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राजोआणा की अकाल तख्त जत्थेदार से अपील:दया याचिका वापस लेने का आदेश दें; BJP नेताओं को तलब कर जवाब मांगें




पंजाब के पूर्व CM बेअंत सिंह की हत्या के मामले में पटियाला की केंद्रीय जेल में बंद बलवंत सिंह राजोआणा ने श्री अकाल तख्त साहिब के जत्थेदार को लिखे पत्र में अपनी लंबित दया याचिका और मामले में हो रही देरी पर सवाल उठाए हैं। राजोआणा ने कहा कि अदालत ने उन्हें मौत की सजा सुनाई थी, जिसे उन्होंने हंसकर स्वीकार किया। उन्होंने कहा कि 31 मार्च 2012 को चंडीगढ़ की सेशन कोर्ट ने फांसी के लिए डेथ वारंट भी जारी किया था। राजोआणा के अनुसार, उन्होंने अपना संघर्ष श्री अकाल तख्त साहिब को समर्पित कर दिया था। पत्र में उन्होंने कहा कि शिरोमणि गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी लगातार उनके केस की पैरवी कर रही है, लेकिन उनकी अपील पर पिछले 15 साल से कोई फैसला नहीं लिया गया। उन्होंने इसे सिख संस्थाओं का अपमान बताते हुए अपील वापस लेने के लिए श्री अकाल तख्त साहिब से आदेश जारी करने की मांग की है। राजोआणा ने सवाल उठाया कि आखिर कौन-सा सिख सिद्धांत या परंपरा उन्हें इतने लंबे समय तक सरकार के सामने अपील लंबित रखने के लिए मजबूर कर रही है। उन्होंने कहा कि उन्होंने 31 साल पहले अदालत में सच बोलकर अपने किए हुए काम को स्वीकार किया था, लेकिन इतने वर्षों बाद भी उनके मामले में अंतिम फैसला नहीं हुआ। उन्होंने पत्र में बीजेपी के प्रमुख सिख नेताओं को श्री अकाल तख्त साहिब पर तलब कर यह पूछने की मांग भी की कि 6 महीने में होने वाला फैसला 15 साल बाद भी क्यों नहीं हुआ। साथ ही 2019 में जारी नोटिफिकेशन को अब तक लागू न किए जाने और पांच सदस्यीय कमेटी को मिलने का समय न देने पर भी सवाल उठाए। बलवंत सिंह राजोआणा ने कहा कि वह इस मामले में ठोस और जल्द फैसला चाहते हैं, ताकि उनकी चिट्ठियों का भी सुप्रीम कोर्ट में पड़ी 41 तारीखों की तरह इतिहास न बन जाए।



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