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राम रहीम केस से हटीं हाईकार्ट जस्टिस सुखविंदर कौर:अब कार्यवाहक चीफ जस्टिस तय करेंगे नई बेंच; साध्वी यौन शोषण में अपील पर सुनवाई




साध्वी यौन शोषण मामले में सजा के खिलाफ डेरा सच्चा सौदा प्रमुख गुरमीत सिंह की अपील की सुनवाई कर रही पंजाब एवं हरियाणा हाई कोर्ट की बेंच में बदलाव होगा। जस्टिस सुखविंदर कौर ने मामले की सुनवाई से खुद को अलग कर लिया है। उन्होंने केस कार्यवाहक चीफ जस्टिस के पास भेजते हुए आग्रह किया है कि इसे ऐसी दूसरी बेंच के सामने लगाया जाए, जिसमें वह शामिल न हों। यह मामला जस्टिस विनोद एस. भारद्वाज और जस्टिस सुखविंदर कौर की बेंच के समक्ष सूचीबद्ध था। अब कार्यवाहक चीफ जस्टिस तय करेंगे कि गुरमीत सिंह की अपील पर आगे कौन सी बेंच सुनवाई करेगी। हाई कोर्ट के निर्देश पर डेरा प्रमुख का कस्टडी सर्टिफिकेट अदालत में पेश किया गया। कोर्ट ने इसे रिकॉर्ड पर ले लिया है। अब मामले की अगली सुनवाई नई बेंच के समक्ष होगी। आरोपों की टाइमलाइन पर ही सवाल पिछली सुनवाई में गुरमीत सिंह की ओर से पेश वकील जितेंद्र खुराना ने कथित घटनाओं और बाद में सामने आए आरोपों के बीच के अंतर को अदालत के सामने प्रमुखता से रखा। बचाव पक्ष ने कहा कि कथित घटनाएं 1999 की बताई गई हैं, लेकिन दुष्कर्म का आरोप पहली बार 2006 में सामने आया। वकील के अनुसार, 2002 से 2005 के बीच दिए गए कई बयानों में दुष्कर्म का कोई आरोप नहीं था।बचाव पक्ष ने इसी आधार पर आरोपों की टाइमलाइन और अभियोजन की कहानी पर सवाल उठाए। घटनास्थल पर भी असमंजस: दो डेरों का जिक्र बचाव पक्ष ने कथित घटनास्थल को लेकर भी गंभीर आपत्ति दर्ज कराई। अदालत में दलील दी गई कि चार्ज में सिर्फ ‘डेरा सच्चा सौदा क्षेत्र स्थित गुफा’ का उल्लेख है। वहीं, गवाही में पुराने और नए डेरे का जिक्र सामने आया। बचाव पक्ष के अनुसार दोनों स्थान करीब 7-8 किलोमीटर दूर बताए गए और दोनों जगह गुफा होने की बात कही गई। बचाव पक्ष ने कहा कि घटनास्थल को लेकर यह अंतर मामले के तथ्यों की जांच के लिहाज से महत्वपूर्ण है। जांच अधिकारी की भूमिका पर भी सवाल बचाव पक्ष ने जांच अधिकारी इंस्पेक्टर सतीश डागर की निष्पक्षता पर भी सवाल उठाए। अदालत में दलील दी गई कि जांच अधिकारी के खिलाफ पहले से शिकायतें थीं। वकील के अनुसार, वर्ष 2005 में ही ऐसे सवाल तैयार करवा लिए गए थे, जिनका संबंध कथित प्रेम पत्र और यौन आरोपों से था। बचाव पक्ष ने कहा कि उस समय तक पीड़िता की ओर से दुष्कर्म का आरोप सामने नहीं आया था। ट्रायल कोर्ट के फैसले में इस्तेमाल भाषा पर आपत्ति बचाव पक्ष ने ट्रायल कोर्ट के फैसले में इस्तेमाल किए गए ‘असाधारण परिस्थितियों में असाधारण उपाय’ जैसे शब्दों पर भी आपत्ति जताई। वकील ने दलील दी कि ट्रायल कोर्ट ने फैसला सुनाते समय कानून की स्थापित कसौटियों से हटकर दृष्टिकोण अपनाया। बचाव पक्ष की ओर से इन्हीं आधारों पर दोषसिद्धि और सजा को चुनौती दी जा रही है। 2017 में दो मामलों में हुई थी 10-10 साल की सजा दो साध्वियों के यौन शोषण के मामले में पंचकूला की सीबीआई कोर्ट ने अगस्त 2017 में गुरमीत सिंह को दोषी ठहराया था। अदालत ने दोनों मामलों में 10-10 साल की सजा सुनाई थी। इसके साथ ही डेरा प्रमुख पर कुल 30.20 लाख रुपए का जुर्माना भी लगाया गया था। सजा के खिलाफ गुरमीत सिंह ने हाई कोर्ट में अपील दायर की है। एक मामले की 10 साल की सजा पूरी होने के बाद दूसरे मामले की 10 साल की सजा शुरू होनी है।



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