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रनियां में फैक्ट्रियों की राख से प्रदूषण:खुलेआम फेंकी जा रही राख, कानपुर देहात में लोगों की शिकायतें अनसुनी




कानपुर देहात के औद्योगिक क्षेत्र रनियां में फैक्ट्रियों से निकलने वाली काली राख खुलेआम फेंकी जा रही है। यह राख हवा में मिलकर न सिर्फ पर्यावरण को प्रदूषित कर रही है, बल्कि स्थानीय निवासियों के स्वास्थ्य पर भी गंभीर असर डाल रही है। मानकों की अनदेखी कर हो रहे इस निस्तारण पर अधिकारियों की चुप्पी पर सवाल उठ रहे हैं। रनियां में संचालित फैक्ट्रियों की चिमनियों से निकलने वाली राख और खाद्य तेल उत्पादन इकाइयों में कच्चे तेल को रिफाइन करने के बाद बची फूड ग्रेड मिट्टी की अवशिष्ट काली राख, दोनों ही स्थानीय लोगों के लिए परेशानी का सबब बन चुकी हैं। विशेष रूप से, साल्वेंट (हेग्जिन) प्लांट से तेल निकालने के बाद बची काली मिट्टी को ठेकेदारों के माध्यम से बाहर फिंकवाया जा रहा है। स्थानीय लोगों का आरोप है कि फैक्ट्री संचालक पर्यावरण मानकों की अनदेखी कर रहे हैं। नियमानुसार, इस खतरनाक अपशिष्ट को ढककर सुरक्षित स्थान या अधिकृत निस्तारण इकाइयों तक पहुंचाया जाना चाहिए, लेकिन इसे आबादी के पास खुले में डाला जा रहा है। राख ढोने वाले ट्रैक्टर जब सड़कों से गुजरते हैं, तो उड़ती धूल राहगीरों के लिए बड़ी समस्या बन जाती है। बाइक सवारों और अन्य वाहनों में बैठे लोगों की आंखों में यह राख पहुंचकर जलन और संक्रमण का कारण बन रही है। निवासियों का कहना है कि उन्होंने कई बार संबंधित विभागों से इस संबंध में शिकायत की है, लेकिन उनकी शिकायतों को अनसुना कर दिया गया। उनका आरोप है कि कुछ लोगों के आर्थिक लाभ के लिए आम जनता के स्वास्थ्य से खिलवाड़ किया जा रहा है। स्थानीय निवासियों ने प्रशासन से तत्काल इस समस्या के समाधान की मांग की है।



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