spot_imgspot_img

Top 5 This Week

spot_img

Related Posts

फरीदकोट में स्पीकर आवास पर किसानों का मोर्चा:ADC से वार्ता के बाद जाम कार्यक्रम एक दिन टला, मांगें पूरी न होने पर तेज आंदोलन




पंजाब विधानसभा के स्पीकर के गांव संधवां स्थित निवास स्थान के बाहर भारतीय किसान यूनियन (BKU) एकता सिद्धूपुर द्वारा लगाया गया पक्का मोर्चा मंगलवार को लगातार सातवें दिन भी जारी रहा। इस बीच, किसानों द्वारा रेलवे ट्रैक और नेशनल हाईवे जाम करने की दी गई कड़ी चेतावनी के बाद प्रशासनिक हलके में हड़कंप मच गया, जिसके चलते प्रशासन ने आनन-फानन में किसान नेताओं के साथ बैठक की। प्रशासन के ठोस भरोसे के बाद किसानों ने चक्का जाम का अपना कार्यक्रम फिलहाल एक दिन के लिए टाल दिया है। किसानों के कड़े रुख को देखते हुए एडीसी (ADC) केशव गोयल के नेतृत्व में प्रशासनिक अधिकारियों की एक उच्च स्तरीय टीम धरना स्थल पर पहुंची। अधिकारियों ने किसान नेताओं के प्रतिनिधिमंडल के साथ लंबी बातचीत की और उनकी मांगों पर अब तक की गई प्रशासनिक कार्रवाई का ब्यौरा सांझा किया। प्रशासन ने किसानों को विश्वास दिलाया कि सरकार और जिला प्रशासन उनकी सभी मांगों को लेकर पूरी तरह गंभीर हैं और इन्हें जल्द से जल्द पूरा करवाने के प्रयास किए जा रहे हैं। अधिकारियों ने इस दौरान किसानों से मोर्चा समाप्त करने की भी अपील की। मोर्चा उठाने से इनकार, मांगों पर अड़े किसान प्रशासनिक अपील के बावजूद किसान नेताओं ने धरना खत्म करने से साफ इनकार कर दिया। किसान नेता काका सिंह कोटड़ा ने स्पष्ट किया कि उनकी अधिकांश मुख्य मांगें अभी भी जस की तस लटकी हुई हैं और अब तक उन्हें केवल कोरे आश्वासन ही मिले हैं। किसान नेताओं का कहना है कि प्रशासन ने कुछ छोटी मांगों पर तो कार्रवाई की है, लेकिन बड़े मसले अभी भी लंबित हैं। जानिए प्रमुख मांगों के बारे में शंभू और खनौरी बॉर्डर पर चल रहे आंदोलन के दौरान किसानों के हुए नुकसान की उचित भरपाई की जाए। लैंड मॉर्गेज बैंकों द्वारा कर्जदार किसानों से जबरन लिए गए खाली चेक तुरंत वापस करवाए जाएं। किसानों का संपूर्ण कर्ज पूरी तरह से माफ किया जाए।
प्रशासन को मिला 24 घंटे का समय, अन्यथा होगा चक्का जाम किसान यूनियन ने प्रशासन को चेताया है कि वे अपने हक लिए तीखे संघर्ष से पीछे नहीं हटेंगे। उन्होंने मांगों को अमलीजामा पहनाने के लिए प्रशासन को महज एक दिन (24 घंटे) का और समय दिया है। नेताओं ने दो टूक कहा कि यदि तय समय में ठोस परिणाम सामने नहीं आए, तो वे रेलवे ट्रैक और नेशनल हाईवे को पूरी तरह जाम करने जैसा कड़ा कदम उठाने पर मजबूर होंगे, जिसकी जिम्मेदारी सरकार की होगी। मांगों पर गंभीरता से विचार किया जा रहा है इस पूरे घटनाक्रम पर एडीसी केशव गोयल ने कहा कि किसान नेताओं के साथ सकारात्मक माहौल में बातचीत हुई है। उन्हें भरोसा दिया गया है कि सरकार के स्तर पर उनकी मांगों पर गंभीरता से विचार किया जा रहा है और जल्द ही कोई न कोई उचित समाधान निकाल लिया जाएगा।



Source link

कोई जवाब दें

कृपया अपनी टिप्पणी दर्ज करें!
कृपया अपना नाम यहाँ दर्ज करें

Popular Articles