनावी समर में उतरने जा रही है। पॉलिटिकल एक्सपर्ट व सीनियर जर्नलिस्ट प्रमोद बातिश का कहना है कि पहली बार भाजपा के मंच पर चौथी तस्वीर देखी गई है। उनका कहना है कि भाजपा की यह स्ट्रेटर्जी उनके लिए सियासी मददगार होगी। इससे पहले आम आदमी पार्टी शहीद ए आजम भगत सिंह को रोल मॉडल मानकर लोगों का विश्वास जीत चुकी है। महाराजा रणजीत सिंह के ‘खालसा राज’ की बात के सियासी मायने, जानिए… सुशासन का मॉडल महाराजा रणजीत सिंह का राज: प्रमोद बातिश का कहना है कि भाजपा अक्सर देश भर में ‘रामराज्य’ या ‘सुशासन’ की बात करती है, लेकिन पंजाब की धरती पर वह धार्मिक ध्रुवीकरण के बजाय महाराजा रणजीत सिंह के धर्मनिरपेक्ष और कल्याणकारी शासन मॉडल को आगे रख रही है। इसके जरिए पार्टी यह संदेश देना चाहती है कि वह पंजाब को एक ऐसा सुरक्षित और समृद्ध राज्य बनाना चाहती है जहां कानून का राज हो, ठीक वैसा ही जैसा महाराजा के काल में था जब अपराधियों के मन में खौफ था और जनता खुशहाल थी। सिख मतदाताओं को अट्रैक्ट करने की कोशिश: पॉलिटिकल एक्सपर्ट पवनदीप शर्मा का कहना है कि शिरोमणि अकाली दल (SAD) से गठबंधन टूटने के बाद भाजपा पंजाब में अकेले चुनाव लड़ रही है। राज्य में बिना सिख मतदाताओं के समर्थन के सत्ता तक पहुंचना असंभव है। नवनियुक्त प्रदेश अध्यक्ष केवल सिंह ढिल्लों खुद जाट सिख चेहरा हैं। ‘खालसा राज’ शब्द का इस्तेमाल कर भाजपा सिख पंथ और समाज की उस भावना को छूना चाहती है जो अपनी संप्रभुता और गौरवशाली इतिहास से गहराई से जुड़ी है। इसके जरिए पार्टी सिखों के बीच पैठ बनाकर अपने ऊपर लगे ‘शहरी या गैर-सिख’ पार्टी के ठप्पे को मिटाना चाहती है। ‘पंथक’ और क्षेत्रीय राजनीति को टक्कर: प्रमोद बातिश का कहना है कि पंजाब की सियासत में हमेशा अकाली दल खुद को सिखों और पंजाब की एकमात्र हितैषी पार्टी के रूप में पेश करता रहा है। महाराजा रणजीत सिंह को मंच पर स्थान देकर भाजपा यह स्थापित करना चाहती है कि सिखों के गौरवशाली इतिहास और पंजाबियत पर किसी एक क्षेत्रीय दल का एकाधिकार नहीं है। राष्ट्रीय पार्टी होने के बावजूद भाजपा पंजाब की जड़ों और उसकी ऐतिहासिक पहचान का पूरा सम्मान करती है। शिक्षा और सामाजिक सुधार: पॉलिटिकल एक्सपर्ट का कहना है कि महाराजा रणजीत सिंह के शासन में शिक्षा और सामाजिक सुधार के क्षेत्र में कई काम हुए हैं। ऐसे में भाजपा महाराजा रणजीत सिंह के शासन की बात करके मजबूत शिक्षा उनके राज में शिक्षा का स्तर इतना बेहतरीन था कि लाहौर और आसपास के इलाकों में साक्षरता दर ब्रिटिश भारत के अन्य हिस्सों की तुलना में बहुत अधिक थी। वे हर धर्म के धार्मिक त्योहारों में समान रूप से भाग लेते थे। नितिन नबीन के तीन दिवसीय दौरे के सियासी मायने, भास्कर एक्सपर्ट के हवाले से जानिए …
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राष्ट्रीय अध्यक्ष के सामने मंच पर पहली बार ‘चौथी तस्वीर’:भाजपा ने 46 साल पुराना ट्रैंड बदला, मुखर्जी-पंडित जी व भारत माता के साथ महाराजा रणजीत सिंह की तस्वीर







