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केंद्र सरकार द्वारा सशस्त्र बल न्यायाधिकरण (AFT) के फैसलों के खिलाफ बार-बार याचिकाएं दायर करने पर पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट ने कड़ा रुख अपनाया है। कोर्ट ने साफ चेतावनी दी है कि यदि आगे भी पहले से तय मामलों में अपील की गई, तो जिम्मेदार अधिकारियों को अपनी जेब से हर्जाना देना पड़ सकता है। जस्टिस हरसिमरन सिंह सेठी और न्यायमूर्ति दीपक मनचंदा की खंडपीठ ने 22 अप्रैल के आदेश में कहा कि वे इस याचिका को खारिज कर हर्जाना लगाना चाहते थे, लेकिन सरकारी वकील के बार-बार अनुरोध पर फिलहाल ऐसा नहीं किया गया। कोर्ट ने भविष्य में ऐसी प्रवृत्ति जारी रहने पर सख्त कार्रवाई की चेतावनी दी। जानिए पूरा मामला मार्च 2023 में, AFT की चंडीगढ़ बेंच ने पहले से तय मामलों के आधार पर कई सैनिकों को पेंशन का लाभ देने का आदेश दिया था। केंद्र सरकार ने इस आदेश को हाईकोर्ट में चुनौती दी। सरकार की ओर से दलील दी गई कि 1987 के निर्देशों के अनुसार किसी पद पर पेंशन पाने के लिए सेवानिवृत्ति से पहले कम से कम 10 महीने सेवा जरूरी है, जबकि संबंधित सैनिक ने उस पद पर केवल 6 महीने काम किया था। यहां पढ़िए कोर्ट ने क्या कहा… 1. हाईकोर्ट ने पाया कि यही मुद्दा पहले 2017 में AFT की प्रधान पीठ द्वारा तय किया जा चुका है, जिसमें कहा गया था कि पेंशन का लाभ अंतिम रैंक में मिले वेतन के आधार पर दिया जाएगा। इस फैसले को सरकार पहले ही लागू कर चुकी है। 2. कोर्ट ने कहा कि जब समान परिस्थितियों वाले अन्य सैनिकों को पहले ही लाभ मिल चुका है और कानून का प्रश्न पहले ही तय हो चुका है, तो तीन साल बाद उसी मुद्दे पर दोबारा याचिका दायर करना उचित नहीं है। 3. कोर्ट ने यह भी माना कि इस तरह की कार्रवाई सरकार की मुकदमेबाजी नीति और स्थापित कानूनी सिद्धांतों के खिलाफ है। पीठ ने कहा कि संबंधित सैनिक को तीन साल से लाभ नहीं मिला, जबकि उसके पक्ष में आदेश पहले ही आ चुका था। इसलिए इस याचिका को खारिज किया जाता है और भविष्य में ऐसी अपीलें करने पर संबंधित अधिकारियों पर व्यक्तिगत रूप से हर्जाना लगाया जा सकता है।
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रक्षाकर्मियों के मामलों में बेवजह अपील पर हाईकोर्ट सख्त:कहा- अधिकारियों को जेब से भरना पड़ेगा हर्जाना; कड़ी कार्रवाई की चेतावनी दी







